Delhi Police Pellet Gun Row: 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन (Pellet Gun) चलाई गई थी। शुरुआत में इस कार्रवाई पर आधिकारिक बयानबाजी से लगातार बचा जा रहा था, लेकिन दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने की जनरल डेली डायरी (DD) एंट्री नंबर 0008A ने सच पर मुहर लगा दी है। थाने के सरकारी रिकॉर्ड से साफ हो गया है कि मौके पर तैनात एक डिप्टी पुलिस कमिश्नर (DCP) और CRPF के डिप्टी कमांडेंट के साफ आदेश के बाद रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने कम से कम 2 राउंड पैलेट गन से फायरिंग की थी।
Delhi Police Pellet Gun Row: डायरी में दर्ज उस दिन के खौफनाक हथियार
डिप्टी कमांडेंट की ओर से दर्ज कराई गई इस आधिकारिक डायरी एंट्री के अनुसार, भीड़ को खदेड़ने के लिए RAF की टुकड़ी ने भारी मात्रा में बारूद और गोलों का इस्तेमाल किया था। रिकॉर्ड के मुताबिक उस दिन:
55 नॉन-इलेक्ट्रिक शेल और 15 इलेक्ट्रिक शेल दागे गए।
5 आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
2 राउंड एंटी-रॉयट गन (ARG) से प्लास्टिक पैलेट (PP) कारतूस दागे गए।
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ARG भले ही सीधी पैलेट गन न हो, लेकिन यह ‘गैर-घातक’ हथियारों की उसी श्रेणी में आती है जो एक बार में कई लक्ष्यों को निशाना बनाती है।
4 लोग गंभीर घायल, 1 की आंखों की रोशनी पर खतरा
इस बर्बर कार्रवाई में कम से कम 4 प्रदर्शनकारी पैलेट के छर्रों की चपेट में आकर बुरी तरह घायल हो गए थे। इनमें से 1 युवा प्रदर्शनकारी की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जाने का गंभीर खतरा बना हुआ है। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि उस दिन भीड़ को नियंत्रित करने के नाम पर 12 से ज्यादा सुरक्षा अधिकारियों को पैलेट गन थमा दी गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, पीड़ितों ने मांगी सुरक्षा
पैलेट गन के इस घातक इस्तेमाल के विरोध में अब देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है। पूर्व IPS अधिकारी यशोवर्धन आजाद और पीड़ित प्रशांत कुमार सिंह व शेख इरशाद मंसूरी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर धातु या प्लास्टिक के छर्रे दागने वाली बंदूकों के इस्तेमाल पर पूरे देश में तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही 20 जुलाई की हिंसा में घायल हुए सभी युवाओं के मुफ्त इलाज और उचित मुआवजे की अपील की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और संसद में भूचाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका को चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की बेंच के सामने जल्द सुनवाई के लिए लिस्ट करने की गुजारिश की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग या प्रदर्शनकारियों की हिंसा, दोनों ही अस्वीकार्य हैं। दूसरी ओर, इस खुलासे के बाद संसद में जबरदस्त हंगामा मचा हुआ है। विपक्षी दलों ने सीधे गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है, जबकि चौतरफा दबाव के चलते शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा तक देना पड़ा था।
