Chinese Media on PM Modi-Xi Jinping Meeting: नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर इस समय पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। अमेरिका से लेकर यूरोप तक के मीडिया में इस महासम्मेलन की गूंज सुनाई दे रही है। इसी क्रम में चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने ब्रिक्स समिट और भारत-चीन संबंधों को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। चीनी मीडिया का मानना है कि नई दिल्ली में हुआ यह सम्मेलन उच्च गुणवत्ता वाले और अधिक व्यापक सहयोग के लिए एक बेहद स्पष्ट दिशा तय करता है। रिपोर्ट में विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय मुलाकात पर बड़ा दावा किया है।
Chinese Media on PM Modi-Xi Jinping Meeting: द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास निर्माण का नया चरण
रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को शिखर सम्मेलन से इतर पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक ने दोनों देशों के रिश्तों को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बैठक भारत और चीन के संबंधों को ‘विश्वास निर्माण के एक नए चरण’ में ले जाने का काम करेगी। यह लगातार तीसरा साल है जब दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की आपस में मुलाकात हुई है। इससे पहले साल 2024 में कजान और 2025 में तियानजिन में दोनों नेताओं की सफल बैठकें हो चुकी हैं। चीनी मीडिया का मानना है कि यह निरंतरता दोनों एशियाई महाशक्तियों के बीच रिश्तों में आ रही स्थिरता को दर्शाती है।
रणनीतिक सहमति को ठोस नतीजों में बदलने पर जोर
पेकिंग यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज के कार्यकारी उप निदेशक वांग शू ने चीनी अखबार से बात करते हुए इस मुलाकात के मायने समझाए। उन्होंने कहा कि अगर कजान बैठक को रिश्तों का निर्णायक मोड़ माना जाए और तियानजिन बैठक ने संबंधों को दोबारा पटरी पर लाने में मदद की, तो नई दिल्ली की यह बैठक विश्वास को और मजबूत करने का काम करेगी। अब दोनों देशों का मुख्य ध्यान रणनीतिक बातचीत को धरातल पर उतारने और ठोस परिणाम हासिल करने पर टिका है। शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत से मतभेदों को बेहतर ढंग से संभालने और किसी भी तरह के गलत आकलन के जोखिम को कम करने में बड़ी मदद मिलती है।
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सीमा प्रबंधन से लेकर सीधी उड़ानों तक दिखी बड़ी प्रगति
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच कई अहम मोर्चों पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। सीमा प्रबंधन पर हुए समझौते, सीमा व्यापार की बहाली, दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों को दोबारा शुरू करना और लोगों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ावा देना इसके ठोस प्रमाण हैं। विशेषज्ञ वांग शू का कहना है कि दो बड़े देशों के बीच राजनीतिक विश्वास केवल बातों से नहीं बल्कि ठोस कदमों से बनता है। संबंधों को पूरी तरह सामान्य करने के लिए सीमा प्रबंधन के संस्थागत ढांचे को मजबूत करने, व्यापार-निवेश को सुरक्षा चिंताओं से अलग रखने और व्यावहारिक आदान-प्रदान को बढ़ाने की जरूरत है।
BRICS, SCO और G-20 के जरिए वैश्विक स्थिरता की राह
रिपोर्ट में लिखा है कि वैश्विक शासन सुधार, जलवायु परिवर्तन और विकास वित्तपोषण जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत और चीन के पास एक साथ मिलकर काम करने के व्यापक अवसर हैं। दोनों देश ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और जी-20 जैसे प्रमुख मंचों के माध्यम से आपसी समन्वय को और गहरा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा जितना अधिक व्यापक और मजबूत होगा, पुराने मतभेदों का प्रभाव उतना ही कम होता चला जाएगा। भारत और चीन का यह मजबूत होता रिश्ता न केवल दोनों देशों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह पूरी दुनिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भी योगदान देगा।
