India And America: वेनेजुएला का ताजा घटनाक्रम अब केवल एक तख्तापलट की कोशिश नहीं रह गया है, बल्कि यह अमेरिकी ताकत का स्पष्ट उदाहरण बन चुका है। 3 जनवरी को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उनके बेडरूम से उठाकर सीधे अमेरिका ले आए। (India And America) अब मादुरो न्यूयॉर्क की कोर्ट में ड्रग तस्करी (नार्को-टेररिज्म) के आरोपों का सामना कर रहे हैं। इस घटना ने दुनिया भर के नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया है अगर आप अमेरिका के रास्ते का कांटा बनेंगे, तो अमेरिकी ‘डीप स्टेट’ आपको आपके घर से उठा लेगा।
India And America: अमेरिकी डीप स्टेट: शक्ति का अंधेरा चेहरा
अमेरिकी ‘डीप स्टेट’ एक विवादास्पद और गूढ़ शब्द है। यह उन सरकारी हिस्सों को दर्शाता है जो गैर-निर्वाचित होते हैं, लेकिन असल में नीतियों की दिशा तय करते हैं। इनमें CIA, FBI, सैन्य, बड़े कारोबारी समूह और हथियार लॉबी का गठजोड़ शामिल है। इनका लक्ष्य अमेरिकी हितों की सुरक्षा होता है, और इसके लिए ये किसी भी राष्ट्रपति के निर्णय से ऊपर काम करते हैं। (India And America) इतिहास में अमेरिका ने कई देशों में सत्ता परिवर्तन किए हैं, विशेषकर CIA के माध्यम से, ताकि अपने आर्थिक, रणनीतिक और राजनीतिक हितों को सुरक्षित रखा जा सके।
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वेनेजुएला में क्या हुआ?
वेनेजुएला की स्थिति पिछले कुछ दशकों से बेहद अस्थिर रही है। 1999 से समाजवादी नेता ह्यूगो शावेज और फिर उनके उत्तराधिकारी निकोलस मादुरो ने देश पर शासन किया। (India And America) वेनेजुएला कभी तेल से भरपूर देश था, लेकिन मादुरो के शासन में आर्थिक गलतियां, भ्रष्टाचार और अमेरिकी प्रतिबंधों ने देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया। महंगाई के चलते लोग भूखे मरने लगे, और विपक्षी नेताओं ने चुनाव को धोखाधड़ी करार दिया। 2024 के चुनावों में मादुरो ने दावा किया कि वह तीसरी बार विजयी रहे हैं, लेकिन विपक्ष ने इसे पूरी तरह से नकार दिया और एदमुंडो गोंजालेज को असली विजेता बताया।
जनवरी 2026 में, अमेरिकी प्रशासन ने सैन्य ऑपरेशन करते हुए मादुरो को गिरफ्तार किया और अमेरिका भेज दिया। (India And America) ट्रंप प्रशासन ने बयान दिया कि अब अमेरिका वेनेजुएला को चलाएगा, और विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने इसे आज़ादी का समय कहा, जबकि अमेरिका ने मचाडो को नकारते हुए मादुरो की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से बातचीत की इच्छा जताई।
अमेरिकी ‘डीप स्टेट’ का इतिहास: जब-जब दूसरों की ‘लंका’ लगी
अमेरिका ने 1900 से अब तक कई देशों में हस्तक्षेप किया है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से कम्युनिज्म को रोकना, तेल और संसाधनों को अपने कब्जे में लेना, और वैश्विक राजनीतिक वर्चस्व कायम करना रहा है। (India And America) इतिहास में अमेरिकी डीप स्टेट ने जिन देशों में हस्तक्षेप किया, उनमें शामिल हैं:
- 1953, ईरान: CIA ने प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेक को हटाकर शाह को सत्ता में बहाल किया।
- 1961, क्यूबा: अमेरिकी CIA ने फिदेल कास्त्रो को हटाने की कोशिश की थी।
- 1973, चिली: CIA ने साल्वाडोर अलेंदे को मारकर तानाशाह पिनोशे को सत्ता में बैठाया।
- 1989, पनामा: मैनुअल नोरिएगा को गिरफ्तार कर मियामी लाया गया था।
- 2003, इराक: अमेरिका ने सद्दाम हुसैन को हटाने के नाम पर युद्ध शुरू किया, लेकिन हथियार कभी नहीं मिले।
ये सभी हस्तक्षेप अस्थिरता और तानाशाही का कारण बने, लेकिन अमेरिकी हितों को सुरक्षित कर दिया।
भारत पर अमेरिकी डीप स्टेट का प्रभाव
वेनेजुएला और अन्य देशों के घटनाक्रम को देखकर यह सवाल उठता है क्या अमेरिका भारत के साथ ऐसा कर सकता है? भारत ने अपनी स्वतंत्र और मजबूत विदेश नीति के साथ अमेरिका को कई बार जवाब दिया है। (India And America) भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है, और अमेरिका के लिए भारत पर सैन्य आक्रमण करना या नेता को पकड़ना एक विशाल जोखिम होगा। इसके अलावा, भारत की विशाल और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था भी अमेरिकी हस्तक्षेप को नाकाम कर देती है।
भारत ने हमेशा अपने पड़ोसी देशों में अमेरिकी हस्तक्षेप का विरोध किया है और अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखा है। उदाहरण के तौर पर, भारत ने रूसी तेल आयात को जारी रखा, जबकि अमेरिका ने इस पर दबाव डाला। (India And America) अमेरिका ने भारत के खिलाफ कई तरह के कूटनीतिक दबाव डाले, जैसे CAATSA प्रतिबंध और खालिस्तानी मुद्दा, लेकिन भारत ने अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं किया।
क्यों नहीं हो सकता भारत पर अमेरिका का दबाव?
- परमाणु शक्ति: भारत एक घोषित परमाणु शक्ति है, और किसी भी परमाणु संपन्न देश पर सैन्य हमला तीसरे विश्व युद्ध को जन्म दे सकता है।
- आर्थिक महाशक्ति: भारत की विशाल अर्थव्यवस्था, खासकर अमेरिकी कंपनियों के लिए, अमेरिका को भारत के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाने से रोकती है।
- कूटनीतिक संतुलन: भारत की कूटनीतिक संतुलन नीति, जिसमें अमेरिका और रूस दोनों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए गए हैं, अमेरिका को भारत के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाने से रोकती है।
- आंतरिक एकता: भारत की आंतरिक राजनीति चाहे जैसी भी हो, बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ पूरा देश एकजुट होता है।
इसलिए, वेनेजुएला के घटनाक्रम को देखकर यह कहा जा सकता है कि अमेरिका ने जिस प्रकार से वैश्विक स्तर पर हस्तक्षेप किया है, भारत के मामले में वह कारगर नहीं हो सकता है। भारत अपनी स्वतंत्र और मजबूत नीति के साथ हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है।
