Brad Sherman on US tariffs India: दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका और उभरती हुई महाशक्ति भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों की डोर आजकल एक अजीब से तनाव के दौर से गुजर रही है। वॉशिंगटन की सत्ता के गलियारों से लेकर दिल्ली के व्यापार मंडलों तक एक ही चर्चा है, क्या डोनाल्ड ट्रंप जानबूझकर भारत को भारी भरकम टैक्स (टैरिफ) के जाल में उलझाने की कोशिश कर रहे हैं? अमेरिकी सांसद ब्रैड शर्मन के हालिया दावों ने इस आग में घी डालने का काम किया है। (Brad Sherman on US tariffs India) शर्मन का कहना है कि ट्रंप प्रशासन भारत के खिलाफ कड़े आर्थिक फैसले लेने के लिए बहाने तलाश रहा है, जबकि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है।
Brad Sherman on US tariffs India: रूसी तेल का बहाना और दोहरे मापदंड
ब्रैड शर्मन ने ट्रंप प्रशासन की नीति पर बड़े सवाल खड़े करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर और अधिक टैरिफ लगाने के लिए ‘रूसी तेल’ को एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। (Brad Sherman on US tariffs India) चौंकाने वाली बात यह है कि जहाँ भारत अपनी जरूरत का सिर्फ 21 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से खरीद रहा है, वहीं हंगरी जैसे देश अपनी कुल खपत का 90 प्रतिशत तेल रूस से ले रहे हैं, लेकिन उन पर कोई टैरिफ नहीं लगाया गया। चीन भी रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, फिर भी टैरिफ का सबसे ज्यादा निशाना भारत को ही बनाया जा रहा है। सांसद शर्मन ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए मांग की है कि भारत के खिलाफ इस नीति को तुरंत बदला जाए क्योंकि यह दोस्ती की मर्यादा के खिलाफ है।
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निर्यात में भारी गिरावट और व्यापारिक घाटा
आंकड़ों की जुबानी देखें तो स्थिति काफी गंभीर नजर आती है। जनवरी के महीने में अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में करीब 22 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो घटकर महज 6.6 अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट लगातार कई महीनों से बनी हुई है। (Brad Sherman on US tariffs India) दूसरी ओर, अमेरिका से भारत आने वाले सामान यानी आयात में 23.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, हाल ही में ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर लगे 25 प्रतिशत के दंडात्मक शुल्क को हटा दिया है और जवाबी शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
खुद अमेरिकी जनता भी बेहाल
इस व्यापार युद्ध का सबसे दिलचस्प और डराने वाला पहलू यह है कि जिन शुल्कों को ट्रंप विदेशी कंपनियों को सजा देने के लिए लगा रहे हैं, उनका असल बोझ अमेरिकी जनता की जेब पर पड़ रहा है। (Brad Sherman on US tariffs India) फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इन भारी शुल्कों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा खुद अमेरिकी उपभोक्ताओं और व्यापारियों को अपनी जेब से भरना पड़ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, साल 2026 में हर अमेरिकी परिवार पर इन टैक्सों की वजह से 1300 डॉलर का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। यानी यह टैरिफ नीति जितनी भारत के लिए मुश्किल पैदा कर रही है, उतनी ही खुद अमेरिका के भीतर भी महंगाई की आग सुलगा रही है।
