US India tariff dispute: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संबंध में मौजूदा वक़्त में ‘ब्लैकमेल’ (Blackmail) का मुद्दा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की राजनीति में सबसे गरम विवाद का विषय बना हुआ है। खासकर व्यापार और कूटनीतिक स्तर पर ट्रंप की नीतियों को कुछ नेताओं और विशेषज्ञों ने ‘ब्लैकमेल’ जैसा ठहराया है, जिससे वैश्विक स्तर पर व्यापारिक व राजनीतिक तनाव और अधिक बढ़ गया है।
US India tariff dispute: ‘टैरिफ’ सबसे बड़ा विवाद
गौर किया जाए तो… सबसे बड़ा विवाद टैरिफ (शुल्क) को लेकर है। भारत-अमेरिका के रिश्तों में भी यह मुद्दा उभरकर सामने आया है, जहाँ अमेरिका ने भारत पर भारी प्रतिशत (कुल 50%) टैरिफ लागू करने का बड़ा फैसला लिया। (US India tariff dispute) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को ‘आर्थिक ब्लैकमेल’ करार दिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा है कि भारत के हितों को किसी भी हाल में कमजोर न होने दिया जाए।
ट्रंप ब्लैकमेल: असल में क्या हो मामला?
अमेरिका की नई व्यापार नीति के अंतर्गत रूस से तेल खरीदने वाले सभी देशों पर भारी मात्रा में शुल्क लागू करने की योजना सामने आई। (US India tariff dispute) इसकी वजह से भारत समेत कई बड़े निर्यातक देशों की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इतना ही नहीं… बल्कि अमेरिका ने सख्त चेतावनी दे दी है कि अगर भारत अपने व्यापारिक फैसलों में परिवर्तन नहीं लाता है, तो टैरिफ को और भी बढ़ाया जा सकता है।
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यह नीतिगत कदम वैश्विक स्तर पर कई विरोधों का कारण बन रहा है, जिस पर विपक्षी नेताओं का कहना है कि ट्रंप की यह ‘चाल’ दबाव डालने और झुकाव बनाने जैसा है, न कि विश्व व्यापार के नियमों के अंतर्गत उठाया गया कदम। यही सबसे बड़ा कारण है कि इसे ब्लैकमेल कहना शुरू कर दिया गया है।
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इसे लेकर भारत में क्या कहा गया?
- राहुल गांधी ने कहा कि ट्रंप का 50% टैरिफ ‘आर्थिक ब्लैकमेल’ है और यह भारत को अनुचित व्यापार समझौते के लिए मजबूर करने जैसा है। (US India tariff dispute) उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि भारत की राष्ट्रीय मजबूती को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहिए।
- कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी टिप्पणी की कि इससे भारतीय निर्यात महँगा हो जाएगा और व्यापक आर्थिक नुकसान संभव है।
- भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी ट्रंप के इस फैसले के बाद एक सख्त बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि भारत ने हमेशा रणनीतिक साझेदारी की राह चुनी है और अपने हितों की रक्षा करेगा।
अंतरराष्ट्रीय नजरिया:
यह विवाद केवल भारत-अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन ने भी अमेरिका से कहा है कि वह धमकियाँ और ब्लैकमेल बंद करे और बातचीत सम्मान और समानता के आधार पर हो। (US India tariff dispute) वहीं, यूरोपीय देशों पर भी अमेरिका ने टैरिफ का दबाव बनाया है, जिससे वैश्विक व्यापार मंच पर नया तनाव पैदा हो रहा है।इसे लेकर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह ब्लैकमेल जैसा रवैया ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी प्रभाव’ डाल सकता है और व्यापारिक युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।
‘ब्लैकमेल’ की सच्चाई क्या है?
- ट्रंप की व्यापार और कूटनीतिक नीतियों को कई देशों और नेताओं ने ‘ब्लैकमेल’ की तरह अनुभव किया है। भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद को कई भारतीय नेताओं ने ‘आर्थिक ब्लैकमेल’ बताया है। (US India tariff dispute) वहीं, वैश्विक स्तर पर भी इस तरह की आलोचना हो रही है, जहाँ चीन जैसे अन्य देश भी अमेरिका के रुख पर आपत्ति जता चुके हैं और इसका सीधा प्रभाव वैश्विक व्यापारिक संबंधों पर पड़ रहा है। अब आगामी वक़्त में यह तनाव और एक गंभीर मुद्दा बन सकता है।
