Siberia Plague Death: रूस के साइबेरिया में प्लेग से 27 वर्षीय महिला प्रयोगशाला कर्मचारी की मौत के बाद स्वास्थ्य महकमे में सतर्कता बढ़ा दी गई है। महिला के संपर्क में आए करीब 200 लोगों को चिकित्सा निगरानी में रखा गया है। इनमें डॉक्टर, अस्पताल कर्मचारी और अन्य करीबी संपर्क शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में 12 लोगों को विशेष निगरानी के लिए एंटी-प्लेग संस्थान भेजे जाने और उनमें से कुछ में बीमारी जैसे लक्षण दिखाई देने की बात कही गई है। हालांकि, फिलहाल इन संपर्कों में प्लेग संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। रूस के संबंधित क्षेत्रों में अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
यह मामला इसलिए अधिक गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि मृत महिला इरकुत्स्क स्थित उस विशेष संस्थान से जुड़ी थी, जहां प्लेग और दूसरे खतरनाक संक्रामक रोगों की निगरानी और जांच की जाती है। रूसी मीडिया में महिला की पहचान 27 वर्षीय डारिया के रूप में की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, वह इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थी।
बताया गया है कि 29 सितंबर को गंभीर निमोनिया जैसे लक्षण दिखाई देने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसकी हालत तेजी से बिगड़ गई और उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। बाद में उसकी मौत हो गई। बुरियाटिया गणराज्य के प्रमुख एलेक्सी त्सिदेनोव ने महिला की मृत्यु प्लेग से होने की जानकारी सार्वजनिक की। इसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने उन सभी लोगों की पहचान और निगरानी शुरू की, जो बीमारी के दौरान या उससे पहले महिला के निकट संपर्क में आए थे।
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Siberia Plague Death: न्यूमोनिक प्लेग की आशंका ने बढ़ाई चिंता
इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि महिला को प्लेग का कौन-सा रूप हुआ था। कुछ रूसी मीडिया रिपोर्टों में न्यूमोनिक प्लेग की आशंका जताई गई है। यदि इसकी आधिकारिक पुष्टि होती है तो संपर्क में आए लोगों की निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। न्यूमोनिक प्लेग फेफड़ों को प्रभावित करता है और कुछ परिस्थितियों में संक्रमित व्यक्ति की सांस से निकलने वाली बूंदों के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, प्लेग Yersinia pestis नामक जीवाणु से होने वाला संक्रामक रोग है। यह जीवाणु प्राकृतिक रूप से कुछ छोटे स्तनधारियों, विशेषकर जंगली कृंतकों और उनके पिस्सुओं में पाया जाता है। मनुष्यों में प्लेग मुख्य रूप से संक्रमित पिस्सू के काटने, संक्रमित जानवर के ऊतकों के संपर्क या न्यूमोनिक प्लेग की स्थिति में संक्रमित व्यक्ति की श्वसन बूंदों के निकट संपर्क से फैल सकता है।
प्लेग के तीन प्रमुख रूप, हर एक के लक्षण अलग
प्लेग का नाम सुनते ही अक्सर मध्यकालीन महामारियों की तस्वीर सामने आती है, लेकिन इस बीमारी के अलग-अलग रूप और उनके फैलने के तरीके समझना जरूरी है। इसके तीन प्रमुख रूप हैं—ब्यूबोनिक, सेप्टीसीमिक और न्यूमोनिक प्लेग।
ब्यूबोनिक प्लेग: यह प्लेग का सबसे सामान्य रूप है। इसमें जीवाणु लसीका तंत्र को प्रभावित करता है। गर्दन, बगल या जांघ के आसपास की लसीका ग्रंथियों में दर्दनाक सूजन हो सकती है, जिसे ‘ब्यूबो’ कहा जाता है। संक्रमित पिस्सू के काटने से इस प्रकार का प्लेग हो सकता है।
सेप्टीसीमिक प्लेग: इस रूप में संक्रमण रक्त में फैल जाता है। यह तेजी से गंभीर हो सकता है और समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है।
न्यूमोनिक प्लेग: इसमें संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच जाता है। इसे प्लेग का सबसे चिंताजनक रूप माना जाता है, क्योंकि प्राथमिक न्यूमोनिक प्लेग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में निकट संपर्क और संक्रमित श्वसन बूंदों के माध्यम से फैल सकता है।
इसी वजह से साइबेरिया के मामले में महिला के अस्पताल पहुंचने से पहले और इलाज के दौरान उसके निकट संपर्क में आए लोगों की पहचान महत्वपूर्ण हो जाती है। डॉक्टर, नर्स, एंबुलेंस कर्मचारी, परिवार के सदस्य और दूसरे करीबी संपर्क स्वास्थ्य अधिकारियों की जांच और निगरानी के दायरे में आ सकते हैं।
क्या लैब में टेस्ट ट्यूब टूटने से संक्रमित हुई महिला?
इस घटना का सबसे सनसनीखेज दावा प्रयोगशाला में टेस्ट ट्यूब टूटने से जुड़ा है, लेकिन अभी इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। (Siberia Plague Death) कुछ रूसी टेलीग्राम चैनलों और मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि महिला ने अस्पताल के कर्मचारियों को बताया था कि नमूना एकत्र करने या प्रयोगशाला में काम करने के दौरान जीवित प्लेग जीवाणु वाली टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। इसी दावे के आधार पर महिला के संक्रमण को संभावित प्रयोगशाला दुर्घटना से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में अभी यह निर्णायक रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि महिला को संक्रमण प्रयोगशाला में हुई किसी दुर्घटना के कारण ही हुआ। इसलिए यह कहना कि टेस्ट ट्यूब टूटने से महिला संक्रमित हुई थी, फिलहाल जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने तक प्रयोगशाला दुर्घटना को संक्रमण का एक अपुष्ट संभावित कारण ही माना जाना चाहिए।
इस मामले में दूसरी संभावना भी सामने आई है। महिला के बुरियाटिया क्षेत्र की यात्रा से लौटने और वहां प्राकृतिक प्लेग प्रभावित क्षेत्रों से संभावित संपर्क की चर्चा हुई है। साइबेरिया, मंगोलिया और आसपास के विशाल भूभाग में जंगली कृंतकों के बीच Yersinia pestis के प्राकृतिक भंडार मौजूद हैं। ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए यह पता लगाना जरूरी है कि महिला को संक्रमण व्यावसायिक संपर्क से हुआ, किसी प्राकृतिक स्रोत से या फिर किसी दूसरी परिस्थिति में।
मंगोलिया सीमा के आसपास क्यों मौजूद हैं प्लेग के प्राकृतिक केंद्र?
आधुनिक दुनिया में प्लेग पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कई क्षेत्रों में इसका जीवाणु वन्यजीवों के बीच प्राकृतिक रूप से मौजूद है। मध्य एशिया और मंगोलिया में मर्मोट जैसे जंगली कृंतक इसके प्राकृतिक चक्र का हिस्सा हो सकते हैं। (Siberia Plague Death) संक्रमित जानवरों का शिकार करना, उनका मांस काटना या संक्रमित पिस्सुओं के संपर्क में आना मनुष्यों तक बीमारी पहुंचने का रास्ता बन सकता है।
मंगोलिया में समय-समय पर मर्मोट से जुड़े प्लेग के मामले सामने आते रहे हैं। इसी वजह से वहां प्राकृतिक प्लेग केंद्रों की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। मंगोलियाई स्वास्थ्य संस्थानों ने देश में बड़ी संख्या में प्राकृतिक प्लेग क्षेत्रों की पहचान कर रखी है। रूस के साइबेरियाई क्षेत्रों में भी इसी कारण प्लेग निगरानी संस्थानों की आवश्यकता बनी हुई है।
करीब 200 लोग निगरानी में, लेकिन सभी संक्रमित नहीं
इस खबर का एक महत्वपूर्ण पहलू करीब 200 लोगों को निगरानी में रखे जाने से जुड़ा है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी लोगों को प्लेग हो गया है। संक्रामक रोग नियंत्रण में किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों की पहचान करना एक एहतियाती प्रक्रिया है।
यदि किसी व्यक्ति को संभावित न्यूमोनिक प्लेग हुआ हो तो स्वास्थ्य विभाग यह पता लगाता है कि उसके लक्षण शुरू होने के आसपास कौन-कौन उसके निकट संपर्क में आया था। ऐसे लोगों की स्वास्थ्य निगरानी की जाती है। उनका तापमान और संभावित लक्षण देखे जाते हैं तथा जरूरत के अनुसार जांच और बचाव के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जा सकती हैं।
रूसी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, महिला के करीब 200 संपर्कों की पहचान की गई है। इनमें स्वास्थ्यकर्मी और अन्य लोग शामिल हैं। करीब 12 लोगों को विशेष निगरानी के लिए एंटी-प्लेग संस्थान भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। (Siberia Plague Death) कुछ संपर्कों में बीमारी जैसे लक्षण बताए गए हैं, लेकिन लक्षण दिखाई देना और प्रयोगशाला जांच में प्लेग संक्रमण की पुष्टि होना दो अलग-अलग बातें हैं। बुखार, कमजोरी, खांसी या सांस लेने में परेशानी कई अन्य संक्रमणों में भी हो सकती है।
WHO के अनुसार, न्यूमोनिक प्लेग के निकट संपर्क में आए लोगों के लिए तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन और जरूरत के अनुसार एंटीबायोटिक बचाव उपचार महत्वपूर्ण हो सकता है।
प्लेग के लक्षण कितने समय में दिखाई देते हैं?
WHO के मुताबिक, प्लेग से संक्रमित व्यक्ति में सामान्यतः एक से सात दिनों के भीतर लक्षण विकसित हो सकते हैं। हालांकि, लक्षण बीमारी के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
ब्यूबोनिक प्लेग में अचानक बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, कमजोरी और दर्द के साथ लसीका ग्रंथियों में सूजन प्रमुख संकेत हो सकते हैं। वहीं, न्यूमोनिक प्लेग में बुखार के साथ खांसी, सांस लेने में कठिनाई और तेजी से बढ़ने वाला निमोनिया हो सकता है। यह बीमारी कम समय में गंभीर रूप ले सकती है।
इसी वजह से संपर्क में आए लोगों की शुरुआती निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है। न्यूमोनिक प्लेग जैसी बीमारी में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद संपर्कों की तलाश शुरू करने के बजाय संभावित संपर्कों की जल्द पहचान और निगरानी करना जरूरी होता है।
क्या आज भी प्लेग उतना ही घातक है जितना सदियों पहले था?
प्लेग आज भी गंभीर बीमारी है और समय पर उपचार नहीं मिलने पर जानलेवा हो सकता है। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में यह एंटीबायोटिक से उपचार योग्य जीवाणु संक्रमण है। बीमारी की पहचान में देरी, खासकर न्यूमोनिक प्लेग के मामले में, स्थिति को गंभीर बना सकती है।
WHO के अनुसार, समय पर पहचान और उचित एंटीबायोटिक उपचार मरीज की जान बचाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए प्लेग का एक मामला अपने आप मध्यकाल जैसी महामारी का संकेत नहीं है। आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में निगरानी, संपर्कों की पहचान, प्रयोगशाला जांच और एंटीबायोटिक उपचार के जरिए बीमारी के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है।
‘ब्लैक डेथ’ से तीसरी प्लेग महामारी तक का इतिहास
मानव इतिहास में प्लेग ने कई विनाशकारी महामारियों को जन्म दिया है। चौदहवीं शताब्दी की ‘ब्लैक डेथ’ इसका सबसे कुख्यात उदाहरण है। इस महामारी में यूरोप की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा मारा गया था।
इसके अलावा, 1855 से शुरू हुई तीसरी प्लेग महामारी भारत के इतिहास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण रही। इसकी शुरुआत चीन के युन्नान क्षेत्र से मानी जाती है। बाद में समुद्री व्यापार मार्गों के जरिए यह दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंची।
1896 में बॉम्बे यानी आज के मुंबई में प्लेग फैलने के बाद भारत में इस महामारी ने भयावह रूप ले लिया। अगले दशकों में देश में लाखों लोगों की मौत हुई। ऐतिहासिक स्रोतों में कुल मौतों के आंकड़े अलग-अलग मिलते हैं, इसलिए तीसरी महामारी में दुनिया भर में हुई मौतों की संख्या को एक निश्चित आंकड़े के रूप में बताना सावधानीपूर्ण नहीं होगा। हालांकि, इतना स्पष्ट है कि इस महामारी में भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल था। भारत और चीन में मिलाकर एक करोड़ से अधिक मौतों के अनुमान व्यापक रूप से उद्धृत किए जाते हैं।
इसी तीसरी महामारी के दौरान 1894 में हांगकांग में प्लेग फैलने के समय वैज्ञानिक अलेक्जेंडर यर्सिन ने उस जीवाणु की पहचान की, जो इस बीमारी का कारण था। बाद में उन्हीं के नाम पर इस जीवाणु को Yersinia pestis कहा गया। इस खोज ने प्लेग को एक रहस्यमय महामारी के बजाय पहचाने जा सकने वाले जीवाणु संक्रमण के रूप में समझने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रूस में प्लेग के मामले दुर्लभ, लेकिन प्राकृतिक केंद्र अब भी मौजूद
रूस में आधुनिक समय में मनुष्यों में प्लेग के मामले बेहद दुर्लभ हैं। हालांकि, साइबेरिया और आसपास के क्षेत्रों में प्राकृतिक प्लेग केंद्र मौजूद होने के कारण वन्यजीवों और संभावित मानव संक्रमण की निगरानी जारी रहती है।
वर्ष 2016 में रूस में एक बच्चे के प्लेग से संक्रमित होने का मामला सामने आया था। बताया गया था कि उसका संबंध मर्मोट के संपर्क से था। उपचार के बाद बच्चा ठीक हो गया था।
यही वजह है कि रूस में एंटी-प्लेग संस्थान जैसे विशेष संस्थान आज भी काम कर रहे हैं। इन संस्थानों का होना इस बात का संकेत नहीं है कि वहां लगातार मनुष्यों में प्लेग फैल रहा है, बल्कि इसका उद्देश्य प्राकृतिक वन्यजीव चक्र में मौजूद Yersinia pestis की निगरानी करना और समय-समय पर पैदा होने वाले मानव संक्रमण के खतरे से निपटना है।
क्या इस घटना से दुनिया को महामारी का खतरा है?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर दुनिया में किसी नई प्लेग महामारी का खतरा घोषित करने का आधार नहीं है। एक व्यक्ति की मौत और उसके संपर्कों की निगरानी को महामारी की शुरुआत नहीं माना जा सकता। हालांकि, यह गंभीर घटना जरूर है, खासकर इसलिए कि मृत महिला प्लेग अनुसंधान से जुड़े संस्थान में काम करती थी और उसके मामले में न्यूमोनिक प्लेग की आशंका जताई गई है।
यदि संपर्क में आए लोगों में संक्रमण की पुष्टि होती है तो सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। फिलहाल तीन सवाल सबसे महत्वपूर्ण हैं—महिला को वास्तव में प्लेग का कौन-सा रूप हुआ था, संक्रमण का स्रोत क्या था और उसके संपर्क में आए लोगों में किसी अन्य व्यक्ति में Yersinia pestis की पुष्टि होती है या नहीं। इन सवालों के जवाब मिलने से पहले इसे नया प्लेग प्रकोप या प्रयोगशाला से संक्रमण फैलने की घटना कहना जल्दबाजी होगी।
इस पूरे मामले का सबसे अहम संदेश डर नहीं, बल्कि समय पर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्रवाई है। प्लेग वह बीमारी है जिसने इतिहास में करोड़ों लोगों की जान ली, लेकिन आज चिकित्सा विज्ञान के पास इसकी पहचान, संपर्कों की निगरानी और एंटीबायोटिक उपचार के प्रभावी साधन मौजूद हैं। साइबेरिया में 27 वर्षीय महिला की मौत गंभीर घटना है और करीब 200 लोगों को निगरानी में रखा जाना बताता है कि रूसी स्वास्थ्य तंत्र इसे गंभीरता से ले रहा है।
हालांकि, जांच पूरी होने तक प्रयोगशाला में टेस्ट ट्यूब टूटने को संक्रमण का निश्चित कारण मानना या निगरानी में रखे गए सभी लोगों को संक्रमित समझना सही नहीं होगा।
