Iran US tension News: मध्य पूर्व के सुलगते समंदर में एक बार फिर बारूद की गंध तेज हो गई है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब उस मोड़ पर आ गया है, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को स्वाहा कर सकती है। इस महायुद्ध की बिसात पर इस वक्त सबसे बड़ा मोहरा बनकर उभरा है- ‘खार्ग द्वीप’। ईरान की ‘किस्मत की चाबी’ कहे जाने वाले इस छोटे से द्वीप को बचाने के लिए तेहरान ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। (Iran US tension News) खबर आ रही है कि ईरान ने इस द्वीप को एक ऐसे ‘मौत के जाल’ में बदल दिया है, जहां कदम रखते ही अमेरिकी सैनिकों के चिथड़े उड़ सकते हैं। आखिर क्या है ट्रंप का वो ‘सीक्रेट प्लान’ जिसने ईरान की नींद उड़ा दी है और क्यों इस द्वीप पर कब्जा करना अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है? आइए जानते हैं इस खूनी बिसात की पूरी इनसाइड स्टोरी।
Iran US tension News: ईरान की ‘दुखती रग’ पर ट्रंप की नजर
ईरान के लिए खार्ग द्वीप सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि उसकी रगों में दौड़ने वाला खून है। फारस की खाड़ी में स्थित इस द्वीप से ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल पूरी दुनिया में निर्यात होता है। यानी अगर इस द्वीप पर आंच आई, तो ईरान की अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों और सीएनएन के खुलासे के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन एक ऐसे खतरनाक विकल्प पर विचार कर रहा है, जिसमें इस द्वीप पर सीधे जमीन से हमला करके कब्जा जमाया जा सके। अमेरिका का मानना है कि अगर उसने खार्ग द्वीप को अपने नियंत्रण में ले लिया, तो वह ईरान को घुटनों पर ला देगा और बंद पड़े ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को दोबारा खुलवा लेगा। लेकिन यह जितना सुनने में आसान लगता है, हकीकत में उतना ही डरावना है।
मौत का जाल और ईरानी सेना की ‘लोहे की दीवार’
ट्रंप के इस संभावित हमले की भनक लगते ही ईरान ने खार्ग द्वीप पर सुरक्षा की ऐसी परतें चढ़ा दी हैं कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। पिछले कुछ हफ्तों में यहाँ अतिरिक्त सैनिकों की खेप भेजी गई है और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि ईरान ने द्वीप के किनारों पर हजारों की संख्या में लैंड माइन्स (बारूदी सुरंगें) बिछा दी हैं। (Iran US tension News) ये माइन्स खास तौर पर उन जगहों पर लगाई गई हैं, जहाँ से अमेरिकी समुद्री दस्ते जमीन पर उतर सकते हैं। पैदल सैनिकों से लेकर भारी टैंकों तक को उड़ाने के लिए यहाँ बिछाया गया जाल किसी भी सेना के लिए कब्रगाह साबित हो सकता है। इसके अलावा, ईरान ने कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली MANPADS मिसाइलें भी तैनात की हैं, जो कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अमेरिकी हेलिकॉप्टरों को मिनटों में खाक कर सकती हैं।
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अमेरिका के भीतर ही उठने लगे बगावती सुर
हैरानी की बात यह है कि ट्रंप के इस ‘कब्जा प्लान’ पर खुद उनके ही सैन्य सलाहकार और एक्सपर्ट्स सवाल उठा रहे हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) भले ही इस पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन अंदरखाने यह चर्चा तेज है कि खार्ग द्वीप पर हमला करना अमेरिका के लिए भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिकी सैनिक वहां उतरते हैं, तो उन्हें भारी जानी नुकसान उठाना पड़ेगा। (Iran US tension News) कई अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है और इसके बावजूद इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ईरान होर्मुज का रास्ता खोल ही देगा। ट्रंप के कुछ करीबी सहयोगियों का मानना है कि जोखिम बहुत बड़ा है और फायदा बहुत कम। ईरान ने पहले ही अपनी तेल सुविधाओं को बचाने के लिए हर संभव तैयारी कर ली है, जिससे अमेरिका का मिशन और भी मुश्किल हो गया है।
वैश्विक बाजार पर मंडरा रहा है तबाही का साया
अगर इस द्वीप पर जंग छिड़ती है, तो इसका असर सिर्फ तेहरान या वाशिंगटन तक सीमित नहीं रहेगा। पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई ठप हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। (Iran US tension News) हालांकि अमेरिका ने हाल ही में खार्ग द्वीप पर हवाई हमले कर 90 सैन्य ठिकानों को तबाह किया था, लेकिन तब तेल रिफाइनरियों को छोड़ दिया गया था। अब ईरान को डर है कि अगला हमला सीधा उसकी कमाई के जरिए यानी तेल कुओं पर हो सकता है। इसीलिए वह अब ‘करो या मरो’ की स्थिति में अपने बचाव को मजबूत कर रहा है। आने वाले दिन तय करेंगे कि ट्रंप अपनी जिद पर अड़े रहते हैं या फिर दुनिया एक और भीषण तबाही से बच जाती है।
