Trump Tariff: वाशिंगटन में भारत को आर्थिक रूप से दबाने की योजना बन रही थी। धमकियां दी जा रही थीं, फाइलें तैयार की जा रही थीं और सबसे बड़ा हथियार था टेरिफ। पहले 25% टेरिफ, फिर रूस से तेल पर 25% पेनल्टी, और अब ईरान के साथ व्यापार पर 500% टेरिफ। (Trump Tariff) लेकिन तभी प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा रणनीतिक कदम उठाया कि अमेरिका हिल गया। (Trump Tariff) वही ब्रिटेन, जिसने कभी भारत पर राज किया था, अब भारत की ढाल बनकर खड़ा हो गया और ट्रंप की टेरिफ वाली दीवार चकनाचूर हो गई।
जब डोनाल्ड ट्रंप दोबारा सत्ता में आए, तो अमेरिका फर्स्ट था और बाकी सब बाद में। निशाने पर पहला नाम था भारत। रूस से तेल लिया, डिजिटल टैक्स लागू किया या रणनीतिक स्वतंत्रता दिखाई हर कदम पर अमेरिका सजा देने को तैयार था। (Trump Tariff) 50%, 100% नहीं, सीधे 575% का टेरिफ। अमेरिका ने सोचा कि भारत का IT सेक्टर दब जाएगा, टेक्सटाइल बर्बाद होगी, किसान और MSME टूट जाएंगे। मीडिया तक लिखने लगी कि “India’s growth story is over।” लेकिन अमेरिका भूल गया कि यह 2026 का भारत है।
धमकियों के बीच भारत ने पर्दे के पीछे सबसे बड़ा मास्टर स्ट्रोक तैयार कर लिया था। (Trump Tariff) और असली कहानी शुरू हुई लंदन से। ब्रिटेन, अपनी डूबती अर्थव्यवस्था बचाने के लिए भारत के दरवाजे पर आया, और भारत ने मौका पहचाना।
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इंडिया-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) कोई साधारण समझौता नहीं, बल्कि 21वीं सदी का सबसे बड़ा जियोइकोनॉमिक मास्टर स्ट्रोक। (Trump Tariff) इस FTA के तहत ब्रिटेन ने भारत के 99% उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म कर दी। कपड़े, जूते, दवाइयां, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी सब पर नो टैक्स। वहीं अमेरिका भारतीय सामान महंगा कर रहा था, ब्रिटेन ने भारतीय व्यापार का रास्ता खोल दिया।
