US Nuclear Command Aircraft: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि अमेरिका ने कथित तौर पर अपने ‘डूम्सडे’ न्यूक्लियर कमांड विमान E-6B Mercury को तैनात किया है। इन विमानों को हाल के दिनों में आसमान में उड़ते हुए देखा गया है, जिससे क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के और अधिक फैलने की आशंका बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के विमानों की गतिविधि से परमाणु युद्ध के खतरे को लेकर भी चिंताएं बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव ने पहले ही कई देशों को प्रभावित किया है। अब इस संघर्ष के और व्यापक होने तथा संभावित रूप से वैश्विक संकट में बदलने की आशंकाएं जताई जा रही हैं। (US Nuclear Command Aircraft) रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान से जुड़े सैन्य तनाव बढ़ने के बाद से फ्लाइट-ट्रैकिंग डाटा में E-6B मर्करी स्ट्रेटेजिक एयरबोर्न कमांड एयरक्राफ्ट की उड़ानों को दर्ज किया गया है। (US Nuclear Command Aircraft) ये विशेष विमान पुराने Boeing 707 एयरफ्रेम पर आधारित हैं और इन्हें विशेष रूप से ऐसे हालात के लिए तैयार किया गया है जब परमाणु युद्ध या बड़े पैमाने पर सैन्य संकट की स्थिति पैदा हो जाए।
E-6B विमान अमेरिकी राष्ट्रपति और रक्षा नेतृत्व के लिए एक तरह के उड़ते हुए कमांड सेंटर और रेडियो स्टेशन की तरह काम करते हैं। इनमें अत्याधुनिक संचार प्रणालियां और विशेष एंटेना लगे होते हैं, जिनकी मदद से समुद्र के अंदर तैनात परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों से भी संपर्क किया जा सकता है। (US Nuclear Command Aircraft) इसी वजह से इन्हें आम तौर पर “डूम्सडे प्लेन” कहा जाता है। ये विमान सैटेलाइट, जमीन पर मौजूद सैन्य ठिकानों और भूमिगत मिसाइल बेस से लगातार संपर्क बनाए रखने में सक्षम होते हैं। किसी बड़े युद्ध या परमाणु हमले की स्थिति में यही विमान अमेरिकी सैन्य प्रतिक्रिया को समन्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक 2 मार्च को अमेरिका के ऊपर दो E-6B मर्करी विमानों को उड़ान भरते हुए देखा गया, जिसके बाद फारस की खाड़ी की दिशा में भी ऐसे विमानों के जाने की जानकारी सामने आई। तकनीकी क्षमता के लिहाज से E-6B विमान बेहद शक्तिशाली और उन्नत माने जाते हैं। (US Nuclear Command Aircraft) इनमें आम तौर पर 22 लोगों का क्रू होता है और इनकी लंबाई करीब 150 फीट होती है। यह विमान लगभग 7,000 मील तक की दूरी तय कर सकते हैं और हवा में ईंधन भरने की सुविधा के कारण तीन दिनों तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम हैं। (US Nuclear Command Aircraft) ये लगभग 40,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं, जो सामान्य यात्री विमानों से अधिक है।
E-6 विमान 1980 के दशक से अमेरिकी सैन्य सेवा का हिस्सा रहे हैं। बाद में इन्हें अपग्रेड कर E-6B संस्करण बनाया गया, जिसमें हाई-फ्रीक्वेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम जोड़े गए और इसे “लुकिंग ग्लास” मिशन का हिस्सा बनाया गया। (US Nuclear Command Aircraft) यह मिशन अमेरिकी सैन्य रणनीतिक कमांड का एयरबोर्न कंट्रोल पोस्ट माना जाता है, जो इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों के संचालन और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक E-6B डूम्सडे विमान की कीमत लगभग 141.7 मिलियन डॉलर बताई जाती है, जो इसकी रणनीतिक और तकनीकी अहमियत को दर्शाती है।
US Nuclear Command Aircraft: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि अमेरिका ने कथित तौर पर अपने ‘डूम्सडे’ न्यूक्लियर कमांड विमान E-6B Mercury को तैनात किया है। इन विमानों को हाल के दिनों में आसमान में उड़ते हुए देखा गया है, जिससे क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के और अधिक फैलने की आशंका बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के विमानों की गतिविधि से परमाणु युद्ध के खतरे को लेकर भी चिंताएं बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव ने पहले ही कई देशों को प्रभावित किया है। अब इस संघर्ष के और व्यापक होने तथा संभावित रूप से वैश्विक संकट में बदलने की आशंकाएं जताई जा रही हैं। (US Nuclear Command Aircraft) रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान से जुड़े सैन्य तनाव बढ़ने के बाद से फ्लाइट-ट्रैकिंग डाटा में E-6B मर्करी स्ट्रेटेजिक एयरबोर्न कमांड एयरक्राफ्ट की उड़ानों को दर्ज किया गया है। ये विशेष विमान पुराने Boeing 707 एयरफ्रेम पर आधारित हैं और इन्हें विशेष रूप से ऐसे हालात के लिए तैयार किया गया है जब परमाणु युद्ध या बड़े पैमाने पर सैन्य संकट की स्थिति पैदा हो जाए।
E-6B विमान अमेरिकी राष्ट्रपति और रक्षा नेतृत्व के लिए एक तरह के उड़ते हुए कमांड सेंटर और रेडियो स्टेशन की तरह काम करते हैं। इनमें अत्याधुनिक संचार प्रणालियां और विशेष एंटेना लगे होते हैं, जिनकी मदद से समुद्र के अंदर तैनात परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों से भी संपर्क किया जा सकता है। (US Nuclear Command Aircraft) इसी वजह से इन्हें आम तौर पर “डूम्सडे प्लेन” कहा जाता है। ये विमान सैटेलाइट, जमीन पर मौजूद सैन्य ठिकानों और भूमिगत मिसाइल बेस से लगातार संपर्क बनाए रखने में सक्षम होते हैं। किसी बड़े युद्ध या परमाणु हमले की स्थिति में यही विमान अमेरिकी सैन्य प्रतिक्रिया को समन्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 2 मार्च को अमेरिका के ऊपर दो E-6B मर्करी विमानों को उड़ान भरते हुए देखा गया, जिसके बाद फारस की खाड़ी की दिशा में भी ऐसे विमानों के जाने की जानकारी सामने आई। (US Nuclear Command Aircraft) तकनीकी क्षमता के लिहाज से E-6B विमान बेहद शक्तिशाली और उन्नत माने जाते हैं। इनमें आम तौर पर 22 लोगों का क्रू होता है और इनकी लंबाई करीब 150 फीट होती है। यह विमान लगभग 7,000 मील तक की दूरी तय कर सकते हैं और हवा में ईंधन भरने की सुविधा के कारण तीन दिनों तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम हैं। ये लगभग 40,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं, जो सामान्य यात्री विमानों से अधिक है।
E-6 विमान 1980 के दशक से अमेरिकी सैन्य सेवा का हिस्सा रहे हैं। बाद में इन्हें अपग्रेड कर E-6B संस्करण बनाया गया, जिसमें हाई-फ्रीक्वेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम जोड़े गए और इसे “लुकिंग ग्लास” मिशन का हिस्सा बनाया गया। (US Nuclear Command Aircraft) यह मिशन अमेरिकी सैन्य रणनीतिक कमांड का एयरबोर्न कंट्रोल पोस्ट माना जाता है, जो इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों के संचालन और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक E-6B डूम्सडे विमान की कीमत लगभग 141.7 मिलियन डॉलर बताई जाती है, जो इसकी रणनीतिक और तकनीकी अहमियत को दर्शाती है।
