Venezuela blasts International Support: लैटिन अमेरिका में शनिवार की सुबह एक चौंकाने वाली खबर सामने आई। वेनेजुएला की राजधानी काराकास नींद में थी, तभी एक के बाद एक जोरदार धमाकों ने पूरे शहर को दहला दिया। लंबे समय से जिस अमेरिकी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही थी, वह अब हकीकत बन गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद वेनेजुएला की राजधामी समेत चार शहरों में सिलसिलेवार जोरादर धमाके हुए, जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया।
शहर के कई इलाकों में तेज विस्फोटों की आवाज गूंजी। (Venezuela blasts International Support) दक्षिणी काराकास, जहां एक बड़ा सैन्य अड्डा मौजूद है, वहां अचानक बिजली गुल हो गई। अंधेरे और धमाकों के बीच लोगों में दहशत फैल गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए वेनेजुएला राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने पूरे देश में इमरजेंसी लागू कर दी है। सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं और राजधानी में सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी गई है।
इन धमाकों के बीच कोलंबिया देश वेनेजुएला के समर्थन में सामने आया है। (Venezuela blasts International Support) आइए जानते हैं कि इन धमाकों के बाद कौन सा देश किसके साथ हो सकता।
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रूस का साथ, लेकिन सीमाएं साफ
रूस लंबे समय से वेनेजुएला का करीबी सहयोगी रहा है। उसने आर्थिक मदद, सैन्य उपकरण और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मादुरो सरकार का समर्थन किया है। लेकिन मौजूदा हालात में रूस खुद यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों में उलझा है। (Venezuela blasts International Support) विशेषज्ञों का मानना है कि रूस इस वक्त अमेरिका से सीधे टकराव का जोखिम नहीं उठाएगा। अक्टूबर में मादुरो ने मदद मांगी थी, लेकिन फिलहाल समर्थन सिर्फ बयानबाजी और फोन कॉल तक सीमित नजर आ रहा है।
चीन का संतुलित रुख
चीन अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना तो कर रहा है, लेकिन खुलकर मैदान में उतरने से बच रहा है। वेनेजुएला चीन के लिए तेल के लिहाज से अहम है, लेकिन बीजिंग अमेरिका के साथ सीधी जंग नहीं चाहता। जानकारों के अनुसार चीन इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मंचों पर उठाएगा, मगर सैन्य मदद की संभावना बेहद कम है।
कोलंबिया खुलकर मादुरो के साथ
इस संकट में कोलंबिया वेनेजुएला के समर्थन में सामने आया है। कोलंबियाई राष्ट्रपति ने दावा किया है कि अमेरिका मिसाइलों से हमला कर रहा है। (Venezuela blasts International Support) कोलंबिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग करने का ऐलान किया है। UNSC का अस्थायी सदस्य होने के नाते कोलंबिया की भूमिका इस वक्त अहम मानी जा रही है।
ईरान और क्यूबा की सीमित भूमिका
ईरान और वेनेजुएला के रिश्ते वैचारिक रूप से मजबूत रहे हैं, लेकिन फिलहाल ईरान खुद अंदरूनी संकटों से जूझ रहा है। ऐसे में उसकी मदद बयानबाजी से आगे जाती दिख नहीं रही।
वहीं क्यूबा वेनेजुएला पर काफी हद तक निर्भर है और दोनों के रिश्ते गहरे हैं, लेकिन क्यूबा की कमजोर आर्थिक हालत उसे किसी बड़े संघर्ष में उतरने से रोक सकती है।
इस बीच यह सवाल उठ रहा है कि अगर अमेरिका पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ता है, तो वेनेजुएला को बचाने कौन और कितनी दूर तक जाएगा। (Venezuela blasts International Support) फिलहाल दुनिया की नजरें काराकास पर टिकी हैं और आने वाले दिन लैटिन अमेरिका के भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं।
गिरफ्तारियों से बढ़ा तनाव
बता दें कि इन धमाकों से पहले वेनेजुएला ने पांच अमेरिकी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। यही कदम अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव की बड़ी वजह बना। (Venezuela blasts International Support) वॉशिंगटन ने इसके बाद सख्त कार्रवाई के संकेत दिए थे। बीते हफ्तों में अमेरिका ने कैरेबियाई क्षेत्र में भारी सैन्य तैनाती की। न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन, जासूसी विमान और करीब 15 हजार सैनिक इस इलाके में तैनात किए गए। ड्रग तस्करी के आरोप में अमेरिकी हमलों में 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि वेनेजुएला के तट के पास एक तेल टैंकर भी जब्त किया गया।
