PM Modi-Trump call controversy: पूरी दुनिया को हिला देने वाली एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने भारत और अमेरिका के रिश्तों की नई हकीकत बयां कर दी है। दावा किया जा रहा है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सिर्फ एक फोन कॉल कर दिया होता, तो आज भारत और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक ट्रेड डील हो चुकी होती। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में सनसनीखेज खुलासा किया है कि पूरी डील सेट थी, लेकिन मोदी के फोन न करने की वजह से सब कुछ रुक गया। (PM Modi-Trump call controversy) अब ट्रंप गुस्से में हैं और भारत पर 500 फीसदी टैरिफ (टैक्स) लगाने की धमकी दे रहे हैं। आखिर मोदी ने फोन क्यों नहीं किया? क्या यह कोई कूटनीतिक चाल थी या ट्रंप के ‘अहंकार’ से बचने की कोशिश?
PM Modi-Trump call controversy: ‘बस एक कॉल की थी उम्मीद’: लुटनिक का बड़ा आरोप
हॉवर्ड लुटनिक के अनुसार, 2025 में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौतों पर बातचीत अपने अंतिम चरण में थी। उन्होंने कहा कि ट्रंप को उम्मीद थी कि पीएम मोदी उन्हें फोन करके डील फाइनल करेंगे। लुटनिक ने साफ शब्दों में कहा, “पूरी ट्रेड डील तैयार थी, लेकिन यह ट्रंप की डील थी और वही इसे फाइनल करते हैं। (PM Modi-Trump call controversy) मोदी को बस राष्ट्रपति को फोन करना था, पर उन्होंने नहीं किया।” लुटनिक ने यह भी इशारा किया कि अमेरिका ने भारत को ‘तीन शुक्रवार’ का समय दिया था, लेकिन जब कॉल नहीं आई, तो अमेरिका ने इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों के साथ अपनी डील पक्की कर ली।
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मोदी ने कॉल क्यों नहीं किया? जाल में फंसने का था डर
भारत के विदेश मंत्रालय ने लुटनिक के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पीएम मोदी ने 2025 में कम से कम आठ बार ट्रंप से बात की थी। लेकिन सवाल यह है कि उस ‘खास’ डील के लिए फोन क्यों नहीं हुआ? जानकारों का मानना है कि ट्रंप की कार्यशैली बहुत अनिश्चित है। (PM Modi-Trump call controversy) वे अक्सर फोन कॉल के दौरान ही एकतरफा समझौतों का ऐलान कर देते हैं। तुगलक के एडिटर एस गुरुमूर्ति ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मोदी उसी जाल से बच रहे थे जिसमें जापान और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री फंस गए थे। ट्रंप ने उनकी सहमति के बिना एकतरफा डील का ऐलान कर दिया था, जिसके बाद उन नेताओं की घरेलू राजनीति में बहुत किरकिरी हुई थी। (PM Modi-Trump call controversy) मोदी अपनी वैश्विक छवि को किसी एकतरफा दबाव में खराब नहीं होने देना चाहते थे।
झूठे दावों और ‘अहंकार’ की जंग: क्या है हकीकत?
डोनाल्ड ट्रंप अक्सर यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि दुनिया के नेता उन्हें ‘सर’ कहकर बुलाते हैं और उनका हुक्म मानते हैं। हाल ही में उन्होंने दावा किया कि मोदी उनसे अपाचे हेलीकॉप्टर की अटकी डील के लिए मिलने आए थे और 68 हेलीकॉप्टर मांगे थे। जबकि हकीकत यह है कि भारत ने केवल 28 अपाचे ऑर्डर किए थे जो डिलीवर भी हो चुके हैं। (PM Modi-Trump call controversy) ट्रंप का यह स्वभाव कि वे फोन पर ही बड़ी डील्स का क्रेडिट लेना चाहते हैं, भारत के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता था। कूटनीति में ट्रेड डील बंदूक की नोक पर नहीं, बल्कि लंबी बातचीत के बाद होती है, जैसा भारत ने ब्रिटेन के साथ किया।
अंततः, यह स्पष्ट है कि पीएम मोदी ने ट्रंप के साथ बातचीत तो जारी रखी, लेकिन किसी ऐसी डील के लिए फोन नहीं किया जो भारत की शर्तों के बजाय केवल ट्रंप की शर्तों पर आधारित हो। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप वाकई 500 फीसदी टैरिफ लगाकर व्यापार युद्ध शुरू करते हैं या यह सिर्फ दबाव बनाने की एक नई कोशिश है।
