Iran Nuclear Weapons Statement: भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने परमाणु हथियारों को लेकर ईरान का रुख साफ किया है। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी न्यूक्लियर हथियार बनाने का इच्छुक नहीं रहा है, क्योंकि इस्लाम में परमाणु हथियारों को ‘हराम’ माना गया है। उनके अनुसार, ईरान की नीति हमेशा शांति और मानवता के पक्ष में रही है।
Iran Nuclear Weapons Statement: अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर लगाए दोहरे मापदंड के आरोप
समाचार एजेंसी एएनआई(ANI) को दिए एक इंटरव्यू में डॉ. इलाही ने कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। (Iran Nuclear Weapons Statement) उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं और उसके परमाणु प्रतिष्ठानों की लगातार निगरानी की जाती है, जबकि कुछ अन्य देशों को ऐसी किसी सख्त जांच या कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ता।
शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु शक्ति चाहता है ईरान
डॉ. इलाही ने स्पष्ट किया कि ईरान परमाणु ऊर्जा का उपयोग सामाजिक, वैज्ञानिक और मानवीय कार्यों के लिए करना चाहता है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु शक्ति ईरान की जरूरत है, लेकिन दुर्भाग्य से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके साथ भेदभाव किया जाता है। (Iran Nuclear Weapons Statement) कुछ देशों के पास परमाणु हथियार हैं और वे उनका उपयोग भी करते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाता।
- Advertisement -
भारत-ईरान संबंधों का 3000 साल पुराना इतिहास
डॉ. इलाही ने भारत और ईरान के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग और सांस्कृतिक संबंध इस्लाम के उदय से भी सैकड़ों वर्ष पहले के हैं। उस समय ईरान में भारत के गणित, खगोल विज्ञान और चिकित्सा से जुड़े ग्रंथों का अध्ययन किया जाता था।
Also Read –PM Modi: PM मोदी ने 61,000 युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र, बोले- यह राष्ट्र निर्माण का न्योता है
भविष्य में और मजबूत होंगे द्विपक्षीय संबंध
उन्होंने बताया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खामेनेई हमेशा भारत-ईरान के अच्छे संबंधों और सहयोग पर जोर देते हैं। डॉ. इलाही ने उम्मीद जताई कि चाबहार परियोजना के माध्यम से दोनों देशों के संबंध भविष्य में और मजबूत होंगे।
