Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप यह साफ कर चुके हैं कि वे हर हाल में वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका का एकाधिकार चाहते हैं। उनकी यह नीति वैश्विक स्तर पर बड़े टकराव की वजह बन सकती है। इसी कड़ी में अमेरिकी नौसेना ने तथाकथित “शैडो फ्लीट” के तेल टैंकरों को जब्त करने का अभियान शुरू कर दिया है, जिससे चीन और रूस भड़क गए हैं। रूस ने इसे खुले तौर पर समुद्री डकैती करार देते हुए आरोप लगाया है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानूनों को कुचल रहा है। (Donald Trump) हालात की गंभीरता को देखते हुए रूस ने अपने तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए पनडुब्बियां और युद्धपोत तैनात कर दिए हैं, जबकि चीन ने भी अपनी नौसेना के इस्तेमाल का संकेत दिया है। ऐसे में समुद्र में अमेरिका, रूस और चीन के बीच टकराव की आशंका गहराती जा रही है।
अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा रूसी तेल टैंकरों को घेरने की तैयारी में है, वहीं रूसी पनडुब्बियां अटलांटिक महासागर की ओर बढ़ रही हैं। इस बीच यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर जल्द ही बड़े सैन्य मिशन पर रवाना हो सकते हैं। अटलांटिक में तनावपूर्ण हालात बन चुके हैं और कई विश्लेषक इसे संभावित वैश्विक संघर्ष की भूमिका मान रहे हैं। इस पूरे टकराव के केंद्र में वेनेजुएला का विशाल तेल भंडार है, जिस पर अमेरिका अपना पूर्ण नियंत्रण चाहता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला की अंतरिम सरकार के सामने तीन शर्तें रखी हैं। पहली, वेनेजुएला को चीन, रूस और ईरान के साथ सभी व्यापारिक समझौते तोड़ने होंगे। (Donald Trump) दूसरी, तेल उत्पादन में केवल अमेरिका के साथ साझेदारी करनी होगी। तीसरी, तेल की बिक्री में अमेरिका को प्राथमिकता देनी होगी। ट्रंप अपने इरादे सार्वजनिक रूप से भी जता चुके हैं। एक बयान में उन्होंने कहा था कि इराक और वेनेजुएला में फर्क यह है कि इराक में अमेरिका तेल अपने पास नहीं रख सका, लेकिन वेनेजुएला में वह ऐसा करेगा। इसका साफ मतलब है कि अमेरिका वेनेजुएला का तेल किसी और देश तक पहुंचने नहीं देना चाहता।
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इसी रणनीति के तहत अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल ले जाने वाले टैंकरों को अपना मुख्य निशाना बनाया है। खास तौर पर वे टैंकर, जो 3 जनवरी की रात वेनेजुएला के बंदरगाहों से रवाना हुए थे। (Donald Trump) इससे पहले दिसंबर में अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल पर नाकाबंदी लागू कर दी थी और अमेरिकी नौसेना वहां आने-जाने वाले सभी टैंकरों पर नजर रख रही थी। संदिग्ध जहाजों को रोके जाने के कारण करीब 70 से 80 तेल टैंकर वेनेजुएला के तट पर फंस गए थे।
इसके बाद 3 जनवरी की रात अमेरिका ने वेनेजुएला में एयरस्ट्राइक कर बंदरगाहों को भारी नुकसान पहुंचाया। योजना सभी तेल टैंकरों को जब्त करने की थी, लेकिन कार्रवाई से पहले ही कई टैंकर बंदरगाह छोड़ चुके थे। इन जहाजों ने “डार्क मोड” सक्रिय कर दिया, जिससे उनकी लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो गया। (Donald Trump) उनकी स्थिति सैकड़ों मील दूर दिखाई जा रही थी, जबकि वे वास्तव में कैरिबियन सागर में मौजूद थे।
अमेरिका ने ऐसे करीब 16 जहाजों की पहचान की है, जिनमें लगभग 1.2 करोड़ बैरल तेल भरा हुआ था। इसके बाद अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति पर पूरी तरह रोक लगा दी है। (Donald Trump) मौजूदा स्थिति में केवल अमेरिका को ही तेल आपूर्ति हो रही है, जो चीन के लिए बड़ा झटका है। पहले चीन वेनेजुएला से रोजाना करीब 7 लाख बैरल तेल खरीदता था, जबकि अमेरिका लगभग 1.5 लाख बैरल तेल लेता था। अब लगभग पूरा निर्यात अमेरिका की ओर मोड़ दिया गया है।
एक तरफ अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल पर एकाधिकार की घोषणा कर दी है, तो दूसरी तरफ रूस और ईरान के शैडो फ्लीट टैंकर भी उसके निशाने पर हैं। दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने इन टैंकरों की घेराबंदी शुरू कर दी है और जल्द ही जब्ती अभियान तेज किया जाएगा। (Donald Trump) अटलांटिक महासागर में मौजूद तेल टैंकर फिलहाल अमेरिका का प्रमुख लक्ष्य बने हुए हैं। अमेरिकी युद्धपोत रूसी शैडो फ्लीट के जहाजों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं, जिससे अमेरिका, रूस और चीन के बीच टकराव का खतरा और बढ़ गया है।
इसी बीच अमेरिका ने चीनी नौसेना की सैटेलाइट निगरानी भी तेज कर दी है। सामने आई कुछ तस्वीरों में चीन के नौसैनिक अड्डों पर असामान्य हलचल देखी गई है। दावा है कि चीन के तीनों एयरक्राफ्ट कैरियर सक्रिय हो चुके हैं और उन्हें अमेरिका की सेकंड आइलैंड चेन के पास तैनात किया जा सकता है। फिलहाल चीन कड़े बयान दे रहा है, लेकिन रूस ने अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए पनडुब्बियां पहले ही उतार दी हैं।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि वेनेजुएला के तट के पास मौजूद कुछ प्रतिबंधित तेल टैंकर रूसी झंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई से बचा जा सके। (Donald Trump) अब तक ऐसे पांच रूसी जहाजों की पहचान की जा चुकी है। वेनेजुएला के तेल को लेकर वैश्विक स्तर पर बड़े संघर्ष की आशंका लगातार गहराती जा रही है।
इस बीच अमेरिकी तेल कंपनियां फिलहाल वेनेजुएला में लौटने से हिचक रही हैं। (Donald Trump) इसके कई कारण बताए जा रहे हैं। कंपनियों को वेनेजुएला के भविष्य को लेकर अनिश्चितता है। खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते उत्पादन शुरू होने में लंबा समय लग सकता है और इसे सुधारने के लिए अरबों डॉलर के निवेश की जरूरत होगी। (Donald Trump) साथ ही, वेनेजुएला का तेल भारी श्रेणी का है, जिसे प्रोसेस करना महंगा पड़ता है, जबकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही कम हैं। ऐसे में मुनाफा आने में वर्षों लग सकते हैं।
इन तमाम अड़चनों के बावजूद ट्रंप अमेरिकी तेल कंपनियों को मनाने के लिए इसी हफ्ते उनके साथ बैठक करने वाले हैं, ताकि वेनेजुएला से तेल का निर्यात जल्द से जल्द अमेरिका शुरू किया जा सके। (Donald Trump) हालांकि विशेषज्ञों की आशंका है कि ट्रंप की यह जल्दबाजी दुनिया को एक बड़े और खतरनाक संघर्ष की ओर धकेल सकती है।
