Super Intelligence Force: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की दुनिया में अमेरिका की बादशाहत कायम रखने के लिए एक नई टीम बनाने का ऐलान किया है, जिससे दुनियाभर में खलबली मच गई है। इस टीम का नाम ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ यानी SIF रखा गया है। (Super Intelligence Force) ट्रंप ने कहा कि इस फोर्स का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि AI के क्षेत्र में अमेरिका दुनिया में सबसे आगे बना रहे और अमेरिकी हितों की रक्षा हो। ट्रंप के इस कदम को अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती AI प्रतिस्पर्धा के बीच अहम माना जा रहा है।
दरअसल, ट्रंप इससे पहले भी AI के विकास को धीमा करने के खिलाफ अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। उनका तर्क रहा है कि अगर अमेरिका ने AI के विकास की रफ्तार कम की, तो चीन को इसका फायदा मिल सकता है। (Super Intelligence Force) इसी सोच के बीच अब उन्होंने ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’ बनाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने AI को ‘सुपर इंटेलिजेंस’ के तौर पर पेश करने पर भी जोर दिया है।
Super Intelligence Force: कौन संभालेगा सुपर इंटेलिजेंस फोर्स?
ट्रंप ने इस नई फोर्स की जिम्मेदारी नेशनल इंटेलिजेंस प्रमुख जे क्लेटन को दी है। इसके साथ फेडरल ट्रेड कमीशन के चेयरमैन एंड्रयू फर्ग्यूसन और रिसर्च एंड इंजीनियरिंग से जुड़े रक्षा विभाग के अंडर सेक्रेटरी एमिल माइकल भी टीम में शामिल होंगे। अमेरिकी ऑफिस ऑफ पर्सनेल मैनेजमेंट के डायरेक्टर स्कॉट कुपोर भी इस टीम का हिस्सा होंगे।
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इस टीम की खास बात यह है कि यह सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स को रिपोर्ट करेगी। यानी AI को लेकर अमेरिकी सरकार की रणनीति में इस फोर्स की सीधी भूमिका होगी।
आखिर क्या काम करेगी SIF?
ट्रंप के मुताबिक, सुपर इंटेलिजेंस फोर्स का काम संघीय सरकार की AI से जुड़ी कोशिशों को एक साथ जोड़ना और उन्हें बेहतर तरीके से आगे बढ़ाना होगा। (Super Intelligence Force) इसके लिए यह टीम आम उपभोक्ताओं, पब्लिक इंटरेस्ट ग्रुप्स, धार्मिक संगठनों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े संस्थानों और सुपर इंटेलिजेंस कंपनियों के साथ सरकार के संपर्क को कोऑर्डिनेट करेगी।
ट्रंप का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका सुपर इंटेलिजेंस के क्षेत्र में दुनिया में अपनी बढ़त बनाए रखे। साथ ही अमेरिकी हितों की रक्षा हो और इस तकनीक से अमेरिकी लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने में मदद मिले।
चीन से मुकाबले को लेकर ट्रंप की चिंता
अमेरिका और चीन के बीच AI की रेस इस पूरे कदम की एक बड़ी वजह बताई जा रही है। ट्रंप लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि AI के विकास को धीमा करने से अमेरिका को नुकसान हो सकता है और चीन को बढ़त मिल सकती है। SIF के प्रमुख जे क्लेटन ने भी इसी चिंता को दोहराया है।
क्लेटन ने कहा कि AI की दौड़ में पहले स्थान पर नहीं रहने का जोखिम काफी ज्यादा है। (Super Intelligence Force) उनके मुताबिक, अगर अमेरिका पहले स्थान पर नहीं रहता है तो उसके सामने मौजूद और अभी सामने नहीं आए जोखिम बढ़ सकते हैं, खासकर उन देशों की तरफ से जिन्हें अमेरिका अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है। उनका कहना है कि AI में सबसे आगे रहना अमेरिकी लोगों के हित में इन जोखिमों से निपटने की क्षमता को मजबूत करेगा।
ट्रंप का AI को लेकर बड़ा दांव
ट्रंप ने सुपर इंटेलिजेंस फोर्स को अमेरिका की AI रणनीति के एक अहम हिस्से के तौर पर पेश किया है। उनका कहना है कि सुपर इंटेलिजेंस का प्रभाव औद्योगिक क्रांति और इंटरनेट से भी बड़ा हो सकता है। ऐसे में अमेरिका की कोशिश है कि इस तकनीकी दौड़ में वह पीछे न रहे।
यानी ट्रंप की नई SIF सिर्फ एक सरकारी टीम नहीं है, बल्कि AI के क्षेत्र में अमेरिका की बढ़त बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है। (Super Intelligence Force) इसकी कमान ऐसे अधिकारियों को दी गई है, जो सरकार, खुफिया व्यवस्था, रक्षा, व्यापार और प्रशासन से जुड़े अहम पदों पर हैं। अब देखना होगा कि यह टीम अमेरिका की AI रणनीति को किस दिशा में आगे ले जाती है और चीन के साथ चल रही तकनीकी प्रतिस्पर्धा में इसका क्या असर पड़ता है।
