US Iran Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान परमाणु हथियारों को लेकर बातचीत की मेज पर नहीं आता, तो उसे “बहुत बुरे” हमले का सामना करना पड़ सकता है। इस चेतावनी के साथ ही अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करते हुए एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन को मिडिल ईस्ट में तैनात कर दिया है। (US Iran Tensions) इसके साथ तीन आधुनिक डिस्ट्रॉयर जहाज USS फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, USS स्प्रुअंस और USS माइकल मर्फी भी मौजूद हैं, जिन्हें भारी मारक क्षमता से लैस माना जाता है।
बुधवार को ट्रंप ने ईरान के लिए एक तरह का “न्यूक्लियर अल्टीमेटम” जारी करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें उम्मीद है ईरान जल्द बातचीत की टेबल पर आएगा और एक “निष्पक्ष व सही डील” करेगा। (US Iran Tensions) उन्होंने दो टूक कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते और समय तेजी से निकलता जा रहा है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगर तेहरान ने चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया, तो अगला हमला पहले से कहीं ज्यादा विनाशकारी होगा।
हालांकि, ट्रंप की इस धमकी पर ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के सलाहकार अली शामखानी ने कहा कि अमेरिका की किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब ईरान अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों पर हमलों के रूप में देगा। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने चेतावनी दी कि ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है और किसी भी हमले का तुरंत और कड़ा जवाब देने में सक्षम है।
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इस पूरे घटनाक्रम के बीच भू-राजनीतिक विशेषज्ञों ने ट्रंप के बयानों पर सवाल भी खड़े किए हैं। विशेषज्ञ स्टेनली जॉनी के मुताबिक, ट्रंप लगातार अपने रुख में बदलाव कर रहे हैं। (US Iran Tensions) उन्होंने याद दिलाया कि जून 2025 में हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम “पूरी तरह खत्म” कर दिया गया है। अगर ऐसा था, तो फिर अब जनवरी 2026 में नए परमाणु समझौते की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है? विशेषज्ञों का मानना है कि असली मुद्दा लोकतंत्र या मानवाधिकार नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव बनाना है।
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ईरान की ओर से यह भी साफ किया गया है कि वह दबाव, धमकी या डराने की नीति के तहत किसी समझौते के लिए तैयार नहीं है। (US Iran Tensions) विदेश मंत्री अराकची ने कहा कि ईरान हमेशा एक निष्पक्ष और पारस्परिक लाभ वाले परमाणु समझौते का समर्थक रहा है, जो उसके शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकारों की रक्षा करे और परमाणु हथियारों की संभावना को पूरी तरह खत्म करे।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी तरह की प्रत्यक्ष बातचीत के सार्वजनिक संकेत नहीं मिले हैं। (US Iran Tensions) ऐसे में हालात तेजी से टकराव की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि USS अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। (US Iran Tensions) रॉयटर्स के मुताबिक, इस बेड़े में टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस युद्धपोत और आमतौर पर साथ चलने वाली परमाणु-संचालित पनडुब्बी भी शामिल होती है। मौजूदा हालात को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि अगर कूटनीति नाकाम रही, तो क्षेत्र एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।
