Iran Protests 2026: ईरान एक बार फिर उबाल पर है। सख्त इस्लामिक कानूनों, कमजोर अर्थव्यवस्था और महिलाओं पर बढ़ते दमन के खिलाफ सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक विरोध की भयानक आग फैल चुकी है। इस आंदोलन की अगुवाई कर रही हैं वो महिलाएं, जिन्होंने सीधे सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की सत्ता को बड़ी चेतवानी दे दी है। एक तस्वीर जिसमें एक लड़की खामेनेई की फोटो जलाकर सिगरेट सुलगाती नजर आ रही है, आज ईरान में गुस्से और विद्रोह का प्रतीक बन चुकी है।
ईरान में दशकों से महिलाओं पर हिजाब और इस्लामिक ड्रेस कोड को जबरन थोपा गया। (Iran Protests 2026) मोरल पुलिस के माध्यम से सड़कों पर महिलाओं को सजा दी गई, मेकअप, खुले बाल और स्कर्ट पहनने पर कड़ी कार्रवाई की गयी। 21वीं सदी में भी आज़ादी से वंचित महिलाओं का गुस्सा अब ‘महा विस्फोटक’ बनकर फूट चुका है।
महसा अमीनी: आंदोलन की चिंगारी
जानकारी के मुताबिक, पहला नाम है महसा अमीनी का। साल 2022 में हिजाब नियमों के विरोध में गिरफ्तार की गई महसा की हिरासत में मौत हो गई। (Iran Protests 2026) उनकी मौत ने पूरे ईरान में आग लगा दी और महिलाओं ने खुलकर सड़कों पर उतरकर खामेनेई सरकार को ललकारा था।
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मरियम राजवी: भविष्य के ईरान की आवाज
दूसरे नंबर पर हैं मरियम राजवी, जो नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान (NCRI) की नेता हैं। विदेश में रहते हुए वह महिलाओं के नेतृत्व वाले लोकतांत्रिक ईरान की वकालत करती आयी हैं। (Iran Protests 2026) उन्हें कई लोग ‘नए ईरान’ की संभावित नेता मानते हैं।
मसीह अलीनेजाद: हिजाब के खिलाफ वैश्विक मुहिम
तीसरा नाम है अमेरिका में रह रहीं पत्रकार और एक्टिविस्ट मसीह अलीनेजाद का। उन्होंने ‘My Stealthy Freedom’ अभियान चलाकर हिजाब विरोधी आंदोलन को वैश्विक मंच दिया और ईरानी महिलाओं की आवाज़ पूरे विश्व में पहुंचाई।
नरगिस मोहम्मदी: जेल से संघर्ष
चौथे नंबर पर हैं नरगिस मोहम्मदी, जिन्हें साल 2023 का नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह जेल में रहते हुए भी महिलाओं और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं और ईरानी सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
फरिदेह मुरादखानी: खामेनेई के घर से बगावत
पांचवां नाम है फरिदेह मुरादखानी का, जो खुद खामेनेई के साथ रिश्ते में उनकी भतीजी लगती हैं। सत्ता के खिलाफ बोलने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया, लेकिन उनका विरोध नहीं थमा।
बता दे, इनके अलावा पूर्व शाह रज़ा पहलवी की बेटियां भी विदेश से आंदोलन को समर्थन दे रही हैं। वहीं हालिया आर्थिक संकट, रियाल की गिरावट और बढ़ती महंगाई ने आंदोलन को और तीव्र बना दिया है। (Iran Protests 2026) ईरानी सेना की सख्ती के बावजूद महिलाओं की यह लड़ाई अब केवल ईरान तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे विश्व के लिए ‘आज़ादी की आवाज़’ बनकर गूंज रही है।
