Jantar Mantar Protest: छात्र संगठनों ने शुक्रवार, गांधी जयंती के दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी। यह मांग चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूचियों के प्रबंधन को लेकर उठाई जा रही है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) की ओर से प्रस्तावित मार्च को दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं दी है। हालांकि, संगठनों ने इसके बावजूद प्रदर्शन के लिए जुटने की योजना बनाई है। इनमें से एक संगठन के सदस्य ने बताया कि करीब 1,500 लोगों के इसमें शामिल होने की उम्मीद है।
Jantar Mantar Protest: दिल्ली मेट्रो के 11 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद
जंतर-मंतर प्रदर्शन: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने शुक्रवार को बताया कि 11 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अगले आदेश तक बंद रहेगा।
हालांकि, राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों को इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहेगी। DMRC ने X पर एक पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी।
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प्रभावित मेट्रो स्टेशनों की सूची:
जनपथ
पटेल चौक
केंद्रीय सचिवालय
राजीव चौक
सेवा तीर्थ
मंडी हाउस
लोक कल्याण मार्ग
INA
चावड़ी बाजार
रामकृष्ण आश्रम मार्ग
नई दिल्ली
नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू
दिल्ली पुलिस ने X पर पोस्ट कर कहा, “नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू है।”
वहीं जुलाई में हुए प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा खामियों से भी इस बार दिल्ली पोलिस ने सबक लिया है और इस बार सुरक्षा को लेकर पहले से व्यापक इंतेजाम कर रही है।
खाने की डिलीवरी को माना बड़ी सुरक्षा चूक
सुरक्षा समीक्षा में जंतर-मंतर पर खाने और पानी की आसान उपलब्धता को एक अहम चूक के तौर पर चिन्हित किया गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जुलाई के प्रदर्शन के दौरान अनुमति मिलने के बाद प्रदर्शन स्थल तक लोगों की पहुंच काफी आसान हो गई थी। अलग-अलग समूहों की ओर से खाना, पानी और जूस उपलब्ध कराया जा रहा था।
एक अधिकारी ने बताया कि कुछ लोग लंबे समय तक जंतर-मंतर पर इसलिए भी रुके रहे क्योंकि वहां मुफ्त भोजन और पानी उपलब्ध था। पुलिस का आकलन है कि अगर इस तरह की व्यवस्था लंबे समय तक जारी रहती तो असामाजिक तत्व भी इसका फायदा उठा सकते थे।
टूटे फुटपाथ और दीवारों से सुरक्षा का खतरा
सुरक्षा एजेंसियों ने नई दिल्ली इलाके में टूटे फुटपाथ और क्षतिग्रस्त दीवारों को भी संभावित खतरे के तौर पर चिन्हित किया है।
पुलिस के मुताबिक, जुलाई के प्रदर्शन के दौरान टूटे फुटपाथ से निकले पत्थरों का इस्तेमाल पुलिस और सुरक्षा बलों पर फेंकने के लिए किया गया था। इस बार कई जगहों पर मरम्मत करा दी गई है, जबकि जहां तत्काल मरम्मत संभव नहीं थी, उन स्थानों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई गई है।
नई दिल्ली इलाके में CCTV निगरानी भी मजबूत की गई है, ताकि भीड़ में हिंसा भड़काने या सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों पर नजर रखी जा सके।
पुलिसकर्मियों को कैमरे और लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर ट्रेनिंग
पिछले दो महीनों में दिल्ली पुलिस ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में एंटी-रायट और प्रदर्शन नियंत्रण से जुड़े मॉक ड्रिल किए हैं। इनमें पुलिसकर्मियों को इस बात की ट्रेनिंग भी दी गई कि प्रदर्शनकारी अगर मोबाइल फोन से उन्हें रिकॉर्ड करें या मौके से लाइव स्ट्रीमिंग करें तो वे उकसावे में आकर प्रतिक्रिया न दें।
एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग जानबूझकर पुलिसकर्मियों को प्रतिक्रिया देने के लिए उकसाने की कोशिश करते हैं, जिससे बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो सके। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए हाल की ट्रेनिंग में विशेष रूप से ऐसे हालात से निपटने पर जोर दिया गया।
CRPF की रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों से जुड़े कुछ मामलों को भी आंतरिक समीक्षा में उठाया गया। इनमें कुछ जवानों के प्रदर्शनकारियों को इंटरव्यू देते दिखाई देने और कथित तौर पर कुछ प्रदर्शनकारियों को गिराने से जुड़े वीडियो शामिल थे।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर भी नजर
जुलाई के प्रदर्शन में पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा विवाद का केंद्र रहा था। विपक्ष और CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
हालांकि पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, संसद मार्ग थाने की डेली डायरी में जुलाई के प्रदर्शन के दौरान RAF द्वारा एंटी-रायट गन और प्लास्टिक पैलेट के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया था।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई में कथित ज्यादती के आरोपों की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय हाई-पावर जांच समिति गठित की है।
2 अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए 4000 सुरक्षाकर्मी
जुलाई के प्रदर्शन के विपरीत, दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी है। पुलिस ने सोमवार से ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की कम से कम 20 कंपनियों की मांग की है। इन बलों की तैनाती जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में की गई है।
नई दिल्ली इलाके में करीब 4,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। संसद मार्ग समेत कई प्रमुख रास्तों को बंद या प्रतिबंधित किया गया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, प्रमुख प्रवेश मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई है और बैरिकेड लगाए गए हैं। मध्य और दक्षिण दिल्ली से नई दिल्ली की ओर आने वाले कुछ रास्तों पर प्रदर्शनकारियों को रोककर वापस भेजने की तैयारी है। हालात के आधार पर नई दिल्ली क्षेत्र के कुछ मेट्रो स्टेशनों के गेट भी बंद किए जा सकते हैं।
बड़ी भीड़ आने पर स्टेडियम बन सकते हैं अस्थायी हिरासत केंद्र
पुलिस की बैठकों में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने की स्थिति के लिए अस्थायी हिरासत केंद्र बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसके लिए शहर के कुछ स्टेडियमों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
अगर प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं, पुलिस के निर्देश के बावजूद नहीं हटते और गिरफ्तारी देने पर अड़े रहते हैं, तो उन्हें अस्थायी हिरासत केंद्रों में ले जाया जा सकता है।
हालांकि, यह व्यवस्था नई नहीं है। इससे पहले भी बड़े प्रदर्शनों के दौरान स्टेडियमों का इस्तेमाल अस्थायी हिरासत केंद्र के रूप में किया जा चुका है। 2019-20 के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी कुछ स्टेडियमों को अस्थायी हिरासत केंद्रों में बदला गया था।
कुल मिलाकर, जुलाई के प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने इस बार जंतर-मंतर और नई दिल्ली इलाके की सुरक्षा व्यवस्था में कई स्तरों पर बदलाव किए हैं। पुलिस का फोकस भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ संभावित हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और सुरक्षा बलों के साथ टकराव की स्थिति को रोकने पर है।
