Amarnath Yatra: अमरनाथ यात्रा के शुरुआती पांच दिनों में ही बाबा बर्फानी का प्राकृतिक हिमलिंग 90 प्रतिशत से अधिक पिघल जाने की खबर ने करोड़ों श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। ऐसा लगा मानो असीमित संख्या में पहुँच रहे भक्तों को देख बाबा बर्फानी सहम गए हों। 3 जुलाई से 7 जुलाई के बीच पवित्र गुफा में स्थित प्राकृतिक हिमलिंग तेजी से छोटा होता गया और अब उसका अधिकांश हिस्सा पिघल चुका है। हालांकि, इसके बावजूद अमरनाथ यात्रा पूरी तरह सामान्य रूप से जारी है और श्रद्धालुओं के दर्शन पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है।
Amarnath Yatra: भारी भीड़ और बढ़ते तापमान का दिखा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार यात्रा के शुरुआती दिनों में ही गुफा में क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं की आवाजाही हुई। हजारों लोगों की मौजूदगी से उत्पन्न शरीर की गर्मी (Human Heat) ने गुफा के भीतर के तापमान को प्रभावित किया, जिससे प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग तेजी से पिघलने लगा।
पर्यावरणविदों का यह भी कहना है कि इस वर्ष जुलाई के शुरुआती दिनों में सामान्य से अधिक तापमान और ग्लोबल वार्मिंग का असर भी हिमलिंग के तेजी से पिघलने की बड़ी वजह बना है। पिछले कुछ वर्षों में भी हिमलिंग के आकार में लगातार बदलाव देखने को मिला है।
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क्या यात्रा पर पड़ेगा कोई असर?
श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक हिमलिंग का पिघलना एक स्वाभाविक और प्राकृतिक प्रक्रिया है। इससे अमरनाथ यात्रा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। श्रद्धालु पहले की तरह बाबा बर्फानी के दर्शन कर रहे हैं और गुफा में सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की जा रही हैं।
श्राइन बोर्ड के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था, दर्शन की प्रक्रिया और श्रद्धालुओं के लिए लंगर सेवाएं पहले की तरह जारी हैं। प्रशासन लगातार यात्रा मार्ग और गुफा क्षेत्र की निगरानी कर रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
हर साल बनता और पिघलता है हिमलिंग
प्राकृतिक हिमलिंग गुफा की छत से टपकने वाले पानी के जमने से बनता है। मौसम, तापमान, नमी और श्रद्धालुओं की संख्या जैसे कई प्राकृतिक और मानवीय कारक इसके आकार को प्रभावित करते हैं। (Amarnath Yatra) यही कारण है कि हर वर्ष हिमलिंग का आकार अलग-अलग होता है और यात्रा के दौरान धीरे-धीरे उसका पिघलना सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है।
हालांकि इस बार केवल पांच दिनों में ही हिमलिंग का अधिकांश हिस्सा पिघल जाना चर्चा का विषय बन गया है। (Amarnath Yatra) पर्यावरण विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान की गंभीर चेतावनी के रूप में भी देख रहे हैं।
फिलहाल अमरनाथ यात्रा पूरी तरह जारी है और देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पवित्र गुफा पहुंच रहे हैं।
