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Reading: Balochistan, CPEC Project: पाकिस्तान में अरबों डॉलर के CPEC प्रोजेक्ट को लेकर क्यों बढ़ी China की टेंशन? जानिए पूरी कहानी
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Balochistan, CPEC Project: पाकिस्तान में अरबों डॉलर के CPEC प्रोजेक्ट को लेकर क्यों बढ़ी China की टेंशन? जानिए पूरी कहानी

Puja Shrivastava
Last updated: 2026/07/21 at 2:43 अपराह्न
Puja Shrivastava
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6 Min Read
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Balochistan, CPEC Project: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बढ़ती हिंसा और अलगाववादी गतिविधियों ने चीन की अरबों डॉलर की परियोजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल के दिनों में बलूच अलगाववादी समूहों द्वारा स्वतंत्रता की मांग तेज होने और सुरक्षा हालात बिगड़ने के बीच चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) और ग्वादर बंदरगाह जैसे रणनीतिक प्रोजेक्ट दबाव में आ गए हैं।

Contents
Balochistan, CPEC Project: ग्वादर पोर्ट का सपना पड़ रहा फीकाCPEC के सामने बढ़ती सुरक्षा चुनौतीचीनी खदान ने दिया संचालन बंद करने का संकेतलगातार बढ़ रही हिंसाचीन भी बढ़ा रहा दबावभारत के लिए क्या मायने हैं?

बलूचिस्तान लंबे समय से चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है, लेकिन लगातार आतंकी हमलों, अलगाववादी गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय दबाव ने इस महत्वाकांक्षी योजना को चुनौती देना शुरू कर दिया है।

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Balochistan, CPEC Project: ग्वादर पोर्ट का सपना पड़ रहा फीका

चीन ने ग्वादर बंदरगाह को अरब सागर तक सीधी पहुंच और वैश्विक व्यापार का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना बनाई थी। लेकिन आज भी ग्वादर अपेक्षित कारोबारी गतिविधियां हासिल नहीं कर सका है।

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कम कार्गो ट्रैफिक, कमजोर सड़क और रेल संपर्क, ऊंची परिचालन लागत, सुरक्षा जोखिम और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की सीमित रुचि के कारण ग्वादर अपनी आर्थिक क्षमता साबित नहीं कर पाया है। लगातार बढ़ती हिंसा ने हालात को और मुश्किल बना दिया है।

CPEC के सामने बढ़ती सुरक्षा चुनौती

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की सफलता सुरक्षित परिवहन मार्गों, स्थानीय समुदायों के सहयोग और स्थिर सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर थी। लेकिन बलूचिस्तान में बढ़ते हमलों ने इन तीनों स्तंभों को कमजोर कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हिंसा जारी रही तो चीन नए प्रोजेक्ट शुरू करने के बजाय मौजूदा निवेश की सुरक्षा, अतिरिक्त सुरक्षा ढांचे और जोखिम प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान देगा।

चीनी खदान ने दिया संचालन बंद करने का संकेत

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की सबसे बड़ी सक्रिय तांबा और सोना खदान **साइंदक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट (Saindak Copper-Gold Project) ने सुरक्षा हालात बिगड़ने पर परिचालन बंद करने की चेतावनी दी है।

29 जून को पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय को भेजे गए पत्र में परियोजना संचालित करने वाली कंपनी साइंदक मेटल्स लिमिटेड ने कहा कि लगातार हमलों के कारण आवश्यक सामान की ढुलाई बाधित हो रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो उत्पादन सामग्री की कमी के चलते अगले एक महीने में संचालन रोकना पड़ सकता है।

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पत्र में यह भी कहा गया कि सड़क मार्गों पर उग्रवादी हमलों के कारण माल ढुलाई बेहद जोखिमपूर्ण हो गई है।

चीन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बलूचिस्तान?
बलूचिस्तान खनिज संपदा, विशेषकर तांबा, सोना और दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) से समृद्ध क्षेत्र है। चीन ने यहां अरबों डॉलर का निवेश किया है ताकि ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत कर सके।

इसी क्षेत्र में स्थित रेक़ो डिक (Reko Diq) जैसी बहु-अरब डॉलर की परियोजनाएं भी सुरक्षा चिंताओं से प्रभावित बताई जा रही हैं।

लगातार बढ़ रही हिंसा

हाल के महीनों में बलूचिस्तान में हिंसा में तेज वृद्धि हुई है।
मई में क्वेटा के पास रेलवे ट्रैक के निकट विस्फोट में 20 से अधिक लोगों की मौत हुई।
जनवरी में समन्वित आतंकी हमलों में दर्जनों लोगों की जान गई।
पाकिस्तान सेना के अनुसार केवल एक सप्ताह में 42 लोगों की मौत उग्रवादी हमलों में हुई।
हालांकि पाकिस्तान सरकार का दावा है कि वह विदेशी निवेशकों को “फूलप्रूफ सुरक्षा” देने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन हालात इसके विपरीत दिखाई दे रहे हैं।

चीन भी बढ़ा रहा दबाव

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में अलग-अलग हमलों में एक दर्जन से अधिक चीनी नागरिक मारे जा चुके हैं। इसके बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत शीर्ष नेतृत्व कई बार पाकिस्तान से चीनी नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा मजबूत करने की मांग कर चुका है।

यदि सुरक्षा हालात नहीं सुधरते हैं तो चीन निवेश पूरी तरह वापस नहीं लेगा, लेकिन नई परियोजनाओं की गति धीमी हो सकती है और सुरक्षा खर्च काफी बढ़ सकता है।

भारत के लिए क्या मायने हैं?

बलूचिस्तान की मौजूदा स्थिति भारत के लिए कई रणनीतिक अवसर और संकेत लेकर आती है। तेलनिर्यात समाचार

पहला, CPEC को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के मॉडल के रूप में पेश करने वाले चीन और पाकिस्तान के दावे कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं।

दूसरा, पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा हिस्सा आंतरिक सुरक्षा में व्यस्त रहेगा, जिससे उसकी रणनीतिक प्राथमिकताएं प्रभावित हो सकती हैं।

तीसरा, हिंद महासागर और अरब सागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है, जहां भारत पहले से ही वैकल्पिक कनेक्टिविटी और समुद्री सुरक्षा पर जोर दे रहा है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अपने निवेश पूरी तरह नहीं छोड़ेगा, लेकिन बढ़ती हिंसा के कारण CPEC की लागत, सुरक्षा व्यवस्था और परियोजनाओं की समयसीमा पर लगातार दबाव बना रहेगा।

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