Turkman Gate Masjid Dispute: दिल्ली के ‘तुर्कमान गेट’ इलाके में मौजूद फैज इलाही मस्जिद इन दिनों एक बड़े गंभीर विवादों के केंद्र में आ गया है। यह मामला धार्मिक आस्था, सरकारी जमीन, वक्फ बोर्ड के दावे और कानून के पालन से जुड़ा हुआ है, जिस पर मौजूदा वक़्त में राजनीति भी तेज़ हो गई है। (Turkman Gate Masjid Dispute) सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में मस्जिद तोड़ने का मामला है या फिर सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कानूनी कार्रवाई? आइये जानते हैं विस्तार से…
Turkman Gate Masjid Dispute: कैसे शुरू हुआ ये विवाद ?
रिपोर्ट के अनुसार, 12 नवंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि MCD और PWD की जमीन पर हुए अतिक्रमण को 3 महीने के अंदर, यानी 12 फरवरी 2026 से पहले किसी भी हाल में हटाया जाए। अदालत ने यह भी साफ़ किया कि मस्जिद प्रबंधन समिति और वक्फ बोर्ड को सुना जाए। (Turkman Gate Masjid Dispute) इसके बाद 22 दिसंबर 2025 को दिल्ली नगर निगम (MCD) ने मस्जिद के सामने बने कुछ ढांचों को अवैध घोषित करते हुए आदेश जारी किया। MCD का दावा है कि मस्जिद की मैनेजिंग कमेटी उस जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज पेश नहीं कर पाई, जिससे यह साबित हो सके कि जमीन उनकी या वक्फ बोर्ड की है।
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क्या है वक्फ बोर्ड और मस्जिद समिति का दावा ?
मस्जिद समिति और वक्फ बोर्ड का कहना है कि यह जमीन वक्फ की ‘संपत्ति’ है। उनका तर्क है कि मस्जिद से जुड़े सहायक ढांचे, जैसे वुज़ू का स्थान, मदरसा, डिस्पेंसरी और शादीखाना आदि धार्मिक आवश्यकताओं के लिए बनाए गए हैं। वक्फ पक्ष 1970 के वक्फ गजट का हवाला दे रहा है, जिसमें ‘ख्वाजा फैज इलाही मस्जिद’ का उल्लेख बताया जा रहा है।
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हालांकि, इन सबको लेकर याचिकाकर्ता और MCD का कहना है कि कोर्ट और निगम के सामने जो दस्तावेज रखे गए, वे जमीन की स्पष्ट ओनरशिप साबित नहीं करते। (Turkman Gate Masjid Dispute) अधिकारियों के मुताबिक, वक्फ बोर्ड और मस्जिद समिति को सुनवाई का पूरा मौका दिया गया और उनके लिखित जवाब भी अदालत में पेश किए गए।
राजनीति और बयानबाज़ी तेज़
फिलहाल इस विवादित मुद्दे पर सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस नेताओं ने सीधा आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि वक्फ बोर्ड को इस मामले में प्रभावी रूप से शामिल किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि दस्तावेज मजबूत हैं तो उन्हें अदालत में पेश किया जाना चाहिए।
सुरक्षा और पृष्ठभूमि
बता दे, इस पर विवाद तब और संवेदनशील हो गया जब यह सामने आया कि 10 नवंबर को लाल किले पर हुए ब्लास्ट का आरोपी आतंकी डॉक्टर उमर उन नबी घटना से पहले इसी इलाके की मस्जिद में गया था। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई का इस घटना से सीधा संबंध नहीं है।
देखा जाए तो… अब Turkman Gate Masjid Dispute अब केवल एक स्थानीय मामला नहीं रहा। यह कानून, अतिक्रमण, धार्मिक संपत्तियों और राजनीतिक नैरेटिव का बड़ा सवाल बन चुका है। अंतिम फैसला अदालत के दस्तावेज़ी साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया पर ही निर्भर करेगा, लेकिन तब तक यह मुद्दा पूरे देश में बहस का विषय बना रहेगा।
