Iran US Tension: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। कूटनीतिक वार्ताओं में अनिश्चितता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर ईरान की ओर से युद्ध की तैयारियों के संकेत मिल रहे हैं। ईरानी सांसद अली खेजरियान ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका किसी भी समय सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। (Iran US Tension) उन्होंने पहले भी यह दावा किया था कि दोनों देशों के बीच युद्ध होना लगभग तय है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अमेरिका की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने ईरान की तेल पाइपलाइनों को निशाना बनाने की धमकी दी है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। (Iran US Tension) खेजरियान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका के फैसलों पर इजरायल का गहरा प्रभाव है और उसी के दबाव में ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया जा रहा है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से जुड़े खेजरियान का कहना है कि अमेरिकी सेना की बढ़ती तैनाती इस बात का संकेत है कि हमला “किसी भी पल” शुरू हो सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने वॉशिंगटन के साथ चल रही वार्ताओं को रोक दिया है, हालांकि इस पर ईरान सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, ईरान के एक और सांसद इब्राहिम रेजाई ने पाकिस्तान को मध्यस्थ के रूप में खारिज कर दिया है। (Iran US Tension) उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि पाकिस्तान एक अच्छा पड़ोसी जरूर है, लेकिन वह निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाने में सक्षम नहीं है। रेजाई का आरोप है कि पाकिस्तान हमेशा अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देता है और स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने में असमर्थ रहता है। (Iran US Tension) इस बीच, ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए फोन पर बातचीत एक विकल्प हो सकता है। उन्होंने कहा कि लंबी यात्रा कर प्रतिनिधिमंडल भेजने के बजाय सीधी बातचीत अधिक प्रभावी हो सकती है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका के पास सभी विकल्प खुले हैं।
- Advertisement -
रिपोर्ट्स के अनुसार, हालिया संघर्ष में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 28 फरवरी को शुरू हुए संयुक्त हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई में अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। यह नुकसान सार्वजनिक आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ईरान ने पश्चिम एशिया के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों, गोदामों, कमांड सेंटरों और रडार प्रणालियों को निशाना बनाया। (Iran US Tension) एक चौंकाने वाली घटना में, ईरान का पुराना एफ-5 लड़ाकू विमान भी अमेरिकी अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली को चकमा देने में सफल रहा। हालांकि इस हमले से सीमित नुकसान हुआ, लेकिन यह घटना अमेरिका की सैन्य तकनीक पर सवाल खड़े करती है।
