Sanjay Raut on Albania Protests: शिवसेना यूबीटी (Shiv Sena UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने अल्बानिया में चल रहे हिंसक सरकार विरोधी प्रदर्शनों का हवाला देते हुए भारत को भी इससे सबक लेने की नसीहत दी है। उन्होंने मराठी में किए गए एक ट्वीट में अल्बानिया की घटनाओं को लेकर अपनी बात रखी और दावा किया कि वहां लोग भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे प्रधानमंत्री को न्यायपालिका से मदद मिलने से नाराज हैं।
राउत के मुताबिक, इसी नाराजगी के चलते प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संस्थानों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से हर देश को सीखना चाहिए और खास तौर पर भारत को इनसे सबक लेना चाहिए। (Sanjay Raut on Albania Protests) संजय राउत ने इसके साथ एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें अल्बानिया के सुप्रीम कोर्ट (Albania Supreme Court) की इमारत से आग की लपटें उठती हुई दिखाई दे रही हैं। अल्बानिया में अक्टूबर के दौरान सरकार विरोधी प्रदर्शन कई दिनों तक जारी रहे और हिंसा भी हुई।
Sanjay Raut on Albania Protests: संजय राउत ने भारत को क्या दिया संदेश?
संजय राउत ने अपने मराठी ट्वीट में अल्बानिया की स्थिति का जिक्र करते हुए लिखा कि लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया और जनता इसलिए नाराज थी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट एक भ्रष्ट प्रधानमंत्री की मदद कर रहा था। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने संसद, सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों के घरों को भी निशाना बनाया।
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राउत ने आगे कहा कि हर देश को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए और खासकर भारत को इनसे सीखना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब खुद संजय राउत भारत में न्यायपालिका को लेकर की गई अपनी टिप्पणियों के कारण अवमानना की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने राउत से मांगा जवाब
कुछ दिन पहले भारत के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायपालिका को लेकर सार्वजनिक रूप से की गई टिप्पणियों के मामले में संजय राउत को आपराधिक अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हालांकि राउत को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से राहत दी थी। अदालत ने कहा था कि वह पहले संजय राउत के जवाब पर विचार करेगी।
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब प्रधान न्यायाधीश ने विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल की व्यक्तिगत मुलाकात की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने संकेत दिया था कि इस मुद्दे को याचिका के जरिए अदालत के सामने रखा जा सकता है।
इसके बाद संजय राउत की तरफ से कथित तौर पर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन यानी एससीबीए ने भी राउत की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई थी। एससीबीए का कहना था कि न्यायपालिका के खिलाफ लगाए गए उनके आरोप उपलब्ध रिकॉर्ड के विपरीत हैं।
अल्बानिया में क्यों भड़का इतना बड़ा विरोध?
अल्बानिया यूरोप के बाल्कन क्षेत्र में स्थित देश है और उसकी राजधानी तिराना में प्रधानमंत्री एडी रामा की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हुए हैं। अक्टूबर में इन प्रदर्शनों में छात्र, युवा और सरकार के विरोधी बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की रही है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, भ्रष्टाचार के आरोपों, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और जीवनयापन से जुड़ी परेशानियों ने विरोध को और व्यापक बनाया है।
इन प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह उपप्रधानमंत्री बेलिंडा बालुकू से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप भी रहे हैं। उन पर सरकारी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के ठेके देने में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। बालुकू ने इन आरोपों को खारिज किया है और जांच में सहयोग करने की बात कही है।
इसके अलावा युवाओं के बीच रोजगार की कमी और बढ़ती जीवनयापन लागत को लेकर भी नाराजगी है। छात्र विश्वविद्यालयों की खराब स्थिति, बढ़ती फीस और रोजगार के सीमित अवसरों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
लग्जरी रिसॉर्ट को लेकर भी विरोध
अल्बानिया में लंबे समय से एक प्रस्तावित लग्जरी रिसॉर्ट (Luxury Resort) को लेकर भी विरोध चल रहा है। इस परियोजना को लेकर प्रदर्शनकारियों ने पर्यावरण और पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाए हैं। इस निवेश को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से जुड़े निवेशकों से जोड़ा गया है। यही मुद्दा बाद में व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन का हिस्सा बन गया।
समय के साथ इस आंदोलन में भ्रष्टाचार, शिक्षा, बेरोजगारी और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दे भी जुड़ गए। अक्टूबर में छात्र भी बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए और प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग तेज हुई।
सुप्रीम कोर्ट की इमारत में भी लगी आग
18 अक्टूबर को अल्बानिया की राजधानी तिराना में प्रदर्शन के दौरान सुप्रीम कोर्ट की इमारत के एक हिस्से में आग लगाए जाने की खबर सामने आई। इससे पहले भी प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कार्यालयों और मंत्रालयों को निशाना बनाया था। सुप्रीम कोर्ट की इमारत में आग लगने का वीडियो भी सामने आया, जिसे संजय राउत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शेयर किया।
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों में पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार और बाद में रबर की गोलियों का भी इस्तेमाल किया। कई लोग घायल हुए और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। अल्बानियाई पुलिस के मुताबिक, कई दिनों के विरोध के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी घायल हुए।
एडी रामा ने इस्तीफे से किया इनकार
अल्बानिया के प्रधानमंत्री एडी रामा (Edi Rama) ने प्रदर्शनकारियों की इस्तीफे की मांग को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि हिंसक प्रदर्शनों से सरकार से ज्यादा अल्बानिया के यूरोपीय संघ यानी ईयू (European Union) में शामिल होने के प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है। रामा ने सरकार के भ्रष्टाचार से लड़ने और अल्बानिया को यूरोपीय संघ का सदस्य बनाने के लक्ष्य पर काम जारी रखने की बात कही है।
दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों और जनता की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। अक्टूबर में विरोध प्रदर्शन और हिंसक झड़पें कई दिनों तक जारी रहीं और इसका असर तिराना से बाहर के इलाकों में भी देखने को मिला।
ऐसे समय में संजय राउत का अल्बानिया की घटनाओं को भारत से जोड़कर यह कहना कि सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए, खासकर भारत को, राजनीतिक और न्यायपालिका से जुड़े उनके पहले से चल रहे विवाद के बीच आया है।
