Diwali Flight Ticket: दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों से पहले घर लौटने की तैयारी कर रहे हवाई यात्रियों के लिए किराये को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। केंद्र सरकार ने फिलहाल फेस्टिव सीजन के दौरान हवाई किराये पर कोई अधिकतम सीमा तय करने से इनकार किया है। वहीं, नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा है कि सरकार एयरलाइंस के लगातार संपर्क में है और उनसे त्योहारों के दौरान किराये को उचित स्तर पर रखने की सलाह दी जाएगी।
Diwali Flight Ticket: दिवाली-छठ में बढ़ सकती है फ्लाइट टिकट की कीमत
त्योहारी सीजन में हवाई यात्रा की मांग अचानक बढ़ जाती है। खासकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और दूसरे राज्यों के लिए जाने वाली उड़ानों में सीटों की मांग बढ़ती है। ऐसे समय में एयरलाइंस की डायनेमिक प्राइसिंग व्यवस्था के कारण किराया सामान्य दिनों की तुलना में ऊपर जा सकता है।
सरकार का कहना है कि वह इस स्थिति पर नजर रख रही है। सितंबर की शुरुआत में भी नायडू ने कहा था कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और उसका टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट ज्यादा मांग वाले रूट पर किराये की निगरानी करते हैं, ताकि कीमतें अनुचित स्तर तक न पहुंचें।
सरकार किराये पर कैप क्यों नहीं लगा रही?
सरकार का ताजा रुख यह है कि हर फेस्टिव सीजन के लिए एक तय अधिकतम किराया निर्धारित करना व्यावहारिक समाधान नहीं है। विमान टिकट की कीमत मांग, उपलब्ध सीटों, रूट, समय और परिचालन लागत जैसे कई कारकों से प्रभावित होती है।
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नायडू पहले भी कह चुके हैं कि सामान्य परिस्थितियों में हवाई किराये बाजार की मांग और आपूर्ति से तय होते हैं। असाधारण परिस्थितियों में केंद्र के पास हस्तक्षेप करने और किराये पर सीमा लगाने की शक्ति मौजूद है।
ATF की कीमत भी बढ़ा रही है एयरलाइंस का खर्च
इस बार टिकट महंगे होने की चर्चा के बीच एक और बड़ा कारण सामने आया है। वह है एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF। नायडू के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर विमानन ईंधन की कीमतों पर पड़ा है। इससे एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ी है।
मंत्री ने बताया कि एयरलाइंस के एयरफेयर में ATF की लागत का हिस्सा करीब 40 से 43 फीसदी तक होता है। इसलिए ईंधन की कीमत बढ़ने पर उसका असर टिकट के किराये पर भी पड़ सकता है। यानी फेस्टिव सीजन में महंगे टिकट की वजह सिर्फ यात्रियों की बढ़ी मांग नहीं, बल्कि एयरलाइंस की लागत का दबाव भी हो सकता है।
एयरलाइंस से लगातार बातचीत करेगी सरकार
सरकार ने किराये की सीमा तय करने के बजाय एयरलाइंस के साथ बातचीत का रास्ता चुना है। नायडू ने कहा कि मंत्रालय विमान कंपनियों के संपर्क में रहता है और त्योहारी सीजन में उनसे उचित किराया रखने को कहा जाएगा, ताकि जरूरी समय पर अपने घर जाने वाले यात्रियों को बहुत ज्यादा आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
इससे पहले भी सरकार एयरलाइंस को पीक सीजन में अतिरिक्त क्षमता बढ़ाने और ज्यादा मांग वाले रूट पर अतिरिक्त उड़ानें उपलब्ध कराने की सलाह देती रही है। 2025 में मंत्रालय की एयरलाइंस के साथ समीक्षा बैठक में भी उचित किराया रखने और ज्यादा यातायात वाले रूट पर अतिरिक्त क्षमता लगाने पर जोर दिया गया था।
यात्रियों के लिए क्या है सबसे जरूरी बात?
यानी दिवाली और छठ के दौरान टिकट की कोई सरकारी अधिकतम कीमत तय नहीं होगी। इसलिए एक ही रूट पर अलग-अलग तारीखों में किराये में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।
ऐसे में यात्रा की तारीख तय होने के बाद आखिरी समय तक इंतजार करने के बजाय अलग-अलग तारीखों और एयरलाइंस के किराये की तुलना करना यात्रियों के लिए उपयोगी रहेगा। खासकर त्योहार के ठीक पहले और बाद के दिनों में सीटों की मांग में अंतर होने से किराये में भी बदलाव आ सकता है। फिलहाल सरकार का फोकस किराये पर स्थायी कैप लगाने के बजाय निगरानी, एयरलाइंस से बातचीत और पीक सीजन में क्षमता बढ़ाने पर है।
