India EU Trade Deal: भारत की अर्थव्यवस्था ने फिर से साबित कर दिया कि दुनिया के बड़े टैरिफ और धमकियों से उसे रोक पाना आसान नहीं है। जब अमेरिका लगातार अपने हाई टैरिफ और धमकियों से दुनियाभर को डराने में लगा हुआ है, वहीं भारत ने अपने कदम तेज किए हैं और व्यापारिक साझेदारी को नई ऊँचाई पर पहुंचाया है। (India EU Trade Deal) अब भारत यूरोप के साथ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एफटीए (FTA) के करीब है, जो देश की वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा।
India EU Trade Deal: दावोस में यूरोपीय संकेत
दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक मंच वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट संकेत दिए कि EU-India FTA अंतिम पड़ाव पर है। उन्होंने इसे अब तक की सबसे बड़ी ट्रेड डील करार दिया, जो 2 अरब लोगों के बाजार को कवर करेगी और ग्लोबल GDP का लगभग एक चौथाई हिस्सा प्रभावित करेगी। (India EU Trade Deal) उर्सुला ने कहा कि इस डील से यूरोपीय संघ के व्यापार संबंधों में विविधता आएगी और जोखिम कम होगा, साथ ही दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी।
भारत को मिलेगा 27 देशों का बाजार
यह एफटीए भारत के लिए बेहद अहम है। यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों तक भारत की पहुंच बढ़ेगी, निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा और तकनीकी सहयोग के नए अवसर खुलेंगे। (India EU Trade Deal) ब्रसेल्स के लिए भी यह डील चीन पर निर्भरता कम करने और विश्वस्तरीय सहयोगियों के साथ मजबूत संबंध बनाने का अवसर है। यह डील सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीति का भी हिस्सा बन रही है।
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लंबे समय से चल रही बातचीत
भारत-ईयू ट्रेड डील पर बातचीत साल 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन लंबे समय तक ठप पड़ी रही। 2022 में नई सक्रियता के साथ बातचीत फिर शुरू हुई और अब यह अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। (India EU Trade Deal?) यह डील डिजिटल शासन, महत्वपूर्ण तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में सहयोग को भी मजबूत करेगी।
ट्रंप के टैरिफ और वैश्विक आर्थिक दबाव
इस बीच, अमेरिका लगातार दुनिया को अपने टैरिफ से डराने में लगा है। ईरान और यूरोप पर 25% टैरिफ की धमकी के बाद, ट्रंप ने फ्रांस की वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ की चेतावनी दी। (India EU Trade Deal) इन कदमों ने वैश्विक शेयर बाजारों में हाहाकार मचा दिया, जापान से लेकर कोरिया तक के मार्केट क्रैश हुए, लेकिन भारत ने अपने व्यापार और आर्थिक विकास की राह पर कोई समझौता नहीं किया।
भारत की यह मजबूती दिखाती है कि वैश्विक दबावों और टैरिफ धमकियों के बीच भी देश अपने आर्थिक लक्ष्यों में अडिग रह सकता है और दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक के रूप में उभर सकता है।
