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US Election: ट्रंप या हैरिस, दोनों को बहुमत नहीं मिला तो ‘कंटिंजेंट’ चुनाव से होगा फैसला; जानें

Sunil Kumar Verma
Last updated: 2024/11/06 at 12:59 अपराह्न
Sunil Kumar Verma
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6 Min Read
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US Election: अमेरिका में हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव की मतगणना जारी है। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेमोक्रेटिक पार्टी की कमला कमला हैरिस के बीच है। इस चुनाव में जीतने के लिए उम्मीदवार को कुल 538 इलेक्टोरल वोट में से 270 का बहुमत चाहिए होता है। फिलहाल, ट्रंप 247 इलेक्टोरल वोटों के साथ बढ़त बनाए हुए हैं। अगर किसी भी उम्मीदवार को 270 इलेक्टोरल वोट नहीं मिलते है उस स्थिति में अमेरिका में कंटिंजेंट इलेक्शन (आकस्मिक चुनाव) कराए जाते हैं। आकस्मिक चुनाव अमेरिका में करीब दो साल पहले हुए थे।

Contents
US Election: पहले जानते हैं कि इलेक्टोरल वोट क्या है?यदि इलेक्टर्स के वोट बराबर हो जाएं तो क्या होगा?क्या है ‘कंटिंजेंट’ चुनाव?कैसे होता है कंटिंजेंट’ चुनाव?

US Election: पहले जानते हैं कि इलेक्टोरल वोट क्या है?

इलेक्टोरल कॉलेज के द्वारा अमेरिका के लोग अपने-अपने राज्य के निर्वाचकों (US Election) के लिए मतदान करते हैं। इसके जरिए लोग अप्रत्यक्ष रूप से अपने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।

इसे हम भारत के रूप में ऐसे समझें कि लोगों ने अपनी विधानसभा या लोकसभा सीट पर विधायक या सांसद का चुनाव किया और बाद में यही विधायक या सांसद मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री चुन लें। (US Election) हालांकि, अमेरिकी परिप्रेक्ष्य में चुनावी प्रक्रिया थोड़ी जटिल है।

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इस तरह से अमेरिकी लोग राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनने के लिए इलेक्टोरल कॉलेज के लिए वोट करते हैं। बाद में यही इलेक्टर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनते हैं। पूरे अमेरिका में ऐसे कुल 538 इलेक्टर हैं। ये 538 इलेक्टर कहां से और कैसे हुए इसकी भी एक व्यापक रूपरेखा है। (US Election) दरअसल, अमेरिका में 50 राज्य हैं जिनकी आबादी के आधार पर 535 इलेक्टर तय हैं और अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन, डीसी (डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया) से तीन और भी इलेक्टर होते हैं।

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डीसी से अलग इन 535 इलेक्टोरल वोट को समझें तो अमेरिकी संसद की कुल सीटों संख्या 535 है जिनमें से 435 हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (एचओआर) और 100 सीनेट के सदस्य हैं। (US Election) भारत के उदाहरण से समझें तो हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के सदस्य निचले सदन लोकसभा के सांसद जबकि उच्च सदन सीनेट के सदस्य या सीनेटर राज्यसभा सांसद हुए। नियमों के मुताबिक, हर राज्य में कम से कम एक या अधिक से अधिक आबादी के अनुसार एचओआर होंगे, जबकि सीनेटर हर राज्य से दो ही होंगे। यानी चुनाव में हर राज्य से कम से कम तीन इलेक्टोरल वोट तो होंगे ही।

राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवारों को कुल 538 में से 270 इलेक्टोरल वोट का बहुमत हासिल करना होता है।

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यदि इलेक्टर्स के वोट बराबर हो जाएं तो क्या होगा?

अगर किसी भी प्रत्याशी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो प्रतिनिधि सभा राष्ट्रपति का चुनाव ‘कंटिंजेंट इलेक्शन’ (आकस्मिक चुनाव) के जरिए करती है। (US Election) इसमें प्रतिनिधि सभा के सदस्य तीन शीर्ष उम्मीदवारों के आधार पर राष्ट्रपति के लिए वोट करते हैं। लेकिन अमेरिका के पूरे इतिहास में ऐसा केवल तीन बार हुआ है और पिछली बार ऐसा हुए करीब 200 साल हो गए हैं।

क्या है ‘कंटिंजेंट’ चुनाव?

अमेरिका संविधान के 12वें संशोधन के अनुसार राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को चुनाव जीतने के लिए 270 इलेक्टोरल वोट चाहिए मत। (US Election) यदि कोई भी उम्मीदवार 270 का बहुमत नहीं जीतता है तो क्या होगा? इन परिस्थितियों में, 12वां संशोधन यह भी कहता है कि अमेरिकी संसद का निचला सदन यानी ‘प्रतिनिधि सभा’ राष्ट्रपति का चुनाव करेगी। वहीं संसद का ऊपरी सदन यानी सीनेट उपराष्ट्रपति का चुनाव करेगी। इन चुनावों को आकस्मिक चुनाव के रूप में जाना जाता है। अमेरिका में केवल तीन बार आकस्मिक चुनाव हुए हैं। (US Election) पहली बार 1801 में राष्ट्रपति थॉमस जेफरसन को चुनने के लिए। फिर 1825 में राष्ट्रपति जॉन क्विंसी एडम्स को चुनने के लिए। अंत में 1837 में उपराष्ट्रपति रिचर्ड मेंटर जॉनसन को चुनने के लिए।

कैसे होता है कंटिंजेंट’ चुनाव?

आकस्मिक चुनाव में सदन उन तीन उम्मीदवारों में से ही चुनेगा, जिन्हें सबसे अधिक इलेक्टोरल वोट मिले हैं। इस चुनाव में ट्रंप और कमला हैरिस के बाद निर्दलीय या छोटे दलों से तीन प्रमुख उम्मीदवार हैं। हर राज्य आकस्मिक चुनाव में राष्ट्रपति के लिए एक ही वोट डालता है जबकि इलेक्टोरल वोट में आबादी मायने रखती है। इसलिए दो या उससे अधिक प्रतिनिधियों (निचले सदन के सदस्य) वाले राज्यों के प्रतिनिधियों को अपने राज्य के डेलिगेट्स के भीतर एक आंतरिक मतदान करने की आवश्यकता होगी। इससे यह तय किया जा सकेगा कि किस उम्मीदवार को राज्य का एकलौता वोट मिलेगा। राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए आवश्यक है कि 50 राज्यों के डेलिगेट्स से बहुमत के 26 या उससे अधिक वोट मिलें। सदन को इसके लिए तुरंत और मतपत्र द्वारा मतदान करना चाहिए।

आकस्मिक चुनाव में सीनेट उपराष्ट्रपति का चुनाव करती है, जिसमें सबसे अधिक इलेक्टोरल वोट हासिल करने वाले दो उम्मीदवारों में से एक को चुना जाता है। प्रत्येक सीनेटर (ऊपरी सदन का सदस्य) एक वोट डालता है और पूरे सीनेट (कुल 100) के बहुमत के वोट 51 या उससे अधिक चुनाव में जीतने के लिए आवश्यक हैं। कोलंबिया जिला, जो एक राज्य नहीं है, आकस्मिक चुनाव में भाग नहीं लेगा भले ही यह तीन इलेक्टोरल वोट डालता है।

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