India-China Border Tension: अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच एक बार फिर आमने-सामने की स्थिति ने सीमा पर तनाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है। ऊपरी सुबनसिरी जिले के असाफिला और ताक्सिंग इलाकों में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों की गतिविधियों और भारतीय दावे वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब तंबू लगाए जाने की खबरों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सीमा पर ऐसे तनावपूर्ण हालात आमतौर पर तब पैदा होते हैं, जब चीनी सैनिक निर्धारित गश्त के तौर-तरीकों से अलग गतिविधियां करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने भी अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने की पुष्टि की है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इन घटनाओं में किसी हिंसक झड़प की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि सीमा पर आखिर क्या हो रहा है, चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा क्यों जताता है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के बावजूद तनाव पूरी तरह क्यों नहीं थम रहा है?
India-China Border Tension: अरुणाचल के किन इलाकों में आमने-सामने हैं भारतीय और चीनी सैनिक?
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताक्सिंग (Taksing) क्षेत्र में असाफिला और लॉन्गजू जैसे सीमावर्ती इलाके संवेदनशील बने हुए हैं। जुलाई 2026 के आखिर से यहां सैनिकों के बीच तनाव की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चीनी सैनिकों ने भारत की LAC संबंधी धारणा से करीब 6-7 किलोमीटर भीतर तंबू लगाए।
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23-24 अक्टूबर की रिपोर्टों में ITBP महानिदेशक के बयान के बाद इन घटनाओं की चर्चा तेज हुई। हालांकि, 24 अक्टूबर को रक्षा सूत्रों ने कहा कि जमीनी स्थिति स्थिर और नियंत्रण में है तथा किसी हिंसक झड़प की सूचना नहीं है। दोनों देशों के सैनिकों के बीच अलग-अलग स्थानों पर आमना-सामना होने की स्थिति बनी हुई है।
LAC पर तनाव की असली वजह क्या है?
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद की सबसे बड़ी जटिलता यह है कि दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर पूरी तरह साझा और स्पष्ट समझ नहीं है। कई सीमावर्ती क्षेत्रों में दोनों देशों की सीमा संबंधी धारणाएं एक-दूसरे से अलग हैं। ऐसे में जब सैनिक नियमित गश्त के दौरान एक-दूसरे के दावे वाले क्षेत्र में पहुंचते हैं, तो आमने-सामने की स्थिति पैदा हो सकती है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अक्टूबर को कहा कि चीनी सैनिकों के स्थापित गश्त के तौर-तरीकों से अलग हटने पर सीमा क्षेत्रों में समय-समय पर स्थिति बिगड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश मौजूदा सैन्य और कूटनीतिक व्यवस्थाओं के जरिए विवाद सुलझाने और गलतफहमी या गलत आकलन से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जंगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत कहता है और इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है। भारत ने चीन के इस दावे को लगातार खारिज किया है। नई दिल्ली का स्पष्ट रुख है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 से अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के चीनी नाम जारी करने की प्रक्रिया अपनाई है। भारत इसे अपने क्षेत्र पर चीन के दावे को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखता है।
इसके जवाब में भारत ने भी अपने क्षेत्रीय दावे को आधिकारिक रूप से दर्ज करने पर जोर दिया है। अगस्त 2026 में भारत ने राज्य के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं की मानक पहचान आधिकारिक भारतीय मानचित्र पर दर्ज करने की जानकारी दी। इस सूची में लॉन्गजू का नाम भी शामिल है, जिस पर भारत अपना दावा करता है, जबकि यह क्षेत्र 1959 से चीन के नियंत्रण में बताया जाता है।
भारत का मानना है कि स्थानों के आधिकारिक नाम और पहचान दर्ज करना क्षेत्रीय संप्रभुता स्पष्ट करने और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए जरूरी है।
सितंबर में हुई थी सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत
अरुणाचल में मौजूदा तनाव के बीच भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों ने सितंबर में बातचीत भी की थी। 6 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश के वाचा में और 7 सितंबर को चीन की ओर दमाई में वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तर की फ्लैग मीटिंग हुई थी।
यह पूर्वी क्षेत्र में इस स्तर पर बातचीत की एक महत्वपूर्ण पहल थी। इसका उद्देश्य LAC से जुड़े मुद्दों पर संवाद करना और स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाली गलतफहमियों को दूर करना था। इससे पहले दोनों देशों के स्थानीय सैन्य कमांडरों के बीच भी बैठकें हुई थीं।
हालांकि, इन बैठकों के बाद भी अक्टूबर में कई स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति बने रहने की पुष्टि हुई। इससे स्पष्ट है कि बातचीत के रास्ते खुले होने के बावजूद सीमा पर हर विवाद का तत्काल समाधान नहीं निकल रहा है।
सैन्य तैयारी में भारत से आगे निकला चीन!
ITBP महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने हालिया घटनाओं के दौरान बल की शौर्य कमांडो टीमों के प्रदर्शन की सराहना की। हालांकि उन्होंने यह भी कहा की चीन हमसे बहुत आगे निकाल चुका है। रक्षा के क्षेत्र में जिस तरह से चीन खर्च कर रहा है उससे उसकी सैन्य तकनीक और क्षमता भारत से कहीं आगे निकाल गई है। उन्होंने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में काम करने की क्षमता बढ़ाने के लिए ITBP अपनी विशेष इकाइयों को मजबूत कर रहा है। बल की योजना एक पूर्ण शौर्य कमांडो बटालियन तैयार करने की है। इसके साथ ही सीमावर्ती इकाइयों के लिए ड्रोन प्लाटून, ड्रोन रोधी प्रणालियों और आधुनिक उपकरणों पर भी जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और सीमा प्रबंधन की क्षमता को बेहतर बनाना है।
कांग्रेसने मोदी सरकार से मांगा जवाब, राष्ट्रीय सुरक्षा पर उठाए सवाल
अरुणाचल में सैनिकों के आमने-सामने आने की खबरों के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने घटनाक्रम को बेहद चिंताजनक बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा।
खरगे ने राष्ट्रीय सुरक्षा, चीन के साथ भारत के आर्थिक संबंधों और लगातार हो रही कूटनीतिक बातचीत के नतीजों पर सवाल उठाए। कांग्रेस की मांग है कि सरकार सीमा की वास्तविक स्थिति और चीन की गतिविधियों को लेकर स्पष्ट जानकारी दे।
2020 के गलवान संघर्ष के बाद संबंध सामान्य करने की कोशिश
भारत और चीन के संबंध 2020 में पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध और गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। दोनों देशों ने इसके बाद सीमा पर तनाव कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने के लिए कई दौर की बातचीत की।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के बीच सामान्य संबंधों के लिए अनिवार्य है। सितंबर में विदेश मंत्रालय ने भारत-चीन संबंधों को धीरे-धीरे सकारात्मक दिशा में बढ़ता बताया था।
लेकिन अरुणाचल प्रदेश में जारी आमने-सामने की घटनाएं दिखाती हैं कि व्यापक कूटनीतिक सुधार और जमीन पर सीमा विवाद का समाधान दो अलग चुनौतियां हैं। जब तक LAC को लेकर मतभेद और गश्त से संबंधित विवाद प्रभावी ढंग से नहीं सुलझते, तब तक स्थानीय स्तर पर तनाव दोबारा उभरने की आशंका बनी रहेगी।
आगे क्या?
24 अक्टूबर तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के संवेदनशील इलाकों में स्थिति नियंत्रण में बताई गई है और किसी हिंसक सैन्य संघर्ष की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, सैनिकों की तैनाती, गश्त के दौरान आमना-सामना और सीमा पर अलग-अलग दावों के कारण सतर्कता जरूरी बनी हुई है।
भारत के लिए चुनौती यह है कि वह सीमा पर अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय दावे बरकरार रखते हुए चीन के साथ सैन्य तथा कूटनीतिक संवाद जारी रखे। वहीं, चीन के साथ संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कितने प्रभावी कदम उठाते हैं।
