Israel Political Crisis: इजरायल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद अब पूर्व सैन्य प्रमुख गैदी आइजेनकोट को सरकार बनाने के लिए अहम समर्थन मिला है। इजरायल के सबसे बड़े अरब राजनीतिक गठबंधन जॉइंट लिस्ट और राम पार्टी ने गुरुवार को आइजेनकोट के नाम का समर्थन कर दिया। इससे उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग लगातार दूसरे दिन राजनीतिक दलों के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्हें तय करना है कि अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी किस नेता को सौंपी जाए। चुनाव में न तो नेतन्याहू और न ही आइजेनकोट को अपने दम पर बहुमत मिला है। हालांकि, ताजा समर्थन के बाद आइजेनकोट की स्थिति मजबूत होती दिख रही है।
Israel Political Crisis: अरब पार्टियों के समर्थन से आइजेनकोट को बढ़त
इस चुनाव में अरब बहुल राजनीतिक दलों ने कुल 19 सीटें जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। अब सरकार बनाने की प्रक्रिया में इन दलों की भूमिका काफी अहम हो गई है। जॉइंट लिस्ट को 11 सीटें मिली हैं, जबकि राम पार्टी के खाते में 8 सीटें आई हैं। दोनों ने आइजेनकोट को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश करने का फैसला किया है।
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जॉइंट लिस्ट ने बयान जारी कर कहा कि वह राष्ट्रपति हर्जोग को बताएगी कि सरकार बनाने की जिम्मेदारी आइजेनकोट को दी जाए। राम पार्टी ने भी उनके समर्थन का ऐलान किया है। इन समर्थन के बाद आइजेनकोट को नए संसद में 67 सांसदों की सिफारिश मिलने की संभावना जताई जा रही है। इजरायल की संसद यानी नेसेट में कुल 120 सीटें हैं।
नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने की कोशिश
जॉइंट लिस्ट ने कहा कि उसके तीनों घटक दलों ने नेतन्याहू और उनकी सरकार की वापसी रोकने के लिए आइजेनकोट का समर्थन करने पर सहमति जताई है। गठबंधन के मुताबिक, जनता की मांग है कि मौजूदा सरकार को दोबारा सत्ता में आने से रोका जाए।
हालांकि, जॉइंट लिस्ट ने यह भी माना कि विपक्षी गठबंधन ने अभी तक नेतन्याहू की राजनीतिक नीतियों को चुनौती देने और अरब नागरिकों के खिलाफ कथित भड़काऊ बयानों को रोकने की पर्याप्त इच्छा नहीं दिखाई है। इसके बावजूद गठबंधन का मानना है कि आइजेनकोट के समर्थन से नेतन्याहू और उनके बीच अंतर बढ़ेगा और मौजूदा सरकार को बदलने की संभावना मजबूत होगी।
नेतन्याहू के पास भी है सीटों का समर्थन
आइजेनकोट को भले ही नया समर्थन मिला हो, लेकिन नेतन्याहू का राजनीतिक आधार अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। चुनाव के बाद नेतन्याहू के गठबंधन के पास 53 सीटें हैं। इसमें यूनाइटेड टोरा यहूदी पार्टी भी शामिल है। वहीं, आइजेनकोट के विपक्षी गठबंधन के पास 48 सीटें बताई गई हैं।
अरब पार्टियों के समर्थन से आइजेनकोट को बढ़त मिल सकती है, लेकिन उनके सामने एक चुनौती भी है। अगर वह अरब दलों के सहयोग से सरकार बनाते हैं तो विपक्ष के कुछ सांसद इससे नाराज हो सकते हैं। पूर्व सहयोगी और अब नेतन्याहू के आलोचक अविगडोर लिबरमैन भी इस समीकरण में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, फिलिस्तीन के मुद्दे पर उनके विचार भी मौजूदा सरकार के रुख से काफी हद तक मिलते हैं।
सरकार बनाने के लिए मिलेंगे 28 दिन
इजरायल में राष्ट्रपति जिस सांसद को सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपेंगे, उसे इसके लिए 28 दिन का समय मिलेगा। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन की अतिरिक्त मोहलत भी दे सकते हैं। अगर तय समय में सरकार नहीं बन पाती है तो राष्ट्रपति किसी दूसरे सांसद को यह जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।
फिलहाल राष्ट्रपति हर्जोग राजनीतिक दलों से बातचीत कर रहे हैं। इसके बाद ही साफ होगा कि सरकार बनाने का औपचारिक मौका किसे मिलता है और क्या आइजेनकोट अरब पार्टियों के समर्थन को एक स्थायी गठबंधन में बदल पाएंगे।
नेतन्याहू ने चुनाव में विदेशी फंडिंग का लगाया आरोप
इस बीच नेतन्याहू ने विपक्ष पर निशाना साधा है। बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव अभियान में विदेशी ताकतों की ओर से फंडिंग किए जाने को लेकर गंभीर संदेह हैं। नेतन्याहू ने विपक्षी दलों के अरब सांसदों के साथ संभावित गठबंधन पर भी लगातार सवाल उठाए हैं।
अब इजरायल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अरब पार्टियों का समर्थन आइजेनकोट को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा पाएगा या नेतन्याहू एक बार फिर सत्ता बचाने में कामयाब होंगे।
