Putin Invites Zelensky to Moscow: यूक्रेन-रूस युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की राजनीति में एक बड़ा और बहुत चौंका देने वाला मोड़ सामने आया है। वैश्विक मंच पर हलचल तब तेज हो गई जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को सीधे मास्को आने का निमंत्रण दे दिया। रूस ने यह संकेत दिया है कि यदि जेलेंस्की बातचीत के लिए रूस आते हैं तो उन्हें सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
इस घटनाक्रम को एक तरह से जियोपॉलिटिक्स में ‘पुतिन का मास्टरस्ट्रोक’ बताया जा रहा है, क्योंकि यह कदम ऐसे वक़्त में उठाया गया है जब अमेरिका युद्धविराम कराने के प्रयासों में तेजी में जुटा हुआ है और खुद डोनाल्ड ट्रंप निरंतर यह दावा करते आ रहे हैं कि उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच सीजफायर की दिशा में पहल करवाई है।
Putin Invites Zelensky to Moscow: पुतिन का सीधा न्योता: क्या शांति वार्ता का नया रास्ता?
रूस द्वारा जेलेंस्की को मास्को बुलाने की खबर ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ताओं के मुताबिक, रूस अब सीधे बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का संकेत दे रहा है। (Putin Invites Zelensky to Moscow) इसे लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रूस की कूटनीति का अहम भाग है, जिसमें वह तीसरे देश की मध्यस्थता को दरकिनार कर सीधे यूक्रेन पर दबाव बनाने की कोशिशों में लगा हुआ है। पुतिन का यह प्रस्ताव ऐसे समय में है जब अमेरिका की मध्यस्थता में अबू धाबी में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दौर शुरू होने वाला है।
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ट्रंप की भूमिका पर सवाल
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि उन्होंने एक हफ्ते के लिए रूस को बमबारी रोकने के लिए मना लिया है। ट्रंप निरंतर खुद को “पीसमेकर” के रूप से पेश कर रहे हैं, लेकिन देखा जाए तो… युद्ध अब भी जारी है। इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के दावों के बीच पुतिन का यह कदम अमेरिका की रणनीति को कमजोर करता दिखाई दे रहा है। (Putin Invites Zelensky to Moscow) इससे यह संदेश साफ़ नज़र आ रहा है कि रूस किसी भी समाधान में अमेरिका को निर्णायक भूमिका देने के पक्ष में नहीं है।
यूक्रेन की स्थिति और जेलेंस्की की मुश्किलें
यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दौर से ही पश्चिमी देशों के समर्थन पर निर्भर रहा है। अमेरिका और यूरोप ने यूक्रेन को हथियार, आर्थिक रूप से मदद और सैन्य समर्थन दिया, लेकिन इसके बावजूद युद्ध निर्णायक मोड़ तक नहीं पहुंच पाया। (Putin Invites Zelensky to Moscow) गौर किया जाए तो यूक्रेन की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है, संसाधनों पर दबाव बढ़ा है और देश का बड़ा हिस्सा युद्ध की मार झेल रहा है। ऐसे में जेलेंस्की के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह शांति वार्ता में किस शर्त पर आगे बढ़ें।
रूस वग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जिन इलाकों पर उसने कब्जा किया है, उन्हें वह अपना हिस्सा मानता है। वहीं जेलेंस्की बार-बार कहते रहे हैं कि यूक्रेन अपनी “एक इंच जमीन भी नहीं छोड़ेगा।”
EU की भारत से अपील: रूस पर दबाव डालो
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूरोपीय यूनियन के नेताओं ने भारत की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। EU का कहना है कि भारत और रूस के संबंध अच्छे हैं, इसलिए भारत को चाहिए कि वह रूस पर युद्ध रोकने का दबाव बनाए। (Putin Invites Zelensky to Moscow) हालांकि, भारत की नीति हमेशा से साफ़ रही है कि भारत बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समाधान चाहता है, लेकिन वह किसी एक पक्ष के खिलाफ दबाव की राजनीति में शामिल नहीं होगा। इससे पहले भी भारत कई बार कह चुका है कि युद्ध का समाधान “टेबल पर बैठकर बातचीत” से ही संभव है।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस युद्ध ने भारत को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक शक्ति के रूप में उभारा है। रूस के साथ मजबूत रिश्ते, पश्चिम के साथ व्यापारिक साझेदारी और वैश्विक मंचों पर स्वतंत्र नीति ने भारत को अलग पहचान दी है। (Putin Invites Zelensky to Moscow) गौर किया जाए तो… हाल के ही कुछ सालों में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ट्रेड डील और बढ़ती रणनीतिक साझेदारी ने यह संकेत दिया है कि भारत अब सिर्फ क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति का बड़ा केंद्र बन चुका है।
युद्ध रुकेगा या बढ़ेगा तनाव?
अब इस सब के बीच सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि पुतिन द्वारा जेलेंस्की को मास्को बुलाना निश्चित रूप से एक बड़ा संकेत है, लेकिन क्या यूक्रेन इस न्योते को स्वीकार करेगा? (Putin Invites Zelensky to Moscow) यदि जेलेंस्की रूस जाते हैं तो यह शांति वार्ता का बड़ा कदम हो सकता है, लेकिन यदि उन्होंने मना किया तो युद्ध और लंबा खिंच सकता है।
अब पूरे विश्व की निगाहें आगामी दिनों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि अबू धाबी में वार्ता और रूस के इस नए प्रस्ताव से युद्ध की दिशा बदल सकती है। (Putin Invites Zelensky to Moscow) बता दे, यूक्रेन युद्ध के बीच पुतिन का जेलेंस्की को मास्को बुलाना एक बड़ा कूटनीतिक दांव माना जा रहा है। अमेरिका की मध्यस्थता, ट्रंप के दावे और EU की भारत से अपील – इन सबके बीच भारत की भूमिका भी लगातार चर्चा में है। (Putin Invites Zelensky to Moscow) अब देखना यह होगा कि क्या यह ‘मास्टरस्ट्रोक’ युद्ध रोकने की दिशा में कदम साबित होगा या फिर वैश्विक राजनीति में तनाव को और बढ़ा देगा।
