Ayodhya News: अयोध्या के सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ महंत संतराम दास का शनिवार को 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने शनिवार सुबह करीब 11 बजे अपने आश्रम में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही अयोध्या के संत समाज, श्रद्धालुओं और उनके अनुयायियों में शोक की लहर दौड़ गई। महंत संतराम दास लंबे समय से धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे और संत समाज में उनका विशेष सम्मान था। जानकारी के अनुसार वह पिछले कई महीनों से उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों से जूझ रहे थे। (Ayodhya News) करीब आठ महीने से उनका उपचार चल रहा था। हाल ही में उनका इलाज गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में हुआ था। उपचार के बाद वह तीन दिन पहले ही अयोध्या लौटे थे, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो सका।
Ayodhya News: सरयू तट पर होगा अंतिम संस्कार
महंत संतराम दास के निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम पहुंचने लगे। शनिवार शाम उनकी अंतिम यात्रा हनुमानगढ़ी से निकाली जाएगी। (Ayodhya News) इसके बाद नया घाट स्थित सरयू तट पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। संत समाज ने उनके निधन को अयोध्या की आध्यात्मिक परंपरा और हनुमानगढ़ी के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
सीएम योगी के करीबी संतों में थी गिनती
महंत संतराम दास को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी संतों में माना जाता था। मुख्यमंत्री जब भी अयोध्या प्रवास पर आते थे, तो समय निकालकर उनके आश्रम पहुंचते और उनका आशीर्वाद लेते थे। (Ayodhya News) कई अवसरों पर मुख्यमंत्री ने उन्हें गदा और रामनामा भेंट कर सम्मानित भी किया था। हनुमानगढ़ी के वर्तमान महंत राजू दास, महंत संतराम दास के प्रमुख शिष्यों में शामिल हैं। उनके मार्गदर्शन में कई संतों और शिष्यों ने धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का कार्य किया।
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श्रद्धांजलि देने का सिलसिला शुरू
महंत राजू दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने गुरुदेव के निधन की जानकारी साझा करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अस्पताल की एक तस्वीर पोस्ट कर लिखा कि पूज्य गुरुदेव महंत संतराम दास महाराज का गोलोकवास हो गया है। (Ayodhya News) साथ ही उन्होंने अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार के समय की जानकारी भी साझा की। महंत के निधन के बाद सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ आ गई। आचार्य संतोष अवस्थी सहित अनेक संतों और धार्मिक हस्तियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए इसे अवध की संत परंपरा के लिए अपूरणीय क्षति बताया। श्रद्धालुओं ने ईश्वर से दिवंगत संत की आत्मा की शांति और उनके अनुयायियों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
