Japan Megaquake Advisory: जापान इन दिनों कुदरत के कहर से जूझ रहा है। भूकंप और सुनामी के संकट के बीच मेगाक्वैक एडवायजरी जारी कर दी है। जिसे रेयर एडवायजरी कहा जाता है। ओमोरी के ईस्ट तट पर 7.5 मैग्नीट्यूट के भूकंप के आने के बाद अलर्ट जारी किया गया है। भूकंप से हालांकि ज्यादा नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन यह आशंका जतायी जा रही है। कि अभी खतरा पूरी तरह से टला नहीं है। आने वाले दिनों में संकट बढ़ सकता है। जिसके चलते मेगाक्वैक एडवायजरी जारी कर दी गयी है। अगर आने वाले दिनों में जापान में सुनामी आती है तो फिर 98 फीट तक ऊंची लहरें उठ सकती हैं और इस आपदा में करीब दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत होने की संभावना है।
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Japan Megaquake Advisory: 31 ट्रिलियन येन का हो सकता है आर्थिक नुकसान
जापान सरकार के अनुमान जताते हुए अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि होक्काइडो-सैनरिकु क्षेत्र में समुद्री महाभूकंप से 30 मीटर (98 फीट) ऊंचाई की सुनामी आ सकती है। इस घटना में लगभग 1,99,000 लोगों की जान जा सकती है। (Japan Megaquake Advisory) वहीं 2,20,000 से ज्यादा इमारतों को भी क्षति हो सकती है। यही नहीं करीब 31 ट्रिलियन येन का आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। अगर इस तरह की कोई भी आपदा सर्दियों के मौसम में आयी तो फिर यह संभावना है कि 42 हजार से अधिक लोग हाइपोथर्मिया से पीड़ित हो सकते हैं। फिलहाल जो एडवायजरी जारी हुई है, वह 182 नगरपालिकाओं तक है, जोकि होक्काइडो से चिबा प्रान्त तक स्थित है।
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हाल के सालों में जारी सबसे व्यापक भौगोलिक चेतावनियों में से यह एडवायरजरी एक है। जापान में आज भी साल 2011 का डर बना हुआ है। (Japan Megaquake Advisory) साल 2011 में भूकंप के बाद आयी सुनामी के चलते काफी तबाही हुई थी। इस आपदा में लगभग 20,000 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, फुकुशिमा न्यूक्लियर संकट भी बढ़ गया था। जापान के मौसम विभाग के अनुसार इस बात की संभावना से कतई इनकार नहीं किया जा सकता है कि आने वाले सप्ताह में 8 से ज्यादा मैग्नीट्यूड का भूकंप आए।
इसलिए समुद्र तट के करीब रहने वालों को सतर्क रहने और हो सके तो सुरक्षित जगहों पर चले जाने की सलाह दी गयी है। इसके साथ ही इमरजेंसी किट भी तैयार रखने का सुझाव किया गया है। (Japan Megaquake Advisory) उल्लेखनीय है कि साल 2011 में जापान में आई सुनामी के दौरान कुछ क्षेत्रों में 15 मीटर (50 फीट) तक ऊंची लहरें उठी थी। जिससे मियागी, इवाते और फुकुशिमा के तटीय इलाकों को तबाह कर दिया था। सुनामी के चलते फुकुशिमा डाइइची परमाणु संयंत्र भी नष्ट हो गया था। जिसके चलते रेडिएशन का खतरा बढ़ गया था।
