Trump-Munir secret deal: दुनिया की राजनीति में इस वक्त एक ऐसी हलचल मची है जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अगले हफ्ते पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अमेरिका की उड़ान भरेंगे। (Trump-Munir secret deal) यह कोई साधारण दौरा नहीं है, क्योंकि वहां उनकी मुलाकात दुनिया के सबसे चर्चित नेता डोनाल्ड ट्रंप से होने वाली है। पिछले छह महीनों में इन दोनों दिग्गजों के बीच यह तीसरी मुलाकात होगी। लेकिन इस बार चर्चा का विषय सिर्फ हाथ मिलाना नहीं, बल्कि गाजा के धधकते मैदानों में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती है। (Trump-Munir secret deal) वाशिंगटन इस वक्त इस्लामाबाद पर भारी दबाव बना रहा है कि वह गाजा में अपनी सेना भेजे, जिसे लेकर पाकिस्तान के गलियारों में सन्नाटा पसरा है और जनता के बीच गुस्से की लहर उठने का डर है।
Trump-Munir secret deal: ट्रंप और मुनीर की ‘हैट्रिक’ और गाजा का नया मिशन
पिछले कुछ महीनों में डोनाल्ड ट्रंप और आसिम मुनीर के बीच नजदीकियां काफी बढ़ी हैं। यह ताज्जुब की बात है कि छह महीने में वे तीसरी बार मिलने जा रहे हैं। ट्रंप ने मुनीर के साथ एक ऐसा रिश्ता बनाया है जिसने सालों पुरानी ‘भरोसे की कमी’ को खत्म कर दिया है। याद रहे कि जून में ट्रंप ने मुनीर को व्हाइट हाउस में अकेले भोज पर बुलाया था, जो पाकिस्तान के किसी भी सेना प्रमुख के लिए एक बड़ी बात थी। (Trump-Munir secret deal) अब इस दोस्ती का असली इम्तिहान गाजा में होने वाला है। रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप के पास गाजा के लिए एक ’20-सूत्रीय मास्टर प्लान’ है। इस योजना का मकसद हमास जैसे समूहों को खत्म करना और गाजा का फिर से आर्थिक पुनर्वास करना है। ट्रंप चाहते हैं कि पाकिस्तान इस शांति सेना (Gaza Stabilization Force) का मुख्य हिस्सा बने।
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कुएं और खाई के बीच फंसे फील्ड मार्शल मुनीर
मुनीर के लिए यह फैसला लेना ‘आग के दरिया’ को पार करने जैसा है। एक तरफ अमेरिका का दबाव है और दूसरी तरफ पाकिस्तान की जनता का फिलिस्तीन के प्रति गहरा समर्थन। कई मुस्लिम देश इस मिशन को लेकर डरे हुए हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे इजरायल-हमास की इस खूनी लड़ाई में फंस सकते हैं। (Trump-Munir secret deal) अगर पाकिस्तान सेना भेजने से इनकार करता है, तो ट्रंप का गुस्सा झेलना पड़ सकता है। अटलांटिक काउंसिल के एक्सपर्ट माइकल कुगेलमैन का मानना है कि ट्रंप की नाराजगी का मतलब होगा पाकिस्तान में अमेरिकी निवेश और सुरक्षा सहायता का हमेशा के लिए रुक जाना। (Trump-Munir secret deal) पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस वक्त बेहद नाजुक दौर में है और उसे अमेरिका की मदद की सख्त जरूरत है। मुनीर जानते हैं कि ट्रंप को नाराज करना देश के लिए बड़ा आर्थिक खतरा बन सकता है।
परमाणु शक्ति और ट्रंप का पाकिस्तानी सेना पर भरोसा
सवाल यह है कि ट्रंप पाकिस्तान पर ही इतना भरोसा क्यों कर रहे हैं? इसका जवाब है पाकिस्तान की सैन्य ताकत। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र मुस्लिम देश है जिसके पास परमाणु हथियार हैं। भारत के साथ तीन बार युद्ध लड़ने और अफगानिस्तान सीमा पर आतंकवादियों से मुकाबला करने का पाकिस्तानी सेना का अनुभव ट्रंप को काफी प्रभावित करता है। रक्षा विश्लेषक आयशा सिद्दीका का कहना है कि ट्रंप पाकिस्तान की ‘इंस्टीट्यूशनल कैपेबिलिटी’ यानी संस्थागत क्षमता के कायल हैं। (Trump-Munir secret deal) उन्हें लगता है कि मुश्किल हालात में मुकाबला करने के लिए पाकिस्तानी सेना सबसे फिट है। इसी सैन्य शक्ति ने ट्रंप की दिलचस्पी को बढ़ा दिया है, और वे गाजा की कमान पाकिस्तान के हाथों में सौंपने की योजना पर काम कर रहे हैं।
हमास को निशस्त्र करना और पाकिस्तान का आधिकारिक रुख
इस पूरे मामले पर फिलहाल पाकिस्तानी सेना और विदेश मंत्रालय ने चुप्पी साध रखी है। (Trump-Munir secret deal) हालांकि, पिछले महीने विदेश मंत्री इशाक डार ने एक संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर बात शांति बनाए रखने की है, तो पाकिस्तान सेना भेजने पर विचार कर सकता है, लेकिन हमास जैसे समूहों के हथियार डलवाना (Disarmament) पाकिस्तान की जिम्मेदारी नहीं है। (Trump-Munir secret deal) यानी पाकिस्तान चाहता है कि उसे सिर्फ ‘पीसकीपिंग’ के लिए इस्तेमाल किया जाए, न कि सीधी जंग के लिए। अब अगले हफ्ते जब ट्रंप और मुनीर की मेज सजेगी, तो देखना होगा कि क्या मुनीर गाजा के दलदल में अपनी सेना उतारने का जोखिम उठाएंगे या फिर ट्रंप की इस 20-सूत्रीय योजना को बड़ी चतुराई से टाल देंगे।
