Washington: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मध्य-पूर्व में सैन्य ताकत बढ़ानी शुरू कर दी है। अमेरिका तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप USS Theodore Roosevelt को क्षेत्र की ओर भेज रहा है, जबकि करीब 9,000 से 10,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की तैयारी है। इसी बीच ट्रंप ने ईरान के खिलाफ भविष्य में फिर सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया है। (Washington) यह सैन्य तैनाती ऐसे समय हो रही है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ दोबारा बड़े सैन्य हमले की संभावना पर बात कर रहे हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वॉशिंगटन में इस बात पर विचार हो रहा है कि यदि मौजूदा कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं तो अमेरिकी कार्रवाई चुनाव के बाद भी दोबारा शुरू हो सकती है।
तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेज रहा अमेरिका
USNI News के मुताबिक, USS Theodore Roosevelt (CVN-71) 27 सितंबर को सैन डिएगो से रवाना हुआ। कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-9 के फ्लैगशिप के रूप में यह मध्य-पूर्व की ओर बढ़ रहा है और इसके साथ Carrier Air Wing 11 भी तैनात है।
इसके पहुंचने के बाद मध्य-पूर्व में अमेरिकी नौसेना के पास तीन प्रमुख कैरियर स्ट्राइक ग्रुप हो सकते हैं—USS George H.W. Bush, USS George Washington और (USS Theodore Roosevelt। Washington) रिपोर्टों के अनुसार, इसके साथ बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान, एस्कॉर्ट युद्धपोत और मिसाइल क्षमता वाले जहाज भी क्षेत्र में मौजूद रहेंगे।
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10 हजार अतिरिक्त सैनिक भी पहुंचेंगे
अमेरिका सिर्फ नौसैनिक ताकत नहीं बढ़ा रहा है। USS Makin Island Amphibious Ready Group भी मध्य-पूर्व की ओर भेजा जा रहा है। इसमें 13th Marine Expeditionary Unit के मरीन शामिल हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक इन नई तैनातियों से मध्य-पूर्व में अमेरिका की अतिरिक्त सैन्य मौजूदगी करीब 9,000 से 10,000 सैनिकों तक बढ़ सकती है। नए बलों के नवंबर के अंत तक क्षेत्र में पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। पहले से ही मध्य-पूर्व में 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैन्यकर्मी मौजूद हैं।
क्या मिडटर्म चुनाव के बाद फिर ईरान पर हमला करेगा अमेरिका?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू कर सकते हैं। हालिया रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहा है, खासकर यदि बातचीत से कोई समझौता नहीं होता।
ट्रंप ने खुद भी कहा है कि ईरान के खिलाफ युद्ध चुनाव के बाद खत्म हो सकता है या उससे पहले भी समाप्त हो सकता है। CBS के अनुसार, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर सैन्य अभियान जारी रह सकता है।
इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। (Washington) 27 सितंबर को ट्रंप ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी वार्ताकार ईरान के साथ बातचीत करेंगे, जबकि दोनों पक्षों के बीच अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
Flydubai घटना ने बढ़ाया तनाव
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच Flydubai की एक उड़ान में कॉकपिट के अंदर हुए हमले ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। (Washington) 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में सह-पायलट ने कथित तौर पर कप्तान पर हमला किया, जिसके बाद विमान की ऊंचाई में अचानक भारी गिरावट आई और उसे सऊदी अरब के तबुक में आपात लैंडिंग करनी पड़ी। मामले की जांच जारी है।
1 अक्टूबर को ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें सुनने में आया है कि इस घटना में ईरान का संबंध हो सकता है। हालांकि उन्होंने कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया और जांच जारी होने की बात कही। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान की संलिप्तता साबित होती है तो उसे “बहुत कड़ा जवाब” दिया जाएगा।
अभी क्या स्थिति है?
फिलहाल अमेरिका ने यह घोषित नहीं किया है कि वह निश्चित रूप से मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर नया हमला करेगा। (Washington) लेकिन तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, अतिरिक्त मरीन और हजारों सैनिकों की तैनाती से अमेरिका ने सैन्य विकल्पों के लिए अपनी क्षमता बढ़ा दी है। (Washington) इसी के साथ कूटनीतिक बातचीत भी चल रही है, जिससे आने वाले हफ्तों में अमेरिका-ईरान संबंधों की दिशा महत्वपूर्ण होगी।
ताजा स्थिति: अमेरिकी सैन्य तैनाती नवंबर के अंत तक बढ़ने की उम्मीद है और क्षेत्र में तीन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तथा करीब 20,000 नौसैनिक/मरीन बलों की मौजूदगी संभव हो सकती है।
