Who is Paresh Baruah: दक्षिण एशिया की बिसात पर इन दिनों एक ऐसा खतरनाक खेल खेला जा रहा है, जिसकी आंच सीधे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच सकती है। बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मची उथल-पुथल ने न केवल ढाका की सत्ता बदली, बल्कि भारत की सुरक्षा एजेंसियों की नींद भी उड़ा दी है। (Who is Paresh Baruah) खबर है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और चीन मिलकर भारत के सबसे ‘वांटेड’ उग्रवादी परेश बरुआ को दोबारा बांग्लादेश में बसाने की साजिश रच रहे हैं। यह वही परेश बरुआ है जिसने दशकों तक असम को दहलाने की कोशिश की और अब चीन की पनाह में छिपा बैठा है। अगर यह नापाक योजना कामयाब होती है, तो पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद की दबी हुई चिंगारी फिर से शोला बन सकती है।
Who is Paresh Baruah: कौन है परेश बरुआ और क्यों है वह भारत का सिरदर्द?
परेश बरुआ, जो ‘उल्फा-इंडिपेंडेंट’ (ULFA-I) का सर्वेसर्वा है, भारत के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। 1979 में गठित उल्फा का मकसद असम को भारत से अलग करना था। हालांकि 2023-24 में संगठन का एक बड़ा धड़ा भारत सरकार के साथ शांति समझौते पर सहमत हो गया, लेकिन बरुआ ने हथियार डालने से साफ इनकार कर दिया। (Who is Paresh Baruah) वह लंबे समय से चीन-म्यांमार सीमा पर युन्नान प्रांत में छिपा हुआ है, जहां उसे कथित तौर पर चीनी संरक्षण मिला हुआ है। बरुआ का इतिहास बांग्लादेश से पुराना है; 2004 के कुख्यात चटगांव हथियार कांड में भी उसका नाम प्रमुखता से आया था, जब उग्रवादियों के लिए चीन निर्मित हथियारों के 10 ट्रक पकड़े गए थे।
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हसीना की विदाई और यूनुस राज में बदलती हवा
शेख हसीना की सरकार भारत की एक भरोसेमंद मित्र थी। उनके कार्यकाल में बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए करना नामुमकिन था। (Who is Paresh Baruah) उन्होंने कई उग्रवादियों को पकड़कर भारत को सौंपा। लेकिन अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद जब से मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार संभाली है, हालात चिंताजनक हो गए हैं। भारत विरोधी तत्व अचानक सक्रिय हो गए हैं और पाकिस्तान-चीन का दखल ढाका में बढ़ गया है। हाल ही में बांग्लादेश हाईकोर्ट द्वारा चटगांव मामले में बरुआ की सजा को कम करना इस बात का बड़ा संकेत है कि नई सरकार का रुख भारत के ‘मोस्ट वांटेड’ अपराधियों के प्रति नरम हो रहा है।
पाकिस्तान की साजिश: ढाका को उग्रवाद का अड्डा बनाने की तैयारी
ताजा रिपोर्टें इशारा कर रही हैं कि आईएसआई अब जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी ताकतों के साथ मिलकर परेश बरुआ को चीन से निकालकर ढाका लाने की फिराक में है। मकसद साफ है—बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल कर भारत के ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर और पूर्वोत्तर राज्यों में अशांति फैलाना। (Who is Paresh Baruah) यह पाकिस्तान और चीन की एक संयुक्त रणनीति का हिस्सा नजर आता है, जहां वे बांग्लादेश को भारत के खिलाफ एक ‘लॉन्चिंग पैड’ की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं। यदि बरुआ ढाका से अपना नेटवर्क फिर से सक्रिय करता है, तो हथियारों की तस्करी और युवाओं की उग्रवाद में भर्ती फिर से शुरू हो सकती है।
भारत के लिए कितनी बड़ी है यह चुनौती?
पूर्वोत्तर के सात राज्य बांग्लादेश के साथ एक लंबी और छिद्रपूर्ण सीमा साझा करते हैं। ऐसे में अगर पड़ोसी देश में भारत विरोधी उग्रवादियों को पनाह मिलती है, तो यह हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट होगा। (Who is Paresh Baruah) भारत को अब न केवल कूटनीतिक स्तर पर यूनुस सरकार पर दबाव बनाना होगा, बल्कि सीमा पर भी अपनी चौकसी को कई गुना बढ़ाना होगा। दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीति में भारत के लिए यह समय ‘वेट एंड वॉच’ का नहीं, बल्कि बेहद सतर्क और आक्रामक सुरक्षा नीति अपनाने का है।
