Nepal Elections 2026: नेपाल की राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। चुनाव परिणामों की औपचारिक घोषणा से पहले ही जारी मतगणना के रुझानों ने यह संकेत दे दिया है कि देश में बड़ा राजनीतिक उलटफेर होने जा रहा है। 5 मार्च को हुए आम चुनाव में काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) भारी बढ़त के साथ आगे चल रही है, जबकि दशकों से राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले पारंपरिक दलों को करारी हार का सामना करना पड़ रहा है।
Nepal Elections 2026: नेपाल राजनीति में होगा ऐतिहासिक बदलाव
ताजा रुझानों के अनुसार 275 सदस्यीय संसद के लिए हुए चुनाव में प्रत्यक्ष मतदान वाली 165 सीटों की गिनती में आरएसपी ने जबरदस्त बढ़त हासिल कर ली है। शुक्रवार देर रात तक पार्टी लगभग 115 सीटों पर आगे चल रही थी। (Nepal Elections 2026) इस स्थिति को देखते हुए माना जा रहा है कि बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय हो गया है। यदि यही रुझान अंतिम परिणामों में बदलते हैं तो यह नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।
वहीं दूसरी ओर देश के प्रमुख पारंपरिक दलों का प्रदर्शन बेहद कमजोर दिखाई दे रहा है। नेपाली कांग्रेस केवल लगभग 14 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि सीपीएन-यूएमएल करीब 13 सीटों पर संघर्ष करती नजर आ रही है। (Nepal Elections 2026) यह पार्टी पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरी थी। इसी तरह पुष्प कमल दहाल प्रचंड के नेतृत्व वाली पार्टी का प्रदर्शन भी काफी कमजोर रहा है। हालांकि बड़े नेताओं में सिर्फ प्रचंड ही अपनी सीट बचाने में सफल होते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनकी पार्टी दहाई का आंकड़ा पार करती नजर नहीं आ रही है।
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विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में युवाओं और विशेष रूप से “Gen-Z” मतदाताओं ने निर्णायक भूमिका निभाई है। बड़ी संख्या में युवा मतदाताओं ने बालेन शाह और उनकी पार्टी को समर्थन दिया है। (Nepal Elections 2026) यही वजह है कि लंबे समय से सत्ता में बने पारंपरिक दलों की पकड़ कमजोर पड़ गई है और राजनीतिक परिदृश्य बदलता दिखाई दे रहा है।
केपी शर्मा ओली की स्थिति भी कमजोर
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की स्थिति भी काफी कमजोर दिखाई दे रही है। झापा जिले के जिस निर्वाचन क्षेत्र से वह एक बार को छोड़कर लगातार सात बार चुनाव जीतते आए थे, वहीं इस बार वह बुरी तरह पिछड़ गए हैं। देर रात तक की मतगणना में बालेन शाह को करीब 17 हजार वोट मिल चुके थे, जबकि ओली को लगभग 4 हजार वोट ही मिले थे। (Nepal Elections 2026) इस तरह वह लगभग 13 हजार वोटों से पीछे चल रहे थे। सिर्फ ओली ही नहीं, उनकी पार्टी के कई बड़े नेता और मंत्री भी मतगणना में पीछे चल रहे हैं। दूसरी ओर नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन थापा भी अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से पीछे बताए जा रहे हैं, जबकि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता चुनाव हार चुके हैं।
नेपाल में चुनावी उलटफेर के पीछे तीन प्रमुख कारण
नेपाल में इस चुनावी उलटफेर के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से जनता की नाराजगी, युवा मतदाताओं का पुराने नेताओं से मोहभंग और बालेन शाह द्वारा नई राजनीति और बदलाव का वादा। नेपाल में कुल लगभग 1 करोड़ 89 लाख मतदाता हैं और 275 सीटों के लिए मतदान हुआ है। (Nepal Elections 2026) प्रत्यक्ष मतदान की 165 सीटों में आरएसपी को दो-तिहाई बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है। इसके अलावा समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली की 110 सीटों की गिनती अभी जारी है। (Nepal Elections 2026) रुझानों के आधार पर माना जा रहा है कि आरएसपी को वहां भी 50 से अधिक सीटें मिल सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो नेपाल के इतिहास में करीब 36 साल बाद किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत ही नहीं बल्कि प्रचंड बहुमत भी मिलेगा। इससे देश में राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है और नई सरकार से लोगों की अपेक्षाएं भी काफी ज्यादा हो गई हैं।
