Maduro declares emergency in Venezuela: लैटिन अमेरिका के आसमान में शनिवार की रात बारूद की गंध और मौत के खौफ के साथ उतरी। जिसे दुनिया अब तक केवल ‘चेतावनी’ समझ रही थी, वह अचानक एक खौफनाक हकीकत में बदल गई। शनिवार तड़के करीब 1:50 बजे वेनेजुएला की राजधानी काराकास समेत चार प्रमुख राज्य मिरांडा, अरगुआ और ला गुइरा भीषण हवाई हमलों से दहल उठे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित आदेश के बाद लड़ाकू विमानों ने वेनेजुएला के सैन्य प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों और रणनीतिक ठिकानों पर बमबारी शुरू कर दी है। (Maduro declares emergency in Venezuela) राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इसे “साम्राज्यवादी आक्रामकता” बताते हुए पूरे देश में ‘नेशनल इमरजेंसी’ (राष्ट्रीय आपातकाल) की घोषणा कर दी है और अपने नागरिकों से हथियार उठाकर सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है।
Maduro declares emergency in Venezuela: आसमान से बरसीं मौत की मिसाइलें
शनिवार की रात जब काराकास के लोग सो रहे थे, तभी आसमान में कम ऊंचाई पर उड़ते लड़ाकू विमानों की गर्जना और एक के बाद एक हुए कम से कम सात बड़े धमाकों ने सबको झकझोर दिया। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, धमाके इतने शक्तिशाली थे कि कई किलोमीटर दूर तक घरों की खिड़कियां चटक गईं। देखते ही देखते शहर के दक्षिणी हिस्से में स्थित सैन्य अड्डे के पास बिजली गुल हो गई और पूरा इलाका ‘ब्लैकआउट’ की चपेट में आ गया। (Maduro declares emergency in Venezuela) सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में रात के अंधेरे को चीरती हुई नारंगी लपटें और धुएं के विशाल गुबार साफ देखे जा सकते हैं। इस हमले ने न केवल सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन को खतरे में डाल दिया है।
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मादुरो का ‘सुप्रीम कमांडर’ वाला तेवर
हवाई हमलों के तुरंत बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए इसे वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि अमेरिका का यह युद्ध थोपने का प्रयास पिछले 200 वर्षों के अन्य हमलों की तरह ही विफल होगा। (Maduro declares emergency in Venezuela) मादुरो ने अपने दिवंगत नेता ह्यूगो चावेज को याद करते हुए कहा, “चाहे कठिनाई कितनी भी बड़ी हो, देशभक्तों की प्रतिक्रिया केवल एकता, संघर्ष और विजय होगी।” वेनेजुएला ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए ‘आत्मरक्षा’ के अधिकार का प्रयोग करने की चेतावनी दी है। (Maduro declares emergency in Venezuela) मादुरो ने अपनी सेना और प्रो-गवर्नमेंट मिलिशिया को “युद्धकालीन व्यवस्था” में सक्रिय होने का आदेश दे दिया है।
क्या तेल भंडार हैं असली निशाना? इस संघर्ष के पीछे के कारणों पर दोनों देशों के दावे बिल्कुल अलग हैं। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये हमले वेनेजुएला स्थित ‘ड्रग तस्करी नेटवर्क’ और मादक पदार्थों के अड्डों को नष्ट करने के लिए किए गए हैं, जो अमेरिका में अपराध और अवैध प्रवासन को बढ़ावा दे रहे हैं। (Maduro declares emergency in Venezuela) दूसरी ओर, निकोलस मादुरो ने ट्रंप पर सीधा आरोप लगाया है कि वे वेनेजुएला को अपना उपनिवेश बनाना चाहते हैं और उनकी नजर यहां के विशाल ईंधन (तेल) भंडारों पर है। अमेरिका उन देशों में अग्रणी रहा है जिन्होंने 2024 के वेनेजुएला चुनाव परिणामों का विरोध किया था, और अब यह सैन्य कार्रवाई उस राजनीतिक तनाव का चरम बिंदु मानी जा रही है।
‘ऑपरेशन सदर्न स्पीयर’ और वैश्विक चिंता
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला ‘ऑपरेशन सदर्न स्पीयर’ का हिस्सा हो सकता है, जिसके तहत अमेरिका ने हाल के दिनों में कैरेबियन सागर में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई थी। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने भी इस हमले की पुष्टि करते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) और OAS से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। (Maduro declares emergency in Venezuela) हालांकि व्हाइट हाउस और पेंटागन ने अभी तक इन हमलों पर कोई सीधा आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने हमलों की पुष्टि की है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष एक पूर्ण युद्ध का रूप ले लेगा या अंतरराष्ट्रीय दबाव इस आग को शांत कर पाएगा।
