US-Iran Conflict: दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां सबकी नजर सिर्फ एक जगह टिकी है और वो है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। इस अहम समुद्री रास्ते पर लगे दो-तरफा ब्लॉकेड ने कई देशों की कमर तोड़ दी है। तेल और गैस की सप्लाई ठप पड़ने से महंगाई चरम पर पहुंच गई है और हर देश इस इंतजार में है कि आखिर कब होर्मुज दोबारा खुलेगा। जिसके बाद अब जो ताजा संकेत मिल रहे हैं, उनसे लग रहा है कि ये इंतजार ज्यादा लंबा नहीं रहने वाला है।
US-Iran Conflict: ईरान-अमेरिका बातचीत में नया मोड़
हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत पहले से चल रही थी, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ रहा था। इसी बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी ईरान से सीधी बातचीत हो रही है, जो अब तक नामुमकिन मानी जा रही थी। ट्रंप के मुताबिक, अब हालात ऐसे बन गए हैं कि ईरान खुद होर्मुज को खोलने के लिए आगे आ रहा है और बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हो गया है।
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ट्रंप का दावा, ईरान की हालत खराब
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने खुद उन्हें बताया है कि उसकी स्थिति ‘पूरी तरह ढहने’ के कगार पर है। ट्रंप के अनुसार, ईरानी सरकार अपनी लीडरशिप की समस्याओं में उलझी हुई है और उसकी आर्थिक हालत लगातार गिरती जा रही है। ऐसे में ईरान अब अपनी जिद छोड़कर जल्द से जल्द होर्मुज को खोलना चाहता है। ट्रंप ने तंज कसते हुए इशारा किया कि अब फैसले की गेंद पूरी तरह अमेरिका के पाले में है।
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माइन्स पर मिली राहत भरी खबर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज को खोलने में सबसे बड़ी अड़चन समंदर में बिछाई गई बारूदी सुरंगें थीं। माना जा रहा था कि इन माइन्स को हटाने में करीब छह महीने तक का वक्त लग सकता है। लेकिन अब अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने एक राहत भरी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि जहाजों की आवाजाही शुरू करने के लिए हर एक माइन हटाना जरूरी नहीं है।
क्रिस राइट के मुताबिक, सिर्फ इतना करना होगा कि जहाजों के आने-जाने के लिए एक सुरक्षित रास्ता तैयार किया जाए। उनका मानना है कि यह काम बहुत जल्दी पूरा किया जा सकता है और इससे सप्लाई फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
दुनिया को अब राहत की उम्मीद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी के आखिर से होर्मुज के बंद होने का असर पूरी दुनिया पर साफ दिखाई दे रहा है। इस रास्ते से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है और इसके बंद होने से डीजल, पेट्रोल और गैस की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। एशिया से लेकर यूरोप और अमेरिका तक हर जगह महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है।
खासतौर पर अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले तेल की कीमतें कम करना ट्रंप प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। अब अगर ‘सुरक्षित रास्ता’ तैयार करने की योजना तेजी से लागू होती है, तो आने वाले कुछ हफ्तों में तेल की सप्लाई फिर से शुरू हो सकती है और बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है।
क्या है ट्रंप का पीस पाइपलाइन एजेंडा?
वहीं इसी बीच क्रिस राइट ने एक और बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि ट्रंप प्रशासन जल्द ही ‘ऐतिहासिक पाइपलाइन समझौतों’ का ऐलान करने वाला है। इसे ‘पीस पाइपलाइन एजेंडा’ नाम दिया गया है।
इस योजना के तहत अमेरिका से यूरोप को तेल और गैस की सप्लाई को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ाया जाएगा। इसका मकसद साफ है कि दुनिया की निर्भरता रूस और ईरान जैसे देशों पर कम की जा सके और ऊर्जा के नए विकल्प तैयार किए जा सकें।
क्या अब खत्म होगा संकट?
तो अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। यहां एक तरफ ईरान बातचीत के लिए झुकता दिख रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका भी सप्लाई बहाल करने के रास्ते तलाश रहा है। अगर सब कुछ इसी तरह आगे बढ़ता रहा, तो जल्द ही होर्मुज खुल सकता है और दुनिया को महंगाई के इस बड़े संकट से राहत मिल सकती है।
