Donald Trump: भारत और अमेरिका के बीच हालिया कूटनीतिक घटनाक्रम ने विश्व मंच पर व्यापार और विदेश नीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में अमेरिकी विदेश नीति और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यवहार पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि ट्रंप का अपने देश और दुनिया के साथ संवाद करने का तरीका बेहद अलग है और विदेश नीति को जिस तरह से वह खुलेआम पेश करते हैं, वह परंपरागत कूटनीतिक तौर-तरीकों से मेल नहीं खाता।
जयशंकर ने कहा, “विदेश नीति इस तरह खुलकर नहीं होती जैसी ट्रंप करते हैं।” उनका यह बयान ट्रंप की अनिश्चित और कभी-कभी विरोधाभासी नीतियों की पुष्टि करता प्रतीत होता है।
ट्रंप के दावे बनाम वास्तविकता
6 जनवरी को ट्रंप ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने “शानदार” संबंधों का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत पर लगाए गए उच्च टैरिफ के बावजूद मोदी ने उनसे सम्मानजनक लहजे में बातचीत की और भारत की ओर से समझौता करने की इच्छा जताई। (Donald Trump) ट्रंप ने यहां तक कहा कि मोदी ने उनसे पूछा, “सर, क्या मैं आ सकता हूं?” उनके इस बयान का उद्देश्य अमेरिकी घरेलू राजनीति में अपनी ताकत और प्रभाव को दिखाना था।
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लेकिन तीन दिन बाद, 9 जनवरी को अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में ट्रंप के दावे की पोल खोल दी। (Donald Trump) लुटनिक ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापारिक समझौता लगभग तय हो गया था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप को कॉल नहीं किया। लुटनिक के अनुसार, “सब कुछ तैयार था, लेकिन सौदे को अंतिम रूप देने के लिए मोदी को फोन करना आवश्यक था। भारतीय पक्ष इसके लिए असहज था, इसलिए कॉल नहीं की गई।”
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लुटनिक ने यह भी कहा कि भारत की यह चूक अमेरिका को इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों के साथ डील करने के लिए मजबूर कर रही है।
अमेरिका की विदेश नीति में विरोधाभास
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप व्यक्तिगत संबंधों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं ताकि वह अमेरिकी जनता के सामने ‘स्ट्रॉन्ग लीडर’ दिखें, जबकि उनके अधिकारी व्यावहारिक व्यापारिक भाषा में बोलते हैं। (Donald Trump) लुटनिक का बयान स्पष्ट करता है कि ट्रंप प्रशासन ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की नीति पर काम कर रहा है। अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी ओर से पहल करे और डील को ‘क्लोज़र कॉल’ के रूप में स्वीकार करे।
हालांकि भारत ने अपनी शर्तों पर समझौता करने की ही नीति अपनाई है। (Donald Trump) सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत किसी भी दबाव में डील साइन नहीं करेगा, विशेषकर तब जब अमेरिका उसे रूस के साथ संबंधों को लेकर धमका रहा हो।
भारत का रणनीतिक रुख
इन विरोधाभासी बयानों और नीतियों ने भारत को सतर्क कर दिया है। ट्रंप पीएम मोदी को ‘ग्रेट फ्रेंड’ बताने के बावजूद, उनकी नीतियां भारतीय निर्यात को चुनौती दे रही हैं। (Donald Trump) इसी बीच, भारत रूस से सस्ते तेल की खरीद पर अड़ा हुआ है और अमेरिका के दबाव के बीच चीन के साथ सीमा विवाद सुलझाने और व्यापारिक रिश्तों को संतुलित करने की दिशा में भी कूटनीतिक हलचल तेज कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत अपने व्यापारिक और भू-राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका, रूस और चीन के साथ संतुलित कूटनीति अपनाएगा।
