UN India-Pakistan conflict: संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच पर भारत ने सोमवार को अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को ऐसा आईना दिखाया कि दुनिया देखती रह गई। पाकिस्तान की डगमगाती हुई घरेलू राजनीतिक स्थिति और सेना की बढ़ती असंवैधानिक शक्ति को लेकर भारत ने तीखे और निर्णायक शब्दों में हमला बोला। (UN India-Pakistan conflict) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ‘लीडरशिप फॉर पीस’ विषय पर हुई खुली बहस के दौरान, भारत ने पाकिस्तान पर लोकतंत्र को रौंदने, प्रधानमंत्री को जेल में डालने और सेना को आजीवन इम्यूनिटी देने का गंभीर आरोप लगाया।
UN India-Pakistan conflict: सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर तीखा निशाना
भारत का सीधा निशाना पाकिस्तान के शक्तिशाली सेना प्रमुख आसिम मुनीर की सत्ता पर बढ़ती हुई पकड़ पर था। भारत ने स्पष्ट कहा कि मुनीर ने न सिर्फ भारत पर ‘झूठी जीत का दावा’ किया है, बल्कि देश के 27वें संविधान संशोधन का दुरुपयोग कर अपने लिए ‘आजीवन सुरक्षा की गारंटी’ भी सुनिश्चित कर ली है। (UN India-Pakistan conflict) भारतीय प्रतिनिधि ने इशारा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर हो रहे ‘अत्याचार’ के पीछे भी यही ताकतें काम कर रही हैं।
जब भारत ने पाकिस्तान के लोकतंत्र को बेनकाब किया
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वतनैनी, ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए एक तीखी टिप्पणी की। (UN India-Pakistan conflict) उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के पास अपने लोगों की इच्छा का सम्मान करने का एक अनोखा तरीका है।”
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इस ‘अनोखे तरीके’ की व्याख्या करते हुए उन्होंने तीन प्रमुख बिंदु रखे:
एक निर्वाचित प्रधानमंत्री को जेल में डालना।
सत्ताधारी राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाना।
27वें संविधान संशोधन के माध्यम से सेना को देश की राजनीति पर पूरी तरह हावी कर देना और रक्षा बलों के प्रमुख को आजीवन इम्यूनिटी (रोग-प्रतिरोधक शक्ति) देना।
इमरान खान की कैद: दुनिया को बताया गया ‘अत्याचार’
भारत ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी का संदर्भ दिया। खान अगस्त 2023 से 190 मिलियन यूरो के भ्रष्टाचार मामले में सजा काट रहे हैं, साथ ही उन्हें आतंकवाद-रोधी कानून के तहत हिंसक प्रदर्शनों से जुड़े मुकदमों का भी सामना करना पड़ रहा है। (UN India-Pakistan conflict) इमरान खान की पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए चिंता जताई है, जिसमें अदियाला जेल में खान के साथ ‘अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार’ किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। भारत ने इस स्थिति को रेखांकित कर पाकिस्तान में मानवाधिकारों के हनन पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया।
27वां संशोधन: सेना को संवैधानिक ‘ब्रह्मास्त्र’
भारत ने हाल ही में पारित 27वें संविधान संशोधन विधेयक पर विशेष रूप से सवाल उठाए, जिसे पाकिस्तान की सैन्य और न्यायिक संरचना में बड़े बदलाव लाने वाला बताया गया है। (UN India-Pakistan conflict) इस संशोधन के कुछ विवादास्पद प्रावधानों में:
चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का पदनाम बदलकर ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस’ करना।
फील्ड मार्शल जैसे मानद सैन्य पदों को आजीवन (Life-long) कर देना।
सुप्रीम कोर्ट के अधिकारों को साझा करने के लिए एक नए फेडरल कांस्टीट्यूशनल कोर्ट (FCC) का गठन करना, जिसे स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार भी होगा।
यह संशोधन स्पष्ट रूप से सेना की शक्ति को संवैधानिक जामा पहनाता है, जो पाकिस्तान के लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है।
कश्मीर पर झूठ खारिज: पहले अपना घर संभालें
बहस के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के अनावश्यक और झूठे दावों को सिरे से खारिज कर दिया। भारत का कड़ा संदेश स्पष्ट था: पाकिस्तान को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय पहले अपने आंतरिक लोकतांत्रिक संकट, मानवाधिकारों की स्थिति और सेना के हस्तक्षेप पर ध्यान देना चाहिए। (UN India-Pakistan conflict) संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह टिप्पणी पाकिस्तान के लिए एक करारा झटका है, जो वैश्विक मंच पर उसके गिरते लोकतांत्रिक मूल्यों को उजागर करती है।
