Delhi volcanic ash cloud: इथियोपिया के हायली गुब्बी ज्वालामुखी में रविवार को हुए महाविस्फोट का सीधा और भयानक असर अब भारत की राजधानी दिल्ली पर दिखाई दे रहा है! धरती से हजारों फीट ऊपर, 130 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ़्तार से लाल सागर पार करके आया ज्वालामुखी की राख का विशाल गुबार, सोमवार रात करीब 11 बजे दिल्ली पहुँच गया। मौसम विशेषज्ञ पिछले एक दिन से इस ‘राख के बादल’ पर लगातार नज़र बनाए हुए थे, जो सबसे पहले पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और जैसलमेर के ऊपर से भारत में दाखिल हुआ। (Delhi volcanic ash cloud) धीरे-धीरे, यह राख बादल दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के एक बड़े हिस्से में फ़ैल चुका है, जिसने मौसम और हवाई सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं।
Delhi volcanic ash cloud: आसमान में ज़हरीला ‘स्मॉग’ और ‘गंभीर’ AQI का हमला
सोमवार और मंगलवार की सुबह के विज़ुअल्स बेहद डरावने थे। राजधानी दिल्ली के आनंद विहार इलाके में पूरे क्षेत्र पर एक जहरीला स्मॉग छाया हुआ दिखाई दिया। हवा में धुंध की मोटी परत है और दृश्यता (Visibility) भी काफी कम हो गई है। (Delhi volcanic ash cloud) केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, आनंद विहार का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 402 तक रिकॉर्ड किया गया, जो ‘सीवियर’ यानी ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इस स्तर पर हवा बेहद ख़तरनाक मानी जाती है और साँस लेने से स्वास्थ्य पर तुरंत असर पड़ सकता है।
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एम्स और सफदरजंग अस्पताल के आसपास भी घना जहरीला स्मॉग दिखाई दिया, जहाँ AQI 323 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत ख़राब’ श्रेणी में आता है। हवा में जलन साफ़ महसूस हो रही है, जिससे बुज़ुर्गों, बच्चों और अस्थमा के मरीजों को सबसे ज़्यादा खतरा है। अमेरिका की मौसम वेबसाइट एक्यूवेदर के अनुसार भी, दिल्ली और आस-पास के ज्यादातर क्षेत्रों में सुबह 6 बजे AQI 300 के करीब रहा। (Delhi volcanic ash cloud) हालांकि कुछ मौसम विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि यह राख बादल जमीन से 25,000 से 45,000 फीट की ऊंचाई पर है, इसलिए सतह पर AQI पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अदृश्य खतरा मंडरा रहा है, जिससे सावधानी बेहद ज़रूरी है।
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उड़ानों पर संकट: DGCA ने जारी की हाई-अलर्ट एडवाइजरी
इथियोपिया के ज्वालामुखी से निकली राख का सबसे बड़ा असर हवाई यातायात पर पड़ा है। यह राख का बादल, जो ज्यादातर सल्फर डाइऑक्साइड से बना है, विमानों के इंजन और उड़ान सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। (Delhi volcanic ash cloud) इसी वजह से डीजीसीए (DGCA) ने सभी एयरलाइंस को तत्काल हाई-अलर्ट एडवाइजरी जारी कर दी है।
डीजीसीए ने निर्देश दिया है कि एयरलाइंस उन ऊंचाइयों और क्षेत्रों से उड़ानें न गुज़ारें जहाँ ज्वालामुखी की राख फैली हुई है। अकासा एयर, इंडिगो और KLM जैसी बड़ी एयरलाइनों ने सोमवार को अपनी कुछ उड़ानें रद्द कर दीं या उनके रूट बदल दिए। एयर इंडिया और अकासा एयर जैसी कंपनियों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताया कि वे हालात पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं और रूट बदलने की प्रक्रिया अपना रहे हैं। (Delhi volcanic ash cloud) एयरलाइनों से कहा गया है कि वे राख प्रभावित इलाकों से दूर रहें, उड़ान मार्ग बदलें और इंजन में किसी भी असामान्य प्रदर्शन की तुरंत रिपोर्ट करें। इसके अलावा, पोस्ट-फ्लाइट जांच भी अनिवार्य की गई है, ताकि राख के कणों से हुए संभावित नुकसान का पता लगाया जा सके।
कल का सूरज होगा ‘चमकीला’: मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान
विशेषज्ञों ने बताया है कि यह राख बादल वायुमंडल के मिड-लेवल में है। इंडिया मेटस्काई मौसम के अनुसार, यह राख का बादल अब ओमान-अरब सागर के रास्ते उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों तक फैल गया है। (Delhi volcanic ash cloud) हालांकि सतह पर हवा की गुणवत्ता पर कोई बुरा असर नहीं होगा, लेकिन नेपाल, हिमालयी क्षेत्र और यूपी के तराई इलाकों में सल्फर डाइऑक्साइड का स्तर थोड़ा बढ़ सकता है।
मौसम विभाग का एक दिलचस्प अनुमान यह भी है कि मंगलवार की सुबह का सूरज अलग और चमकीले रंग में दिखाई दे सकता है, क्योंकि हवा में मौजूद राख के सूक्ष्म कणों की वजह से सूर्य की रोशनी में ऐसा बदलाव आएगा। (Delhi volcanic ash cloud) वहीं, इथियोपिया में स्थानीय समुदाय पर भी इस विस्फोट का बड़ा असर पड़ा है, जहाँ कई गाँव राख की मोटी परत से ढक गए हैं, जिससे खेती और पशुपालन पर गंभीर जोखिम उत्पन्न हो गया है। दिल्ली और उत्तर भारत पर मंडरा रहा यह प्राकृतिक खतरा फिलहाल हवाई सुरक्षा और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।
