US Midterm Elections 2026: अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में भारतीय मूल के नेताओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अमेरिकी राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। डेमोक्रेटिक पार्टी के पांच भारतीय-अमेरिकी नेताओं ने प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के चुनाव में जीत हासिल की है। इनमें चार मौजूदा सांसदों ने अपनी सीट बरकरार रखी, जबकि पीया दांडिया ने पहली बार अमेरिकी संसद में जगह बनाई है।
जीत दर्ज करने वाले नेताओं में अमी बेरा, रो खन्ना, सुहास सुब्रमण्यम, प्रमिला जयपाल और पीया दांडिया शामिल हैं। खास बात यह है कि इन नेताओं की जीत अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के समुदाय के बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाती है। पांचों उम्मीदवार डेमोक्रेटिक पार्टी से चुनाव मैदान में थे।
अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों और 36 राज्यों के गवर्नर पदों के लिए मतदान हुआ। आइए जानते हैं भारतीय मूल के इन पांचों विजेताओं के बारे में।
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US Midterm Elections 2026: अमी बेरा: आठवीं बार जीतकर बनाया रिकॉर्ड
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से लगातार आठवीं बार जीत हासिल की है। 61 वर्षीय बेरा ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को हराकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपनी जगह बरकरार रखी।
अमी बेरा पेशे से डॉक्टर रहे हैं। उनका जन्म 1965 में लॉस एंजिलिस में गुजराती प्रवासी माता-पिता के घर हुआ था। उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, इरविन से बायोलॉजिकल साइंस में स्नातक और मेडिकल की डिग्री हासिल की।
बेरा पहली बार 2012 में अमेरिकी कांग्रेस के लिए निर्वाचित हुए थे और जनवरी 2013 में उन्होंने सांसद के रूप में कार्यभार संभाला। वह अमेरिकी कांग्रेस में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले भारतीय-अमेरिकी सांसद हैं। विदेश नीति, स्वास्थ्य सेवाओं और कूटनीतिक मामलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वह हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी में भी काम कर चुके हैं।
रो खन्ना: सिलिकॉन वैली से छठी बार जीत
भारतीय मूल के प्रमुख डेमोक्रेटिक नेता रो खन्ना ने कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत दर्ज की है। सिलिकॉन वैली के बड़े हिस्से को कवर करने वाले इस क्षेत्र से वह लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत बनाए हुए हैं। इस जीत के साथ वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में छठा कार्यकाल शुरू करेंगे।
50 वर्षीय रो खन्ना का जन्म फिलाडेल्फिया में हुआ था। उनके माता-पिता 1970 के दशक में भारत से अमेरिका पहुंचे थे। वह डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील नेताओं में गिने जाते हैं।
रो खन्ना तकनीक, अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार, श्रमिक अधिकारों और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर मुखर रहे हैं। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार और भारतीय मूल के उद्यमी रितेश टंडन को हराया। शुरुआती नतीजों के मुताबिक खन्ना को करीब 72 फीसदी वोट मिले थे।
सुहास सुब्रमण्यम: वर्जीनिया में दूसरी बार जीत
40 वर्षीय सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराया। उन्हें 61 फीसदी से अधिक वोट मिले।
सुहास का जन्म टेक्सास के ह्यूस्टन में भारतीय मूल के माता-पिता के घर हुआ था। उन्होंने न्यू ऑरलियन्स की टुलेन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और बाद में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रित्जकर स्कूल ऑफ लॉ से कानून की डिग्री हासिल की।
राजनीति में आने से पहले वह टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप क्षेत्र में काम कर चुके हैं। उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन के दौरान व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी पॉलिसी एडवाइजर के रूप में भी सेवाएं दी थीं।
इसके बाद वह वर्जीनिया की राजनीति में सक्रिय हुए। 2019 से 2023 तक वर्जीनिया हाउस ऑफ डेलीगेट्स और 2023 से 2024 तक राज्य की सीनेट के सदस्य रहे। 2024 में पहली बार अमेरिकी कांग्रेस पहुंचे और अब दूसरी बार जीत दर्ज की है।
प्रमिला जयपाल: छठी बार जीत, भारतीय मूल की महिलाओं की बड़ी आवाज
भारतीय मूल की प्रमुख महिला नेता प्रमिला जयपाल ने वाशिंगटन राज्य के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से छठी बार जीत हासिल की है। वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली पहली दक्षिण एशियाई-अमेरिकी महिला हैं।
प्रमिला जयपाल का जन्म 1965 में चेन्नई में हुआ था। वह 16 वर्ष की उम्र में अमेरिका चली गई थीं। उन्होंने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और बाद में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए किया।
राजनीति में आने से पहले उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में काम किया। इसके अलावा उन्होंने वाशिंगटन में अप्रवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन OneAmerica की स्थापना की थी।
2016 में पहली बार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए निर्वाचित हुईं जयपाल इमिग्रेशन सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं, आर्थिक असमानता और मानवाधिकारों के मुद्दों पर मुखर रही हैं। वह हाउस की न्यायपालिका, विदेश मामलों और बजट समितियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
हाल ही में भारत की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर उनकी टिप्पणी को लेकर भारत और अमेरिका के बीच भी राजनीतिक बयानबाजी हुई थी।
पीया दांडिया: पहली जीत के साथ अमेरिकी राजनीति में ऐतिहासिक एंट्री
इन पांचों विजेताओं में सबसे ज्यादा चर्चा पीया दांडिया की हो रही है। 39 वर्षीय पीया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल कर पहली बार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जगह बनाई है।
उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर को हराया। पीया को 51.92 फीसदी यानी 1,50,907 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 48.08 फीसदी यानी 1,39,747 वोट हासिल हुए।
पीया का जन्म और पालन-पोषण फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में हुआ। उनके माता-पिता राजस्थान के जयपुर से अमेरिका पहुंचे थे। उनके पिता डॉ. रोहित दांडिया चिकित्सक हैं, जबकि उनकी मां भारती ने राजस्थान विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में मास्टर डिग्री हासिल की थी।
पीया ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से गवर्नमेंट और पब्लिक पॉलिसी की पढ़ाई की तथा बोस्टन यूनिवर्सिटी से एजुकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की थी। इसके बाद न्यूयॉर्क के हार्लेम में Democracy Prep Endurance High School की संस्थापक प्रिंसिपल बनीं। उस समय उनकी उम्र महज 28 साल थी।
उन्होंने बराक ओबामा के बाद के प्रशासनिक दौर में व्हाइट हाउस फेलो के रूप में भी काम किया और बाद में एप्पल से जुड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं से संबंधित परियोजनाओं पर काम किया।
उनकी जीत कई मायनों में ऐतिहासिक है। वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली दूसरी भारतीय-अमेरिकी महिला होंगी। उनसे पहले प्रमिला जयपाल यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। साथ ही वह फ्लोरिडा का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली दक्षिण एशियाई-अमेरिकी सांसद बनेंगी।
अरुणा मिलर की भी वापसी, विवेक रामास्वामी को झटका
इन पांच सांसदों के अलावा भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक नेता और मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर अरुणा मिलर ने भी दोबारा जीत हासिल की है। उन्होंने गवर्नर वेस मूर के साथ चुनाव जीता। अरुणा मिलर का जन्म हैदराबाद में हुआ था और वह सात साल की उम्र में अपने परिवार के साथ अमेरिका चली गई थीं। राजनीति में आने से पहले वह सिविल और ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियर के रूप में काम करती थीं।
दूसरी तरफ भारतीय मूल के रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी को ओहायो के गवर्नर चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिलने के बावजूद वह डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से चुनाव हार गए।
अमेरिकी राजनीति में बढ़ता भारतीय-अमेरिकियों का प्रभाव
इन चुनावों के नतीजे बताते हैं कि भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की आबादी 50 लाख से अधिक मानी जाती है। यह समुदाय अब केवल कारोबार, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिकी संसद, राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
खास बात यह है कि इन नेताओं की जीत केवल भारतीय मूल के मतदाताओं के समर्थन तक सीमित नहीं मानी जा सकती। अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी राजनीतिक पकड़ और व्यापक मतदाता समूहों के बीच स्वीकार्यता भी उनकी सफलता का महत्वपूर्ण आधार है।
पांच भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसदों की जीत ऐसे समय में हुई है, जब मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में बढ़त बनाकर रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया है। नवनिर्वाचित कांग्रेस का कार्यकाल 3 जनवरी 2027 से शुरू होगा।
