Hasnat Abdullah statement: बांग्लादेश में अलगे साल होने वाले आम चुनाव से पहले भारत विरोधी बयानबाजी तीव्र होती जा रही है। नेशनल सिटिजन पार्टी (साउथ) के चीफ ऑर्गनाइजर और कुमिल्ला-4 सीट से उम्मीदवार घोषित किए गए हसनत अब्दुल्ला ने एक बार फिर भारत के खिलाफ जहर उगल दिया है। (Hasnat Abdullah statement) अपने विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले हसनत ने कहा, “यदि आप देखते ही गोली मारने की पॉलिसी में भरोसा रखते हैं, तो मैं देखते ही सलाम करने की पॉलिसी क्यों मानूं?” अब.. उनके इस बयान को बांग्लादेश की राजनीति में भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने का प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
आपको बता दे, हसनत अब्दुल्ला वही नेता हैं जिन्होंने कुछ दिन पहले भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों, यानी ‘सेवन सिस्टर्स’, को अलग करने की धमकी देकर देश में भयंकर हलचल पैदा कर दी थी। (Hasnat Abdullah statement) उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि बांग्लादेश को अस्थिर किया गया तो इसका प्रभाव पूरे क्षेत्र पर बुरी तरह से पड़ेगा और भारत को इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। अब चुनावी मंच से दिए गए उनके हाल ही के बयान ने दोनों देशों के संबंध में तनाव को और हवा दे दी है।
Hasnat Abdullah statement: चुनावी राजनीति में भारत विरोध
बांग्लादेश में आगामी आम चुनाव 12 फरवरी 2026 को होना है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे कई छोटे और उग्रवादी नेता भारत विरोध को चुनावी हथियार के रूप में प्रयोग करते नज़र आना शुरू हो गए हैं। हसनत अब्दुल्ला भी इसी रणनीति पर चलते दिखाई दे रहे हैं। (Hasnat Abdullah statement) कुमिल्ला के फुलटोली इलाके में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत पर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया।
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हसनत का भारत पर बड़ा आरोप
हसनत का दावा है कि भारत बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने अवामी लीग के कार्यकर्ताओं को पनाह दी है, उन्हें ट्रेनिंग और आर्थिक मदद दी जा रही है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि हजारों लोग बिना वैध दस्तावेजों के भारत में दाखिल हो गए हैं। (Hasnat Abdullah statement) हसनत ने तीखे शब्दों में कहा, “आतंकवादियों को पनाह देते हुए और बांग्लादेश में अशांति बनाए रखते हुए आप दोस्ताना रिश्ते की उम्मीद नहीं कर सकते।”
ढाका में भारतीय उच्चायोग के खिलाफ प्रदर्शन
इसी बीच अब बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भारत विरोधी गतिविधियां और तीव्र हो गई हैं। बुधवार को ‘जुलाई ओइक्या’ (जुलाई एकता) नाम के बैनर तले प्रदर्शनकारियों के एक बड़े समूह ने भारतीय उच्चायोग की तरफ़ मार्च करने का प्रयास किया। इतना ही नहीं… इन प्रदर्शनकारियों ने भारत के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए और भारतीय मिशन में तोड़फोड़ की धमकी दी।
हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने सख्त कार्रवाई की। (Hasnat Abdullah statement) एक पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, रामपुर पुल से शुरू हुए जुलूस को नॉर्थ बड्डा इलाके में हुसैन मार्केट के सामने रोक दिया गया, जहां डिप्लोमैटिक जोन स्थित बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने मजबूत नाकेबंदी कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर ‘दिल्ली हो या ढाका, ढाका तो ढाका है’ और ‘मेरा भाई हादी – हादी को क्यों मरना पड़ा?’ जैसे ज़ोरदार नारे लगाए। (Hasnat Abdullah statement) प्रदर्शनकारियों की बड़ी मांगों में पिछले साल जुलाई महीने में विद्रोह के दौरान देश छोड़कर भागी अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और अन्य नेताओं के प्रत्यर्पण की मांग शामिल थी।
भारत की बढ़ती चिंता, वीजा सेवा बंद
ढाका में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारत ने गंभीर चिंता जाहिर की है। भारत सरकार ने अपने मिशन के आसपास सुरक्षा को लेकर बांग्लादेशी अधिकारियों से कड़ा रुख अपनाने का आदेश दिया है। (Hasnat Abdullah statement) इसी कड़ी में भारत ने ढाका स्थित भारतीय वीजा एप्लिकेशन सेंटर (IVAC) को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। जमुना फ्यूचर पार्क में स्थित यह केंद्र बांग्लादेश में भारतीय वीजा सेवाओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
इसपर विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से पहले बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाओं को जानबूझकर उकसाया जा रहा है, ताकि घरेलू राजनीतिक फायदा उठाया जा सके। हालांकि, ऐसे बयानों और प्रदर्शनों से भारत-बांग्लादेश के लंबे वक़्त से चले आ रहे कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
अब… आगे क्या?
भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक, रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में हसनत अब्दुल्ला जैसे नेताओं की उग्र बयानबाजी को दोनों देशों के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। अब आगामी दिनों में यह देखना बहुत ही महत्वपूर्ण होने वाला है कि बांग्लादेश की मुख्यधारा की राजनीति इन बयानों से खुद को किस तरह अलग करती है और भारत इस बढ़ते तनाव से निपटने के लिए कौन से कूटनीतिक कदम उठाता है।
