Mosaic Defense Iran strategy: मिडिल ईस्ट की धरती पर इस वक्त बारूद की गंध और मिसाइलों की आवाज गूंज रही है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले दो हफ्तों से जारी भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कई लोगों को लगा था कि यह लड़ाई वैसी ही होगी जैसी 2003 में इराक में हुई थी, जब सद्दाम हुसैन की सेना महज 26 दिनों में ढह गई थी।लेकिन इस बार कहानी अलग है। (Mosaic Defense Iran strategy) ईरान ने ऐसा जवाब दिया है जिसने अमेरिका और उसके सहयोगियों को चौंका दिया है। इसके पीछे एक ऐसी सैन्य रणनीति है जिसे सालों पहले तैयार किया गया था।
Also Read –Rajasthan: केदारनाथ में 41 दिवसीय निःशुल्क भंडारे को लेकर बजरंग सेना की बैठक
Mosaic Defense Iran strategy: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और बड़ा हमला
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू किया। इस हमले का मकसद ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करना था। (Mosaic Defense Iran strategy) हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई, रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के चीफ मोहम्मद पाकपुर और रक्षा मंत्री अजीज नसीरजादेह समेत कई बड़े अधिकारियों के मारे जाने की खबरें सामने आईं। अमेरिका को उम्मीद थी कि शीर्ष नेतृत्व के खत्म होते ही ईरान की सैन्य ताकत बिखर जाएगी। लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट।
‘मोजैक डिफेंस’ ने बदल दिया युद्ध का खेल
- Advertisement -
रिपोर्टों के मुताबिक ईरान की ताकत के पीछे पूर्व IRGC कमांडर मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी की बनाई “मोजैक डिफेंस” रणनीति है। यह ऐसा सिस्टम है जिसमें सेना की कमान एक ही जगह पर केंद्रित नहीं होती। (Mosaic Defense Iran strategy) अगर तेहरान में बैठा पूरा नेतृत्व भी खत्म हो जाए, तब भी देश की अलग-अलग सैन्य इकाइयां अपने स्तर पर लड़ाई जारी रख सकती हैं।इसी रणनीति की वजह से 28 फरवरी के हमलों के कुछ ही घंटों बाद बहरीन, कतर, यूएई, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू हो गए।
कौन हैं मेजर जनरल जाफरी
मेजर जनरल जाफरी ने अपने सैन्य करियर की शुरुआत ईरान-इराक युद्ध से की थी। बाद में उन्होंने इराक पर अमेरिकी हमले का गहराई से अध्ययन किया। (Mosaic Defense Iran strategy) उन्होंने पाया कि सद्दाम हुसैन की सेना इसलिए हार गई क्योंकि उसकी पूरी कमान एक ही व्यक्ति के हाथ में थी। जैसे ही संचार तंत्र टूटा, सेना बिखर गई। इसी अनुभव के आधार पर जाफरी ने 2005 में “मोजैक डॉक्ट्रिन” तैयार की और IRGC को 31 प्रांतीय कमानों में बांट दिया। हर कमान के पास अपने मिसाइल, ड्रोन और खुफिया सिस्टम हैं।
क्यों लंबी हो सकती है यह जंग
ईरान इस संघर्ष को “2026 रमजान युद्ध” कह रहा है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भले ही संप्रभुता के सम्मान की बात की हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हमले लगातार जारी हैं। (Mosaic Defense Iran strategy) विशेषज्ञों का मानना है कि मोजैक डॉक्ट्रिन का मकसद तुरंत जीत हासिल करना नहीं है, बल्कि हार को लगभग नामुमकिन बना देना है। यही वजह है कि भले ही ईरान तकनीकी रूप से अमेरिका या इजरायल जितना शक्तिशाली न हो, लेकिन यह रणनीति उन्हें एक लंबी, थका देने वाली जंग में फंसा सकती है, जहां जल्दी जीत की उम्मीद बहुत कम नजर आती है।
