Houthi Rebels Missile Programme: यमन के हूती विद्रोही लंबी दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने की तैयारी में हैं। ब्रिटिश संगठन कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (CAR) की रिपोर्ट के मुताबिक, हूती चीन से मिसाइल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अहम पुर्जे मंगाने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन पुर्जों का इस्तेमाल ईरान में डिजाइन की गई खैबर शिकन जैसी मिसाइल बनाने में हो सकता है। इसकी मारक क्षमता करीब 1,500 किलोमीटर बताई जाती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह पुष्टि नहीं की गई है कि हूती ऐसी मिसाइल बनाने में सफल हो चुके हैं या चीन सरकार ने जानबूझकर उन्हें ये सामग्री मुहैया कराई है।
Houthi Rebels Missile Programme: चीन से जब्त हुईं संदिग्ध खेप, मिसाइल निर्माण का शक
CAR की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, यमन के अधिकारियों ने जुलाई में चीन से भेजी गई संदिग्ध सामान की दो खेप जब्त की थीं। (Houthi Rebels Missile Programme) इन खेपों में रॉकेट मोटर के पुर्जे, मिसाइल को स्थिर रखने वाले उपकरण और रॉकेट मोटर को प्रज्वलित करने में इस्तेमाल होने वाले घटक शामिल थे। इसके अलावा फेनोलिक रेजिन नाम का पदार्थ भी मिला, जिसका इस्तेमाल मिसाइलों के लिए गर्मी से बचाव करने वाली परत तैयार करने में किया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन खेपों को चीन से भेजा गया था और इन्हें यमन के होदेइदाह बंदरगाह पर पहुंचना था। इजरायली अधिकारियों का आरोप रहा है कि ईरान इस बंदरगाह का इस्तेमाल हथियारों की आपूर्ति के लिए करता है।
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CAR के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज के अनुसार, सभी पुर्जों और सामग्रियों को एक साथ देखने पर संकेत मिलता है कि हूती ईरान में डिजाइन की गई एक खास तरह की मिसाइल बनाने की तैयारी कर रहे थे। उनके मुताबिक, इन सामग्रियों का सामान्य नागरिक इस्तेमाल होना मुश्किल लगता है।
सऊदी अरब के साथ इजरायल भी हो सकता है निशाने पर
हूती विद्रोही पहले भी इजरायल की दिशा में मिसाइल और ड्रोन दाग चुके हैं। यमन और इजरायल के बीच दूरी 1,600 किलोमीटर से अधिक है। ऐसे में करीब 1,500 किलोमीटर की बताई गई मारक क्षमता वाली मिसाइल विकसित करने की कोशिश क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही है। हालांकि, किसी संभावित हमले की सटीक क्षमता मिसाइल की वास्तविक रेंज, तकनीक और तैनाती पर निर्भर करेगी।
हूती लंबे समय से सऊदी अरब के साथ संघर्ष में बैलिस्टिक मिसाइलों और लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले ड्रोन का इस्तेमाल करते रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अब वे केवल तस्करी के जरिये तैयार हथियार हासिल करने के बजाय अलग-अलग देशों से पुर्जे जुटाकर अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में हथियारों को जोड़ने और बनाने की क्षमता बढ़ाना चाहते हैं।
ईरान पर निर्भरता घटाने की कोशिश?
ईरान अब तक हूती विद्रोहियों के लिए हथियारों की तकनीक, डिजाइन और कलपुर्जों का प्रमुख स्रोत रहा है। लेकिन CAR की रिपोर्ट के अनुसार, हूती चीन और अन्य देशों से भी जरूरी सामग्री जुटाने के रास्ते तलाश रहे हैं।
अमेरिकी थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के ईरान कार्यक्रम के वरिष्ठ निदेशक बेहनाम बेन तालेब्लू का कहना है कि सैन्य जरूरतों के लिए कई वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग होना उपयोगी होता है। (Houthi Rebels Missile Programme) उनके मुताबिक, ईरान पर नाकेबंदी और आपूर्ति संबंधी बाधाओं के बीच हूती दूसरे रास्ते तलाश सकते हैं।
वहीं, सेंचुरी फाउंडेशन की एक रिपोर्ट में हथियारों की आपूर्ति से जुड़े ऐसे नेटवर्क का उल्लेख है, जिनमें यमनी तस्करों और पूर्वी चीन के निर्यात केंद्रों से जुड़े कारोबारियों की भूमिका बताई गई है।
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, मिसाइलों की नेविगेशन और नियंत्रण प्रणाली जैसे जटिल हिस्सों के लिए हूती अब भी ईरान पर निर्भर हो सकते हैं। दूसरे देशों से हासिल पुर्जों को जोड़कर हथियार तैयार करने और अत्याधुनिक मिसाइल की पूरी तकनीक खुद विकसित करने में बड़ा अंतर है।
चीन के लिए बढ़ सकती है कूटनीतिक चुनौती
चीन ईरान और सऊदी अरब, दोनों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। वर्ष 2023 में बीजिंग ने दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने में भी भूमिका निभाई थी। चीन सऊदी अरब का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और हूती हमलों की निंदा करते हुए तनाव कम करने की अपील कर चुका है।
ऐसे में यदि चीन से भेजे गए पुर्जों का इस्तेमाल हूती मिसाइल कार्यक्रम में होने की पुष्टि होती है, तो बीजिंग पर सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों को लेकर दबाव बढ़ सकता है। (Houthi Rebels Missile Programme) मध्य पूर्व मामलों के विशेषज्ञ क्रिस्टियन उलरिचसन के मुताबिक, सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे और हवाई अड्डों पर हमलों के संदर्भ में चीन से इस मामले पर सवाल पूछे जा सकते हैं।
हालांकि, CAR की रिपोर्ट यह साबित नहीं करती कि चीनी सरकार ने जानबूझकर हूती विद्रोहियों को मिसाइल बनाने के लिए सामग्री भेजी थी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी जब्त की गई खेपों और उनमें मिले पुर्जों पर आधारित है। हूती विद्रोहियों ने इस सामग्री से मिसाइल विकसित कर ली है, इसका भी रिपोर्ट में कोई निर्णायक प्रमाण नहीं दिया गया है।
