Pakistan Energy Crisis Shahbaz Sharif Action: पड़ोसी देश पाकिस्तान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। हालत यह है कि ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग की आग अब पाकिस्तान के चूल्हों तक पहुंच गई है। (Pakistan Energy Crisis Shahbaz Sharif Action) देश में ऊर्जा का ऐसा भयंकर अकाल पड़ा है कि सरकार को न केवल दफ्तरों पर ताला लगाना पड़ रहा है, बल्कि मंत्रियों की जेब पर भी कैंची चलानी पड़ रही है। (Pakistan Energy Crisis Shahbaz Sharif Action) पाकिस्तान की सड़कों से सरकारी गाड़ियां गायब होने वाली हैं और स्कूलों में सन्नाटा पसरने वाला है। आइए जानते हैं कि आखिर शाहबाज शरीफ सरकार ने देश को बचाने के लिए कौन से सख्त कदम उठाए हैं।
Pakistan Energy Crisis Shahbaz Sharif Action: सड़कों पर लगा ब्रेक: 80% सरकारी गाड़ियां बंद
ऊर्जा संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान सरकार ने 80 फीसदी सरकारी गाड़ियों को अगले दो महीने के लिए पूरी तरह खड़ा कर देने का फैसला किया है। (Pakistan Energy Crisis Shahbaz Sharif Action) जो गाड़ियां चलेंगी भी, उनके तेल (ईंधन) में 50 फीसदी की भारी कटौती कर दी गई है। हालांकि, राहत की बात सिर्फ इतनी है कि एम्बुलेंस और पब्लिक बसों को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है। इसके अलावा, आधे सरकारी कर्मचारियों को घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने को कह दिया गया है और स्कूलों में दो हफ्ते की छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं।
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शाहबाज शरीफ का ‘सैलरी कट’ वाला मास्टरस्ट्रोक
प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने खुद मिसाल पेश करने की कोशिश की है। उन्होंने एलान किया है कि अगले दो महीने तक कैबिनेट का कोई भी सदस्य या बड़ा अधिकारी वेतन नहीं लेगा। (Pakistan Energy Crisis Shahbaz Sharif Action) इतना ही नहीं, सांसदों की सैलरी में भी 25 फीसदी की कटौती कर दी गई है। जिन बड़े अफसरों का वेतन 3 लाख रुपये से ज्यादा है, उनके दो दिन की तनख्वाह ‘नागरिक रिलीफ फंड’ में जमा की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी तरह सरकारी खर्च में 20 फीसदी की कमी लाई जाए।
ऐशो-आराम पर पाबंदी और फिजूलखर्ची पर रोक
पाकिस्तान ने अब पूरी तरह से ‘कंजूसी’ का रास्ता अपना लिया है। सरकारी महकमों में नई गाड़ियां, फर्नीचर और यहां तक कि एयर कंडीशनर (AC) खरीदने पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। (Pakistan Energy Crisis Shahbaz Sharif Action) नेताओं और अफसरों के विदेश दौरों को रद्द कर दिया गया है। अब सारी मीटिंग्स आलीशान होटलों के बजाय सरकारी कमरों में होंगी और इफ्तार पार्टियों या सरकारी उत्सवों पर भी रोक लगा दी गई है। तेल बचाने के लिए अब सारा जोर ऑनलाइन मीटिंग्स और टेली-कॉन्फ्रेंसिंग पर दिया जा रहा है।
IMF की टेढ़ी नजर और डूबती उम्मीदें
एक तरफ ऊर्जा संकट है, तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान सीमा पर जारी तनाव ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है। इस युद्ध के कारण पाकिस्तान का सैन्य खर्च बढ़ गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अगली किस्त खतरे में पड़ गई है। IMF की टीम फिलहाल पाकिस्तान में है और वह इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि क्या पाकिस्तान उनकी सख्त शर्तों को पूरा कर पा रहा है। अगर यह किस्त नहीं मिली, तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह जमींदोज हो सकती है।
