India-EU FTA trade deal: भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक साख के लिए एक ऐसी खबर सामने आई है, जो आने वाले दशकों तक देश की किस्मत बदल देगी। व्यापार की दुनिया में जिस पल का इंतजार पिछले कई सालों से किया जा रहा था, वह अब बस तीन दिन दूर है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (FTA) पर अंतिम मुहर लगने जा रही है। इसे विशेषज्ञ ‘मदर ऑफ ऑल डील’ कह रहे हैं, क्योंकि यह अब तक का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली व्यापारिक समझौता होने वाला है। 27 जनवरी की तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन एक साथ दुनिया के सामने इस महा-घोषणा को साझा करेंगे।
India-EU FTA trade deal: गणतंत्र दिवस पर यूरोप का साथ
इस ऐतिहासिक समझौते की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन खुद दिल्ली पहुंच रही हैं। (India-EU FTA trade deal) वे 24 जनवरी को भारत की धरती पर कदम रखेंगी और शाम को ही विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगी। सबसे खास बात यह है कि इस बार 26 जनवरी की गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपीय प्रतिनिधि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर भारत के साथ अपनी अटूट दोस्ती का प्रदर्शन करेंगे। इसके ठीक अगले दिन यानी 27 जनवरी को प्रधानमंत्री के साथ एक हाई-प्रोफाइल बैठक होगी, जिसमें व्यापार, तकनीक और जलवायु संरक्षण जैसे बड़े मुद्दों पर अंतिम हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह दौरा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से रणनीतिक और आर्थिक मजबूती का प्रतीक है।
क्यों कहा जा रहा है इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का नाम दिया है और इसके पीछे ठोस वजहें हैं। (India-EU FTA trade deal) यूरोपीय संघ की अध्यक्ष ने दावोस में पहले ही संकेत दे दिया था कि भारत के साथ होने वाला यह समझौता अपनी तरह का पहला और अनूठा होगा। यह डील न केवल 27 यूरोपीय देशों के समूह को भारत के विशाल बाजार में ‘फर्स्ट मूवर एडवांटेज’ देगी, बल्कि भारत के लिए भी यूरोप के दरवाजे पूरी तरह खोल देगी। (India-EU FTA trade deal) यह समझौता अमेरिका और चीन जैसे देशों पर भारत की निर्भरता को कम करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत को एक ‘ग्लोबल हब’ बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
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भारतीय बाजार और नौकरियों के लिए खुलेगा कुबेर का खजाना
इस डील के वित्तीय आंकड़े किसी को भी हैरान कर सकते हैं। साल 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच करीब ₹11.8 लाख करोड़ का व्यापार हुआ था, लेकिन इस समझौते के बाद इसके 200 अरब डॉलर के पार पहुंचने की उम्मीद है। सर्विस सेक्टर से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक, भारत का एक्सपोर्ट रॉकेट की रफ्तार से बढ़ेगा। (India-EU FTA trade deal) इसका सीधा फायदा देश के युवाओं को मिलेगा क्योंकि लाखों नई नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। स्टार्टअप्स और नई कंपनियों को यूरोप से भारी निवेश मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा, जिससे भारतीय स्टार्टअप दुनिया भर में अपनी धाक जमा सकेंगे।
अमेरिका को करारा जवाब
यह डील ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाकर व्यापारिक मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच कठिन हो गई है, ऐसे में यूरोपीय संघ के साथ यह फ्री ट्रेड डील भारत को एक वैकल्पिक और उससे भी बड़ा बाजार मुहैया कराएगी। (India-EU FTA trade deal) अब भारत को अपनी तरक्की के लिए किसी एक महाशक्ति के सामने झुकने की जरूरत नहीं होगी। यूरोप के 27 देशों का साथ भारत को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
