India-EU FTA 2026: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुआ नया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) इस वक्त अंतरराष्ट्रीय स्तर की राजनीति और अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ी हलचल पैदा करने वाला समझौता माना जा रहा है। इसे कई विशेषज्ञ “Mother Of All Deals” कह रहे हैं, क्योंकि इसका प्रभाव सिर्फ व्यापार तक ही सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि यह दुनिया भर की सप्लाई चेन, निवेश, रोजगार और रणनीतिक साझेदारी की दिशा में ज़बरदस्त परिवर्तन ला सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन की तस्वीर इस ऐतिहासिक समझौते की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है। (India-EU FTA 2026) यह तस्वीर साफ़ बताती है कि भारत को अब यूरोप के रूप में एक मजबूत ट्रेड पार्टनर मिल गया है, और यूरोप को भारत जैसा विशाल बाजार।
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India-EU FTA 2026: क्यों कहा जा रहा है इसे “Mother Of All Deals”?
इस डील को इतना बड़ा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि भारत और यूरोपीय संघ मिलकर विश्व के कुल GDP का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। (India-EU FTA 2026) यानी अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का लगभग एक-चौथाई भाग इस समझौते के दायरे में आ जाता है। इतना ही नहीं, यह समझौता विश्व के कुल व्यापार का तकरीबन एक-तिहाई हिस्सा कवर करता है। यही कारण है कि इसे दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक समझौतों में शामिल किया जा रहा है।
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ट्रंप टैरिफ के बीच बड़ा रणनीतिक संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ फैसलों ने भारत और यूरोप को एक-दूसरे के करीब लाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों के कारण कई देशों ने नए व्यापारिक विकल्प तलाशने शुरू किए और भारत-EU समझौता उसी का नतीजा है।
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27 जनवरी को EU के 27 देशों के साथ यह डील होना भी प्रतीकात्मक माना जा रहा है, एक भारत और 27 यूरोपीय देश मिलकर 28 देशों की एक मजबूत आर्थिक टीम बन गए हैं।
भारत को इससे क्या-क्या होगा फायदा?
इस समझौते से भारत के तकरीबन 9,425 उत्पादों पर यूरोप के बाजार में टैक्स खत्म हो जाएगा। इसका अर्थ यह है कि भारत के 99% से अधिक निर्यात पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा। (India-EU FTA 2026) इससे भारत के लगभग 6.75 लाख करोड़ रुपये के निर्यात को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। विशेषकर भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए यह यूरोप के बाजार तक पहुंच सरल बना देगा।
किन सेक्टर्स को होगा सबसे अधिक लाभ?
- टेक्सटाइल उद्योग: भारत का टेक्सटाइल सेक्टर कृषि के बाद सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है। इस समझौते के बाद भारत का कपड़ा उद्योग यूरोप में बिना टैक्स के बड़ा विस्तार कर पायेगा। सूरत, लुधियाना और वारंगल जैसे शहरों को खसतौर से बड़ा लाभ होगा।
- लेदर और फुटवेयर उद्योग: आगरा, कानपुर और कोल्हापुर जैसे शहरों का चमड़ा उद्योग अब यूरोप के 9 लाख करोड़ रुपये के बाजार में टैक्स फ्री प्रवेश कर सकेगा।
- ज्वेलरी और हीरा उद्योग: सूरत, जयपुर और मुंबई की ज्वेलरी इंडस्ट्री को भी टैक्स कटौती का लाभ मिलेगा।
यूरोप को क्या मिलेगा?
यूरोपीय संघ को भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। (India-EU FTA 2026) यूरोप की कंपनियां अब भारत में निवेश बढ़ा पाएंगी, विशेषकर ऑटोमोबाइल, मशीनरी, टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में।
आम जनता की जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
FTA का प्रभाव सीधे उपभोक्ताओं पर भी दिखेगा। यूरोप से आने वाली कई वस्तुएं भारत में सस्ती हो जाएंगी, जैसे कि:
- लग्जरी कारों पर टैक्स 110% से कम हो कर 10% तक आ सकता है
- प्रीमियम वाइंस पर टैक्स 150% से कम हो कर 20 से 30%
- ऑलिव ऑयल पर टैक्स 45% से घटकर शून्य
- कीवी, नाशपाती जैसे फलों पर टैक्स 33% से कम हो कर 10%
- प्रोसेस्ड फूड, चॉकलेट्स, पास्ता, बिस्किट्स पर टैक्स खत्म
यानी आगामी वक़्त में विदेशी उत्पाद भारतीय बाजार में ज्यादा सस्ते हो सकते हैं।
छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी राहत
इस समझौते के तहत मोबिलिटी और वीजा नियमों को भी सरल बनाया जाएगा, जैसे:
- यूरोप में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को पढ़ाई के बाद कम से कम 9 महीने की वीजा सुरक्षा
- IT, बैंकिंग, फाइनेंस सेक्टर के प्रोफेशनल्स के लिए अधिक मौके
- यूरोपीय देशों में भारतीय स्किल्ड वर्कर्स की मांग बढ़ेगी
निवेश और सप्लाई चेन में नया युग
यह FTA भारत और EU के बीच निवेश को बूस्ट करेगा। (India-EU FTA 2026) नई इनोवेशन पार्टनरशिप बनेगी और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा। इसे लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को “ग्लोबल ट्रेड पावर” बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
कब लागू होगा यह समझौता?
इस समझौते के 2027 से लागू होने की संभावना जताई जा रही है। (India-EU FTA 2026) यानी अगले कुछ सालों में इसके प्रभाव धीरे-धीरे जमीन पर दिखने लगेंगे। (India-EU FTA 2026) बता दे, भारत और यूरोपीय संघ का यह FTA सिर्फ व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक गठबंधन है। इससे भारत को यूरोप के विशाल बाजार तक टैक्स फ्री पहुंच मिलेगी, वहीं यूरोप को भारत के तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार का लाभ।
यह डील आने वाले दशक में भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार, निवेश और वैश्विक भूमिका को नई ऊंचाई दे सकती है। (India-EU FTA 2026) इसी कारण से इसे सही मायनों में “Mother Of All Deals” कहा जा रहा है।
