Bangladesh News: बांग्लादेश की राजधानी ढाका स्थित जगन्नाथ यूनिवर्सिटी में मंदिर के पास बीफ खिचड़ी बनाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक संवेदनशीलता, कैंपस के नियमों और छात्रों के कार्यक्रम आयोजित करने के अधिकार तक पहुंच गया है। इस विवाद के बीच इस्लामिक हिस्ट्री विभाग के छात्रों के एक समूह ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को कैंपस में गाय काटने और बीफ भोज आयोजित करने की घोषणा की है। यह कार्यक्रम दुर्गा पूजा के महाषष्ठी के दिन प्रस्तावित है। घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनाव और छात्रों के विरोध को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मंदिर के पास बीफ खिचड़ी बनाने से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत सोमवार, 12 अक्टूबर को हुई, जब इस्लामिक हिस्ट्री एंड कल्चर विभाग के छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुक्तमंच के पास बीफ खिचड़ी बनाने का आयोजन किया। यह स्थान कैंपस के केंद्रीय मंदिर के नजदीक है। हिंदू छात्रों ने आयोजन की जगह पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
जगन्नाथ यूनिवर्सिटी सेंट्रल टेंपल मैनेजमेंट कमेटी के सदस्य सचिव जॉय साहा के मुताबिक, मंदिर के पास बीफ पकाए जाने की जानकारी मिलने के बाद आयोजनकर्ताओं से बातचीत की गई और उन्हें जगह बदलने के लिए कहा गया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस भी हुई। बाद में प्रोफेसर मोहम्मद आजम खान के हस्तक्षेप पर एक असिस्टेंट प्रॉक्टर को स्थिति संभालने के लिए भेजा गया और भोज का आयोजन मंदिर से कुछ दूरी पर किया गया।
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आयोजकों ने स्पष्ट किया कि उनका किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था।
मंदिर की ईंटों से चूल्हा बनाने के आरोप पर भी विवाद
मामले में उस समय नया मोड़ आया, जब आरोप लगा कि बीफ खिचड़ी बनाने के लिए मंदिर की ईंटों का इस्तेमाल कर अस्थायी चूल्हा बनाया गया था। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों ने शुरुआत में विश्वविद्यालय की कैंटीन में खिचड़ी बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन गैस का दबाव कम होने के कारण उन्होंने बाहर खाना बनाने का फैसला किया।
आयोजकों का कहना था कि चूल्हा बनाने के लिए उन्होंने पास में पड़ी ईंटों का इस्तेमाल किया था और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि वे मंदिर की हैं। बाद में ईंटें हटा दी गईं, कैंटीन से लोहे का चूल्हा लाया गया और गलतफहमी के लिए माफी मांगी गई।
हालांकि, मंदिर प्रबंधन की मुख्य चिंता आयोजन स्थल को लेकर थी। इसके बाद हिंदू छात्रों ने प्रदर्शन और मानव श्रृंखला बनाकर निष्पक्ष जांच तथा कैंपस के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
यूनिवर्सिटी के दो नोटिस से बढ़ी बहस
12 अक्टूबर की घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 14 अक्टूबर को पहला नोटिस जारी किया। इसमें छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों से परिसर में जानवरों की बलि नहीं देने को कहा गया। प्रशासन ने स्वच्छता और सार्वजनिक नियमों का हवाला देते हुए ढाका साउथ सिटी कॉरपोरेशन की सूचना का भी उल्लेख किया।
बांग्लादेश के एनिमल स्लॉटर एंड मीट क्वालिटी कंट्रोल एक्ट, 2011 के तहत निर्धारित बूचड़खानों के बाहर जानवर काटने पर कानूनी प्रतिबंधों का प्रावधान है। हालांकि, विश्वविद्यालय परिसर में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर छात्रों के बीच इस नोटिस की व्याख्या और उनके अधिकारों पर बहस शुरू हो गई।
कुछ छात्रों ने इसे बीफ भोज आयोजित करने के अधिकार पर रोक के रूप में देखा। प्रोफेसर आजम खान के अनुसार, प्रशासन को जानवर काटे जाने की योजना की जानकारी मिली थी और धार्मिक आयोजनों के दौरान तनाव बढ़ने से रोकने के उद्देश्य से नोटिस जारी किया गया था।
बाद में विश्वविद्यालय ने दूसरा नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट की। प्रशासन ने कहा कि पहले की घटना को बातचीत और प्रॉक्टर के हस्तक्षेप से सुलझा लिया गया था। साथ ही, पहले नोटिस से पैदा हुई गलतफहमी के लिए माफी मांगते हुए कहा कि छात्रों को कैंपस में कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार है। हालांकि, किसी भी समूह की गतिविधि से दूसरे समूह को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
विरोध में 16 अक्टूबर को बीफ भोज आयोजित करने की तैयारी
प्रशासन के स्पष्टीकरण के बावजूद विवाद थमा नहीं है। छात्रों के एक समूह ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को बीफ भोज आयोजित करने का ऐलान किया है। इसे प्रशासन के शुरुआती नोटिस के विरोध के तौर पर देखा जा रहा है।
बीबीसी बांग्ला के मुताबिक, आयोजन समिति के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि छात्रों ने पहले कार्यक्रम दुर्गा पूजा के बाद आयोजित करने पर विचार किया था। लेकिन प्रशासन के नोटिस के बाद उन्हें लगा कि उनके अधिकारों पर रोक लगाई जा रही है।
आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम मंदिर के पास करने के बजाय आर्ट्स बिल्डिंग के नजदीक खुले मैदान में आयोजित किए जाने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों ने चंदा जुटाकर एक गाय खरीदी है। बांग्लादेश इस्लामिस्ट छात्र मजलिस ने भी एक और गाय उपलब्ध कराने की पेशकश की है। सोशल मीडिया पर लोगों को 70 टका में रजिस्ट्रेशन कर कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है।
मंदिर समिति ने रखी ये शर्तें
जगन्नाथ यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव अब्दुल अलीम आरिफ ने बताया कि छात्र प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय अधिकारियों से मुलाकात की और कार्यक्रम को लेकर सहमति बनी है।
वहीं, प्रॉक्टर आजम खान ने कहा कि यदि गाय काटी जाती है, तो यह काम संयमित तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर दोबारा विवाद पैदा न हो।
मंदिर समिति के सदस्य सचिव जॉय साहा ने भी कहा कि मंदिर से दूर किसी दूसरी जगह पर गाय काटे जाने को लेकर समिति को आपत्ति नहीं है, बशर्ते इससे मंदिर की गतिविधियों में बाधा न आए और मंदिर के सामने ऐसा आयोजन न किया जाए।
फिलहाल जगन्नाथ यूनिवर्सिटी का यह मामला धार्मिक आस्था, कैंपस में सह-अस्तित्व और छात्रों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बन गया है। शुक्रवार को प्रस्तावित कार्यक्रम किस तरह संपन्न होता है और प्रशासन व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है, इस पर सबकी नजर है।
