America foreign Policy: दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला सिर्फ रंगभेद के खिलाफ संघर्ष करने वाले महान नेता ही नहीं थे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी उनकी स्पष्ट राय थी। वर्ष 2003 में, जब अमेरिका इराक पर सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा था, तब मंडेला ने चेतावनी दी थी कि अगर कोई ताकतवर देश अपनी शक्ति के बल पर दुनिया के फैसले लेने लगे, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों के जरिए होना चाहिए, न कि एकतरफा सैन्य कार्रवाई से। आज जब ईरान को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है, तब मंडेला के पुराने बयान फिर चर्चा में हैं। चुनावीकवरेज
America foreign Policy: अमेरिका की एकतरफा नीति पर मंडेला की आलोचना
मंडेला का मानना था कि किसी भी महाशक्ति को अंतरराष्ट्रीय कानून से ऊपर नहीं समझना चाहिए। उनका आरोप था कि अमेरिका कई बार अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देता है और वैश्विक नियमों की अनदेखी करता है। 2003 में दिए गए एक भाषण में उन्होंने कहा था कि दुनिया में शांति बनाए रखने के लिए सभी देशों को समान नियमों का पालन करना चाहिए। यदि कोई देश अपनी ताकत के भरोसे फैसले करेगा, तो इससे अस्थिरता और संघर्ष बढ़ सकते हैं।
इराक युद्ध से लेकर ईरान तक बहस जारी
इराक युद्ध के समय अमेरिका के फैसले पर दुनिया के कई देशों ने सवाल उठाए थे। बाद के वर्षों में भी अमेरिका की विदेश नीति को लेकर कई बार बहस हुई। अब ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच भी यही सवाल उठ रहे हैं कि क्या सैन्य कार्रवाई किसी समस्या का स्थायी समाधान हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवादों का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता। तेल की कीमतों, व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।
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क्यूबा और लीबिया को लेकर भी मंडेला ने रखा था अपना पक्ष
राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका पर यह दबाव बनाया था कि वह क्यूबा और लीबिया जैसे देशों से दूरी बनाए। लेकिन मंडेला ने इस सुझाव को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने साफ कहा था कि दक्षिण अफ्रीका अपनी विदेश नीति खुद तय करेगा। उनके अनुसार, रंगभेद के कठिन दौर में जिन देशों ने उनका साथ दिया था, उन्हें केवल इसलिए नहीं छोड़ा जा सकता क्योंकि कोई दूसरी महाशक्ति ऐसा चाहती है। इस बयान को उस समय दक्षिण अफ्रीका की स्वतंत्र विदेश नीति का प्रतीक माना गया था।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को बताया था महत्वपूर्ण
मंडेला हमेशा संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को मजबूत करने के पक्षधर रहे। उनका मानना था कि वैश्विक समस्याओं का समाधान सामूहिक प्रयासों से होना चाहिए। उन्होंने कई मौकों पर कहा कि यदि बड़े देश संयुक्त राष्ट्र के नियमों का सम्मान नहीं करेंगे, तो दुनिया में संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। उनके विचार में अंतरराष्ट्रीय कानून सभी देशों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
आज भी क्यों याद किए जाते हैं मंडेला के विचार?
हर साल 18 जुलाई को दुनिया नेल्सन मंडेला अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाती है। इस अवसर पर उनके जीवन, संघर्ष और विचारों को याद किया जाता है। उन्होंने 27 साल जेल में बिताने के बाद भी बदले की राजनीति के बजाय मेल-मिलाप और शांति का रास्ता चुना। आज पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान से जुड़े विवाद और वैश्विक अस्थिरता के बीच उनके विचार फिर प्रासंगिक माने जा रहे हैं। हालांकि अलग-अलग देशों और विशेषज्ञों की इस विषय पर अलग-अलग राय है, लेकिन अधिकांश लोग इस बात से सहमत हैं कि युद्ध की जगह संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देना ही दुनिया के लिए बेहतर रास्ता हो सकता है।
