BJP Kerala Election Statergy: दक्षिण भारत का खूबसूरत राज्य केरल, जिसे अब तक भारतीय जनता पार्टी के लिए सबसे कठिन चुनौती माना जाता था, अब भगवा दल की भावी रणनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। केरल की सड़कों पर इन दिनों एक नई गूँज सुनाई दे रही है और इस गूँज के सूत्रधार हैं खुद देश के गृह मंत्री अमित शाह। दशकों तक केरल की राजनीति वामपंथी दलों और कांग्रेस के बीच झूलती रही, लेकिन 2026 के इस चुनावी माहौल में भाजपा ने अपना सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। (BJP Kerala Election Statergy) अमित शाह ने कार्यकर्ताओं के बीच जोश भरते हुए साफ़ कह दिया है कि “जो कभी नहीं बदला, वह अब बदलेगा।” त्रिपुरा और मणिपुर जैसे राज्यों में मिली ऐतिहासिक जीत का उदाहरण देकर शाह ने केरल की जनता को यह संदेश दिया है कि राजनीति में कुछ भी नामुमकिन नहीं है। आखिर क्या है अमित शाह का वो गुप्त ‘प्लान’, जिससे केरल की लाल धरती अब केसरिया रंग में रंगने को बेताब है?
BJP Kerala Election Statergy: नगर निगम में ऐतिहासिक जीत और बढ़ता वोट शेयर
भाजपा का यह नया आत्मविश्वास हवा-हवाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे जमीनी आंकड़ों की मजबूती है। हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों ने केरल की राजनीति में भूकंप ला दिया है। राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 101 वार्डों में से 50 सीटें जीतकर भाजपा ने इतिहास रच दिया और पहली बार केरल के किसी बड़े शहर में भाजपा का मेयर बना। (BJP Kerala Election Statergy) वोट शेयर की बात करें तो 2001 में जहाँ भाजपा महज तीन प्रतिशत पर सिमटी थी, वहीं 2021 तक यह आंकड़ा 15 प्रतिशत तक पहुँच गया और लोकसभा चुनावों में तो एनडीए ने 20 प्रतिशत वोट शेयर हासिल कर अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी। शहरी मतदाताओं का भाजपा की ओर बढ़ता यह रुझान बता रहा है कि विकास की उम्मीदें अब केरल के घर-घर तक पहुँच रही हैं।
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सामाजिक समीकरणों में सेंध
केरल में भाजपा की इस बढ़त के पीछे सामाजिक और भावनात्मक मुद्दों की बड़ी भूमिका है। ‘सबरीमाला’ का मुद्दा दक्षिण केरल में हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने में एक बड़े स्तंभ की तरह उभरा है। (BJP Kerala Election Statergy) इसके साथ ही, भाजपा ने राज्य के सबसे बड़े हिंदू समुदाय ‘इझवा’ (OBC) में बड़ी सेंध लगाई है, जो पारंपरिक रूप से वामपंथ का गढ़ माना जाता था। केरल की 26 प्रतिशत आबादी वाले इस समुदाय से ही भाजपा के बड़े नेता के सुरेंद्रन और वी मुरलीधरन आते हैं। (BJP Kerala Election Statergy) अमित शाह की रणनीति स्पष्ट है—विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान की रक्षा। भाजपा अब केवल सवर्णों की पार्टी नहीं, बल्कि पिछड़ा वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों की भी पहली पसंद बनती जा रही है, जिसका प्रमाण 79 ग्राम पंचायतों में भाजपा का दूसरे स्थान पर रहना है।
सत्ता विरोधी लहर और त्रिपुरा जैसी जीत की उम्मीद
केरल में वर्तमान वामपंथी सरकार के खिलाफ जनता में असंतोष चरम पर है। भ्रष्टाचार के आरोप और विकास की धीमी रफ्तार ने आम जनता को विकल्प की तलाश में भाजपा की ओर मोड़ दिया है। (BJP Kerala Election Statergy) अमित शाह ने अपने हालिया दौरे में कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि एक समय भाजपा मणिपुर और त्रिपुरा में कहीं नहीं थी, लेकिन आज वहां सरकारें चला रही है। 1984 में दो सांसदों वाली पार्टी अगर आज लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता में है, तो केरल में सरकार बनाना भी असंभव नहीं है। भाजपा अब ‘केरल मॉडल’ के जवाब में ‘मोदी मॉडल’ पेश कर रही है, जहाँ बुनियादी ढांचे, रोजगार और सामाजिक न्याय पर जोर दिया जा रहा है।
