US Israel Iran Conflict: इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष का दायरा तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। जवाबी कार्रवाई के तहत ईरान ने उन छह पड़ोसी देशों को निशाना बनाया, जो सीधे तौर पर इस जंग में शामिल नहीं थे। इस घटनाक्रम के बाद खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है और अब इन देशों ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है।
बताया जा रहा है कि जिन देशों को ईरानी हमलों का सामना करना पड़ा, उनमें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, कतर और कुवैत शामिल हैं। (US Israel Iran Conflict) ये सभी देश खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) का हिस्सा हैं। हमलों के बाद इन देशों के विदेश मंत्रियों ने एक ऑनलाइन बैठक कर हालात की समीक्षा की और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ रहे प्रभाव पर चर्चा की।
बैठक के बाद जारी साझा बयान में इन देशों ने ईरान की कार्रवाई को आक्रामक और अस्वीकार्य बताया। उनका कहना है कि किसी भी संप्रभु देश पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का उल्लंघन है। (US Israel Iran Conflict) उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी सुरक्षा और स्थिरता को खतरा हुआ तो वे जवाबी कदम उठाने के लिए स्वतंत्र हैं। इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान ने पड़ोसी मुस्लिम देशों को निशाना बनाकर रणनीतिक भूल की है।
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US Israel Iran Conflict: डोनाल्ड ट्रंप ने यूएई राष्ट्रपति से फोन पर की बातचीत
सबसे कड़ी प्रतिक्रिया यूएई की ओर से आई। संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के राजदूत रजा अमेरी को तलब कर आधिकारिक विरोध दर्ज कराया। यूएई सरकार ने कहा कि यह हमला उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा प्रहार है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। (US Israel Iran Conflict) यूएई ने यह भी दोहराया कि उसके पास आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है। इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान ईरान के हमलों और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने संभावित परिदृश्यों और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।
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संघर्ष के बीच एक और बड़ी खबर यह है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने की पुष्टि की गई है। उनके निधन की खबर से दुनिया भर के शिया मुस्लिम समुदाय में गहरा शोक और आक्रोश देखा जा रहा है। (US Israel Iran Conflict) भारत के श्रीनगर, लखनऊ और दिल्ली जैसे शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जहां लोगों ने ईरान के समर्थन में आवाज उठाई। पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते घटनाक्रम ने क्षेत्रीय संतुलन को अस्थिर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास तेज नहीं हुए तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में खाड़ी देश और ईरान किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं।
